Thursday, March 12, 2026
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अवैध जुआ वेबसाइट्स का गैर कानूनी प्रचार कर लाखों कमा रहे हैं Social Media Influencers

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने सोशल मीडिया के Influencers को विदेशी ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध जुआ प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की थी। सरकार ने यह साफ किया था कि इसका पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, साथ ही सोशल मीडिया पोस्ट और अकाउंट को हटा दिया जाएगा। लेकिन MIB की इस सख्त चेतावनी का Social Media और इसके Influencers पर कोई असर नहीं पड़ा है, क्योंक जुआ कंपनियां इनको एक एक पोस्ट के लिए लाखों रुपये का भुगतान कर रही हैं।

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क्लग टेक के सह-संस्थापक वैभव गुप्ता के मुताबिक, “जुआ प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने के लिए Influencers को बाज़ार से तीन गुना अधिक भुगतान किया जाता है। वे औसतन 50 लाख रुपये प्रति माह के दीर्घकालिक सौदे कर रहे हैं, जिसमें वे जितने चाहें उतने भुगतान किए गए प्रचार करने की सुविधा देते हैं। स्काईएक्सचेंज जैसे प्लेटफॉर्म से भुगतान प्रति सप्ताह 2 करोड़ रुपये तक जा सकता है।” गुप्ता की ही तरह, उभरते हुए कंटेंट क्रिएटर्स के समुदाय ज़ामो के सह-संस्थापक रचित जुनेजा ने कहा, “Influencers के पास इतनी बड़ी मात्रा में नकदी आ रही है, जिसे ट्रैक नहीं किया जा सकता, ऐसे में अधिकांश प्रभावशाली लोगों के लिए इस तरह के आसान पैसे को नकारना मुश्किल है। इन प्लेटफ़ॉर्म के खिलाफ़ खड़े होने वाले क्रिएटर्स की संख्या बहुत कम है और आप उन्हें अपनी उंगलियों पर गिन सकते हैं। ऐसे ब्रांड द्वारा दी जाने वाली प्रीमियम दरें मुख्यधारा के ब्रांडों के लिए 20% से लेकर कम विश्वसनीयता वाले नए प्लेटफ़ॉर्म के लिए 150% तक हो सकती हैं।” जुनेजा के शब्दों में, “जुआ प्रचार के क्षेत्र में सबसे बड़ी डील YouTuber द्वारा हासिल की जाती है।

प्रभावशाली लोग पहले से ही एक पोस्ट पर कंटेंट इंटीग्रेशन के लिए 10-50 लाख रुपये चार्ज करते हैं, जबकि इस क्षेत्र में कुछ बड़ी डील इंस्टाग्राम पर कई वीडियो के लिए 2-3 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रही हैं।”

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अवैध ऑफशोर बेटिंग ऐप को बढ़ावा देने वाले क्रिएटर्स के बारे में नियमों की कमी के कारण, समस्या बढ़ती जा रही है क्योंकि कुछ प्रभावशाली लोगों के पास अब इन ऐप को डाउनलोड करने के लिंक उनके Instagram बायो में भी एम्बेड किए गए हैं। जिन कारोबार में लोगों को आदत लगाई जाती है, उनमें उस बिजनेस को चलाने वालों का मार्जिन अधिक होता है; इसलिए, उनके पास सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और Influencers लोगों पर खर्च करने की अधिक क्षमता होती है। जुए के प्लेटफ़ॉर्म के लिए, प्रभावशाली मार्केटिंग न केवल मार्केटिंग के दृष्टिकोण से बल्कि डाउनलोड और उपयोगकर्ता अधिग्रहण के मामले में भी सीधे परिणाम देती है।

नियमों के बावजूद, कुछ क्रिएटर अपने Instagram बायो में खुलेआम जुए के प्लेटफ़ॉर्म के लिंक एम्बेड करके बच निकलते हैं। गुप्ता ने ऐसे प्रभावशाली लोगों पर प्रकाश डाला जैसे “सिमरन कौर, जो Instagram पर @symrann.k नाम से जानी जाती हैं और सोफिया अंसारी, जिन्हें Sofia9_official के नाम से जाना जाता है, CCPA के दिशा-निर्देशों का लगातार उल्लंघन करती हैं। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये सिर्फ़ कुछ चुनिंदा उदाहरण हैं और ऐसे बहुत से क्रिएटर हैं जो अपने अकाउंट पर जुए के प्रचार का सहारा लेते हैं।”

इस पर ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन के सीईओ रोलैंड लैंडर्स ने कहा, “रेगुलेशन की कमी के कारण, इन प्लेटफ़ॉर्म को टीडीएस या जीएसटी का भुगतान नहीं करना पड़ता है, इसकी वजह से यह अक्सर भारी विज्ञापन करते हैं, जिससे वे उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन जाते हैं। लेकिन यूजर के लिए यह काफी रिस्की है, क्योंकि उनके पास धोखाधड़ी से सुरक्षा, जिम्मेदार गेमिंग और अन्य सुरक्षा उपाय नहीं होते हैं। भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास इन ऑफशोर संस्थाओं पर अधिकार क्षेत्र नहीं है, जिससे गलत व्यवहार करने वाले उपयोगकर्ता बिना किसी सहारे के रह जाते हैं।

अप्रत्यक्ष प्रचार के बारे में बात करते हुए, जो अभी भी जुए की सामग्री के प्रचार मिश्रण का एक बड़ा हिस्सा बने हुए हैं, लैंडर्स ने कहा, “जबकि हमें बारीकियों के बारे में पता नहीं है, यह ध्यान देने योग्य है कि ये प्लेटफ़ॉर्म ऐसे पेजों के साथ भी सहयोग करते हैं जिनकी पहुँच काफ़ी है, लेकिन वे सीधे उनका प्रचार नहीं करते हैं। इसके बजाय, वे अपना लोगो, नाम या लिंक किसी ऐसी रील में डाल सकते हैं जिसका साझा की गई सामग्री से कोई संबंध नहीं है।

इसलिए, यह केवल व्यक्तिगत प्रभावशाली व्यक्ति ही नहीं हैं, बल्कि अनाम मीम पेज या ऐसे पेज भी हैं जो दूसरों द्वारा बनाई गई सामग्री को क्यूरेट करते हैं, जो इन प्लेटफ़ॉर्म को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देते हैं।

गहराई से देखें तो, ऐसे सहयोगों के चरम सीजन आमतौर पर तब होते हैं जब आईपीएल और विश्व कप जैसे खेल आयोजन होते हैं। जुआ प्लेटफ़ॉर्म इन खेल आयोजनों के दौरान ग्राहकों को लुभाने के लिए कई मार्केटिंग तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।

मार्केटिंग रणनीति पर टिप्पणी करते हुए, गुप्ता ने कहा, “स्काईएक्सचेंज ने 2023 में एक प्रचार अभियान शुरू किया, जिसमें ऐसे क्रिएटर्स शामिल थे जिन्होंने बताया कि कैसे उन्हें ऐप पर सबसे ज़्यादा खर्च करने के लिए दुबई और थाईलैंड में नौकाओं पर शीर्ष मॉडल के साथ विशेष पार्टियों के लिए निमंत्रण मिले। अप्रत्यक्ष रूप से उपयोगकर्ताओं से ज़्यादा जुआ खेलने और मॉडल के साथ पार्टी करने का मौका जीतने के लिए कहा गया।”

ब्रांडों के लिए यह सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है कि वे ऐसे प्रभावशाली लोगों के साथ सहयोग न करें जिनके पास सट्टेबाजी ऐप से लिंक हैं। इस पर जुनेजा का कहना था, “यह प्रक्रिया अभी भी वैसी ही है जैसे पैम्पर्स उन महिला प्रभावशाली लोगों का चयन करता है जिन्होंने पिछले छह महीनों में हग्गीज़ के साथ काम नहीं किया है। इसकी सूचना प्रभावित करने वाली एजेंसी को दी जाती है, जो इस पर कार्रवाई करती है।

Gaming सेक्टर में 100 FDI पर विचार कर रही है केंद्र सरकार

28 परसेंट जीएसटी के बाद गेमिंग सेक्टर में परेशानियों को देखते हुए सरकार अब गेमिंग में 100 प्रतिशत डायरेक्ट विदेशी निवेश (FDI) पर विचार कर रही है। गेमिंग सेक्टर की कंपनियां ख़ासकर रियल मनी गेमिंग कंपनियां इन दिनों भारी परेशानियों में जूझ रही है। 28 परसेंट जीएसटी ऑन डिपॉजिट होने के बाद से आरएमजी कंपनियां काफी नुकसान में हैं और बहुत सारी छोटी कंपनियों ने तो अपना कारोबार भी समेट लिया है। साथ ही अब इन कंपनियों को विदेशी निवेशक मिलने में भी परेशानी हो रही है। इसको देखते हुए सरकार इस सेक्टर पर कुछ मेहरबानी करने का विचार कर रही है। हालांकि जो कंपनियां बैटिंग और गैंबलिंग गतिविधियों में लिप्त होंगी, उनके लिए सरकार यह सुविधा नहीं देगी।

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गेमिंग सेक्टर में अभी विदेशी निवेश करने के लिए सरकार की मंजूरी की जरुरत होती है। भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी मिलने में कई बार काफी समय लग जाता है, इससे विदेशी निवेशक भी कई बार परेशान होकर यहां निवेश नहीं करते हैं। दूसरी ओर अन्य गेमिंग कंपनियों यानि कैजुअल गेमिंग कंपनियों पर भी इस FDI रूट की वजह से कई बार परेशानियों में घिर जाती हैं और उन्हें भी एफडीआई मिलने में दिक्कतें आ जाती हैं।

कॉमर्स मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है, इसपर अब आगे की कार्रवाई होगी। गेमिंग सेक्टर उभरता हुआ सेक्टर है। इसमें काफी संभावना है। भारत से काफी कंटेंट दुनियाभर में निर्यात हो रहा है। अगर भारत गेमिंग हब बन जाता है तो इससे दुनियाभर में भारतीय गेमिंग की मांग बढ़ेगी और भारत में रोज़गार और विदेशी मुद्रा भी आएगी। लिहाजा गेमिंग को लेकर सरकार गंभीर है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गेमिंग को लेकर संभावनाओं पर सकारात्मक बातें कहीं थी और उन्हें देश के प्रमुख गेमर्स से मुलाकात भी की थी। इसके बाद से ही लग रहा था कि सरकार गेमिंग को लेकर कुछ सकारात्मक कदम उठा सकती है।

Blue whale के Gaming addiction से किशोर ने की आत्महत्या

पुणे में रहने वाले 15 साल के किशोर ने जानलेवा ‘ब्लू व्हेल’ गेम (The deadly Blue Whale game) से प्रभावित होकर एक इमारत की 14वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। नाबालिग ने एक नोट छोड़ा था, जिस पर ‘लॉगआउट’ लिखा था। शुरुआती पुलिस जांच में पता चला कि आर्य श्रीराव नामक लड़के को पिछले कुछ महीनों में ऑनलाइन गेम की लत (online game addiction) लग गई थी, वह खुद को अलग-थलग कर लेता था और घंटों लैपटॉप पर बिताता था। आर्य 10वीं कक्षा का छात्र था और पुणे के पिंपरी चिंचवाड़ का रहने वाला था।

पुलिस उपायुक्त (जोन I) स्वप्ना गोरे ने समाचार एजेंसी को बताया, “हमें उसकी नोटबुक से एक कथित सुसाइड नोट मिला है, जिसमें ‘लॉग आउट’ लिखा है। उसने ‘XD’ भी लिखा है, जो वह ऑनलाइन गेम हो सकता है, जिसे वह खेल रहा था। हम आत्महत्या के पीछे की असली वजह की जांच कर रहे हैं।”

उसकी नोटबुक की गहन जांच में उसके अपने घर के नक्शे, कोडिंग भाषा में लिखे नोट और खिलाड़ियों की सूची मिली है। उसके कमरे से बरामद एक कागज़ पर मल्टीप्लेयर कॉम्बैट गेम का उल्लेख था और उसके अपार्टमेंट और गैलरी का एक पेंसिल स्केच भी दिखाया गया था, जिसमें बताया गया था कि उसे कहाँ से कूदना था।

लड़के के पिता, उमेश श्रीराव ने सभी माता-पिता से इस त्रासदी के मद्देनजर अपने बच्चों की हरकतों के प्रति अधिक सावधान रहने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा कुछ महीनों से अपनी कई चीज़ें छिपा रहा था, यहाँ तक कि उसने अपने लैपटॉप की सारी सर्च हिस्ट्री डिलीट करने जैसे कदम भी उठाए थे।

साइबर विशेषज्ञ जाँच में आगे मदद कर रहे हैं क्योंकि उसके माता-पिता को उसके डिवाइस का पासवर्ड नहीं पता था। उसकी माँ स्वाति श्रीराव को अपने बेटे की मौत के बारे में सोसाइटी के व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए पता चला। उन्होंने कहा, “आर्य एक ऐसा लड़का था जो बात करने में झिझकता था और कम ऊँचाई से भी कूदने से डरता था, फिर भी उसने 14वीं मंज़िल से छलांग लगा दी।” उन्होंने आर्य की बीमार विचारों और संगीत में बढ़ती रुचि के बारे में भी बताया क्योंकि वह कहने लगा था कि “जीवन और मृत्यु एक समान हैं।”

इस बच्चे की आत्महत्या की घटना ने “ब्लू व्हेल” गेम पर चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है, एक ऑनलाइन गेम जिसे “आत्महत्या का खेल” भी कहा जाता है, इस गेम ने 2017 में दुनिया भर में हलचल मचा दी थी। इस गेम में युवाओं को टारगेट करके उन्हें 50 दिनों की अवधि में कई काम सौंपे गए थे और अंतिम काम में उन्हें आत्महत्या करने के लिए कहा जाता था। भारत में ब्लू व्हेल का पहला शिकार जुलाई 2017 में हुआ था। यह मुंबई का 14 वर्षीय स्कूली छात्र मनप्रीत सिंह साहनी था, जिसने 7वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस, यूक्रेन, भारत और अमेरिका में इस गेम के कारण 100 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है।

Gaming कंपनियों के जीएसटी में अगले साल अप्रेल तक बदलाव संभव: संजय मलहोत्रा

केंद्र सरकार गेमिंग कंपनियों पर लगने वाले जीएसटी पर अगले साल अप्रेल तक समीक्षा कर सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि गेमिंग कंपनियों को राहत दी जाएगी। रेवेन्यू सक्रेटरी संजय मलहोत्रा के मुताबिक सरकार ने गेमिंग कंपनियों से 14000 करोड रुपए के जीएसटी कलेक्शन का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2025 तक रखा गया है। अक्टूबर में जीएसटी कांउसिल ने गेमिंग कंपनियों पर 28% जीएसटी लगाया था, इस टैक्स के मुताबिक जितना भी डिपॉजिट इन गेमिंग कंपनियों के पास होगा, उसपर 28% जीएसटी लगेगा। इससे पहले यह कंपनियां अपने कमीशन पर 18 पर्सेंट जीएसटी भर रही थी।

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संजय मल्होत्रा के मुताबिक 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्तीय साल में सरकार ने जीएसटी से लगभग 75 अरब रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है, जोकि पिछले वित वर्ष से 16 अरब रुपए ज्यादा है। अक्टूबर से दिसंबर की क्वार्टर में टैक्स से करीब 35 अरब रुपए की आय हुई है।

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उन्होंने कहा कि गेमिंग इंडस्ट्री फिलहाल स्थिर हो चुकी है, इसलिए इस पर कोई भी टिप्पणी करना ठीक नहीं है। इन कंपनियों के जीएसटी रेट पर अप्रैल तक रिव्यू किया जाएगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें किसी तरह का कोई बदलाव होगा। हालांकि सरकार ने यह जरूर कहा कि इससे जुड़े कुछ नए नियम जोड़े जा सकते हैं। मल्होत्रा ने कहा कि गेमिंग कंपनी से जीएसटी कलेक्शन करीब 1700 करोड रुपए पर हर महीने हो गया है जो की अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 1800 करोड़ रुपये हर महीने से ज्यादा हो जाएगा बड़ी बात यह है की सरकार का हर महीने का जीएसटी कलेक्शन अब लगभग 2 लाख करोड रुपए को छूने लगा है और इसमें गेमिंग कंपनियों का बड़ा हाथ है।

Dubai Lottery: यूएई में पहली बार शुरु की गई लाइसेंस लॉटरी

दुबई में पहली बार लाइसेंस लॉटरीThe UAE’s first licensed lottery operation) शुरु होने जा रही है। यूएई लॉटरी के तहत गेमिंग ऑपरेटर गेम एलएलसी ने ऑनलाइन लॉटरी शुरु की है, जो गेम डेवलपमेंट, लॉटरी ऑपरेशन जैसे कार्यों में पहले से ही माहिर है। ‘यूएई लॉटरी’ के बैनर तले काम करते हुए, कंपनी लॉटरी और अन्य खेलों की “विविध रेंज” पेश करेगी, जो “खिलाड़ियों की पसंद और पैसा लगाने संबंधी जरुरतों को देखते हुए डिज़ाइन की गई है”। हालांकि इसमें किस तरह के खेल होंगे यह अभी साफ नहीं है।

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यूएई के पहले लाइसेंस प्राप्त लॉटरी ऑपरेशन की घोषणा रविवार को की गई, जो वाणिज्यिक गेमिंग के लिए एक नियामक ढांचे की स्थापना को दिखाता करता है। इस लाइसेंस की घोषणा करते हुए जनरल कमर्शियल गेमिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी (GCGRA) ने कहा कि खेलने वालों के हितों को देखते हुए रेगुलेटर का फ्रेम वर्क डिजाइन किया गया है। यह लॉटरी सहित सभी वाणिज्यिक गेमिंग गतिविधियों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। यूएई में बिना लाइसेंस के वाणिज्यिक गेमिंग ऑपरेटरों और खिलाड़ियों दोनों के लिए अवैध है।

Real Money Gaming कंपनियों से मिल रहा है सरकार को सालाना 12 हज़ार करोड़ रुपये

रियल मनी गेमिंग पर 28% जीएसटी लगने के बाद सरकार के रेवेन्यू में गेमिंग से सरकार के रेवेन्यू में कई गुना बढ़ोतरी हो गई है। रेवेन्यू सचिव संजय कुमार अग्रवाल के मुताबिक जहां गेमिंग इंडस्ट्री से पहले करीब ढाई सौ करोड़ रूपया महीने के जीएसटी के तौर पर आ रहे थे, वही टैक्स बढ़ाने के बाद यह औसतन 1100 करोड़ रूपये महीने तक पहुंच गए हैं, यानी साल में लगभग 12 000 करोड़ के आसपास का जीएसटी रियल मनी गेमिंग कंपनियां जमा कर रही है। जबकि इससे पहले यह 3000 करोड़ के आसपास ही हो रहा था। ऐसे में इन गेमिंग कंपनियों पर 28% जीएसटी ऑन डिपॉजिट हटाने या कम करने की संभावना काफी कम हो गई है।

सेंट्रल बोर्ड का इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल के मुताबिक 28% टैक्स प्रोस्पेक्टिव नेचर का टैक्स है, जो की रियल मनी गेमिंग पर लगाया गया है ,जबकि जो पुरानी जीएसटी को लेकर मामले चल रहे हैं वह सुप्रीम कोर्ट उन पर फैसला लिया जाना है।

जीएसटी काउंसिल ने रियल मनी गेमिंग कंपनी पर 28% टैक्स की सिफारिश की थी, जो की 1 अक्टूबर से लागू हो गई थी और उसके बाद गेमिंग कंपनियों को 28% जीएसटी ओं डिपॉजिट देना पड़ रहा है। इसकी वजह से कई सारी कंपनियां बंद भी हुई, लेकिन सरकार के खाते में रियल मनी गेमिंग पर बनाए गए टैक्स की कारण काफी मोटी रकम आ रही है।

वार्नर ब्रदर्स ने मल्टीवर्सस की परेंट कंपनी Player First Games का अधिग्रहण किया

दुनिया की प्रमुख इंटरटेनमेंट कंपनी वार्नर ब्रदर्स ने मल्टीवर्सस की परेंट कंपनी Player First Games का अधिग्रहण कर लिया है। इसके साथ ही मल्टीवर्सर स्टूडियो के सह-संस्थापक टोनी हुइन्ह और क्रिस व्हाइट स्टूडियो को लीड करते रहेंगे।

मल्टीवर्सस को आधिकारिक तौर पर मई में 2022 और 2023 में प्रारंभिक पहुँच और ओपन बीटा रिलीज़ के बाद लॉन्च किया गया। हुइन्ह ने एक विज्ञप्ति में कहा “हमारी टीम वार्नर ब्रदर्स गेम्स परिवार में शामिल होने के लिए उत्साहित है, और हमें लगता है कि यह मल्टीवर्सस के लिए कुल मिलाकर बहुत अच्छा होगा,”। “हम मल्टीवर्सस गेम को सबसे बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं और टीम अब पब्लिशर के साथ है, जोकि खिलाड़ियों के लिए बहुत अच्छा है।

यह घोषणा मल्टीवर्सस सीज़न 2 की रिलीज़ से पहले हुई, जोकि लाइव होने वाला है। रैंक्ड मोड के अलावा, नए सीज़न में समुराई जैक और बीटलजूस को जोड़ा जाएगा। वे एजेंट स्मिथ, जोकर और अन्य सहित वार्नर ब्रदर्स के कई अन्य पात्रों में शामिल हो गए हैं। मल्टीवर्सस की समीक्षा इसके रिलीज के बाद से ही ज्यादातर सकारात्मक रही है, हमारी अपनी समीक्षा में कहा गया है, “मल्टीवर्सस एक शोरगुल वाला प्लेटफ़ॉर्म फ़ाइटर है, जो खिलाड़ियों को इसके विविध पात्रों की ताकत और कमज़ोरियों को जानने और एक टीम के हिस्से के तौर पर जीतता है।

ऑनलाइन 2v2 पर इसका फ़ोकस का मतलब है कि इसमें स्मैश ब्रदर्स जैसे गेम की पिक-अप-एंड-प्ले नहीं होंगे, लेकिन यह शैली के अन्य गेम से इसे अलग करने का एक अच्छा काम भी करता है। मल्टीवर्सस को अपनी उज्ज्वल क्षमता को पूरा करने के लिए चरणों और पात्रों के अपने वर्तमान सीमित चयन को बढ़ाने के लिए समय की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इसकी नींव पहले से ही बहुत मजबूत है।

” वार्नर ब्रदर्स गेम्स के अध्यक्ष डेविड हदाद ने एक बयान में कहा, “हमने मल्टीवर्सस को बनाने और लॉन्च करने के लिए कई वर्षों तक प्लेयर फ़र्स्ट गेम्स के साथ काम किया है, और हम वार्नर ब्रदर्स गेम्स में इस प्रतिभाशाली टीम का स्वागत करते हुए बहुत खुश हैं। प्लेयर फ़र्स्ट गेम्स की उज्ज्वल और रचनात्मक टीम हमारी व्यापक विकास क्षमताओं में इज़ाफ़ा करती है।” प्लेयर फर्स्ट गेम्स एक स्टूडियो लाइन-अप में शामिल हो गया है जिसमें नेदररेल्म स्टूडियो, टीटी गेम्स, मोनोलिथ प्रोडक्शंस और एवलांच सॉफ्टवेयर भी शामिल हैं। वार्नर ब्रदर्स गेम्स को हाल ही में अपने मॉर्टल कोम्बैट: ऑनस्लॉट मोबाइल गेम के बंद होने के कारण छंटनी का सामना करना पड़ा, साथ ही सुसाइड स्क्वॉड: किल द जस्टिस लीग भी रिलीज के बाद से संघर्ष कर रहा है। इसके बावजूद, वार्नर ब्रदर्स गेम्स ने कहा है कि यह लाइव सर्विस गेम्स पर दोगुना जोर देना जारी रखेगा, जिसमें मल्टीवर्सस भी शामिल है।

Video Gaming सेक्टर को बजट में मिल सकती है राहत?

विडियो गेमिंग सेक्टर (Video gaming sector) को लेकर इस बार बजट में कुछ राहत की उम्मीद की जा रही है, गेमिंग सेक्टर खासकर वीडियो गेम सेक्टर ने पिछले दिनों सरकार से रियल मनी गेमिंग (Real Money Gaming) और वीडियो गेम सेक्टर में पॉलिसी का अंतर साफ करने की अपील की है। साथ ही इस पर लगने वाले 18 परसेंट टैक्स को घटाकर 12% करने की अपील भी सरकार से की है।

इंडस्ट्री को उम्मीद है कि इस बार बजट में उनके लिए कुछ फेवरेबल पॉलिसीज और टैक्स रिलीफ का काम हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो गेमिंग सेक्टर खासकर वीडियो गेमिंग सेक्टर के लिए यह बहुत फायदेमंद हो सकता है। हाल ही में कि भारत में वीडियो गेम इंडस्ट्री में काम करने वाले करीब 70 गेमिंग कंपनियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दफ्तर में एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने वीडियो गेम सेक्टर पर जीएसटी 18 से घटाकर 12% करने की अपील की थी।

इससे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई गेमर से मुलाकात कर इस सेक्टर के लिए कुछ नई पॉलिसीज पर बात की थी। इंडियन डिजिटल गेमिंग समिति के अध्यक्ष राजन नवानी ने कहा कि भारत और वीडियो गेमिंग सेक्टर भारतीय इंडस्ट्री के लिए बहुत संभावनाओं वाले सेक्टर हैं। नवानी के मुताबिक भारत में बहुत सारे टैलेंटेड गेमर हैं, पर वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी कंप्लीट नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में हमें उन गेमर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने के लिए गेमिंग स्टूडियो, क्रिएटिव और वीडियो गेम कंटेंट बनाने वालों के लिए टैक्स में राहत देनी चाहिए, ताकि सेक्टर में इन्वेस्टमेंट आए और यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो जिससे स्किल्ड की भारत वर्कफोर्स तैयार किया जा सके।

अब Kiddopia भी हुआ Nazara Teach का, पेपर बोट की 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी

गेमिंग और स्पोर्ट्स मीडिया कंपनी नज़ारा टेक्नोलॉजीज ने पेपर बोट ऐप्स (PBA) को खरीद लिया है। कंपनी ने इसके प्रमोटर अनुपम और अंशु धानुका से 300 करोड़ रुपये में 48.42% अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की है। 48.42 परसेंट हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब नज़ारा ने पेपर बोट ऐप्स में 100% हिस्सेदारी हासिल कर ली है। इससे पहले 2019 में नज़ारा ने PBA में 50.91% हिस्सेदारी खरीदी थी।

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पीआर राजेंद्रन, आर कल्पना और पीआर जयश्री ने पेपर बोट ऐप्स बच्चों के डिजिटल गेमिफाइड लर्निंग ऐप ‘किडोपिया’ का डेवलपर और प्रकाशक है। किडोपिया एक सब्सक्रिप्शन-आधारित ऐप है जिसे दो से सात साल के बच्चों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस कंपनी की अधिकांश इंकम अमेरिका से आती है। इस साल मार्च में, नज़ारा ने अगले 24 महीनों के भीतर विलय और अधिग्रहण के लिए $100 मिलियन का निवेश करने की योजना बनाई थी।

मई में, नाज़ारा ने मोबाइल गेमिंग सहायक नेक्स्टवेव मल्टीमीडिया में संस्थापक शेयरधारकों पीआर राजेंद्रन, आर कल्पना और पीआर जयश्री से शेष 28.12% हिस्सेदारी खरीदकर 100% हिस्सेदारी हासिल की। ​​नाज़ारा की पोर्टफोलियो कंपनियों में ईस्पोर्ट्स स्पेस में नोडविन गेमिंग, स्पोर्ट्स मीडिया स्पेस में स्पोर्ट्सकीडा और प्रो फुटबॉल नेटवर्क शामिल हैं। पिछले महीने, नाज़ारा समर्थित नोडविन गेमिंग ने घोषणा की थी कि उसकी सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी ने शेयर स्वैप डील के माध्यम से बर्लिन स्थित फ़्रीक्स 4यू में अपनी हिस्सेदारी को किस्तों में 100% तक बढ़ाने के लिए निश्चित समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

Gaming के दीवानों के लिए मुंबई में आयोजित हो रहा है GamingCon

Gaming के दिवानों के लिए गेमिंगकॉन मुंबई में गेमिंग सेमिनार करने जा रही है, जोकि वीडियो गेम खेलने वालों को समर्पित होगा और इसने PlayStation भी भागीदार है। “भारतीय गेमर्स के लिए यह उत्सव” शहर में 30 नवंबर से 1 दिसंबर तक गोरेगांव के नेस्को में आयोजित किया जाएगा।

इंस्टाग्राम पर गेमिंगकॉन अकाउंट ने 17 जुलाई को इसकी घोषणा की। हम इस आयोजन में कंसोल के लिए एक जगह गेमिंग होगी। जो मुंबई कॉमिक कॉन के समान है। इस आयोजन में कॉस्प्ले इवेंट और नवीनतम गेम, उत्पाद लॉन्च और VR अनुभवों के प्रदर्शन के साथ-साथ प्रभावशाली लोगों के साथ बातचीत के अवसर भी शामिल हैं। इस गेमिंग फेस्ट में आने वाले करियर ज़ोन से लाभ उठा सकते हैं। जहाँ महत्वाकांक्षी गेम डेवलपर्स, डिज़ाइनर और कलाकार को कंपनियों में अधिकारी मिल सकते हैं। गेमिंगकॉन मुंबई में होने वाले इंडियन गेम्स एक्सपो (IGX) के बाद उपभोक्ताओं को लक्षित करने वाला दूसरा गेम इवेंट है, जो पिछली बार 2019 में शहर में आयोजित किया गया था। 2020 का आयोजन COVID-19 महामारी के कारण नहीं हो पाया था।