Friday, March 13, 2026
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GST Council on Gaming: गेमिंग सेक्टर पर जीएसटी 28% डिपॉजिट पर, 6 महीने में रिव्यू

GST Council on Gaming: गेमिंग सेक्टर और कॉसिनो पर जीएसटी काउंसिल की बैठक में 28 परसेंट जीएसटी डिपॉजिट पर लगा दिया गया है। जीएसटी काउंसिल ने अपनी पिछली बैठक के एक फैसले में बदलाव किया है, पहले सरकार ने जीएसटी फुल फेस वैल्यू पर लगाया था, लेकिन अब ये डिपॉजिट पर कर दिया गया है। ये बैठक वर्चुअल तरीके से वित्त मंत्रालय में चली।

बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि दिल्ली ने गेमिंग पर 28 परसेंट जीएसटी का विरोध किया था। जबकि कैसिनो को लेकर गोवा और सिक्किम ने विरोध किया था। बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर रही थी। बैठक से पहले दिल्ली की वित्त मंत्री अतिशी ने गेमिंग सेक्टर पर 28 परसेंट जीएसटी का विरोध करते हुए कहा था कि इससे स्टार्टअप सेक्टर को नुकसान होगा।

इंडस्ट्री का मानना है कि अगर 28 परसेंट जीएसटी फुल फेस वैल्यू पर लगेगा तो अगले तीन महीनों में इंडस्ट्री लगभग खत्म हो जाएगी, कुछ एक या दो कंपनियां ही इसके बाद काम कर पाएंगी, इससे लाखों लोगों का रोज़गार भी जाएगा। अगर जीएसटी डिपॉजिट पर लगेगा तो सिर्फ 8-10 बड़ी कंपनियां ही बच पाएंगी। इसलिए कंपनियां लगातार इस 28 परसेंट टैक्स को ग्रास गेमिंग रेवेन्यू (GGR) पर लगाने की वकालत कर रही हैं।

‘नो जीएसटी’ का दावा कर सरकार को नुकसान पहुंचा रही हैं अवैध विदेशी वेबसाइट, अब छोटे इन्फ्लूएंसर्स के जरिए कर रही हैं प्रचार

इंडियन प्रीमियर लीग हमेशा से सट्टेबाजी साइटों के लिए एक आकर्षक अवसर रहा है, लेकिन प्रभावशाली लोग अब भारत बनाम वेस्टइंडीज श्रृंखला को “नो जीएसटी” के जरिए लुभाने की कोशिश कर रही हैं। ऑनलाइन गेमिंग पर कर लगाने पर चर्चा करने के लिए 2 अगस्त को जीएसटी परिषद की निर्धारित बैठक से पहले गेमिंग उद्योग का सबसे बुरा डर सामने आ रहा है। असल में ऑफशोर सट्टेबाजी कंपनियां, जो आसान पैसा बनाने के विकल्पों के साथ खिलाड़ियों को लुभाने के लिए जानी जाती हैं उन्होंने पैसा कमाने के लिए नए प्रमोशन को शुरू कर दिया है और जिसके जरिए ये दावा किया जा रहा है कि ‘कोई टैक्स नहीं’ लिया जाएगा ।

जीएसटी के फैसले के बीच अब 1xBet, WinBuzz, Fairplay, और अन्य जैसे प्लेटफॉर्म अपना एक्सपेंशन कर रही हैं और सोशल मीडिया पर अभिनेताओं और प्रभावशाली लोगों के साथ अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। वह इन लोगों के जरिए अपने साइट को प्रमोट कर रही हैं। हालांकि अभी तक इस तरह की साइट बड़े इन्फ्लूएंर्स को ही एप्रोच कर रही थी लेकिन अब उन्होंने माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स (10,000-100,000 फॉलोअर्स) और नैनो-इन्फ्लुएंसर्स (100 से 10,000 फॉलोअर्स) को टारगेट किया है। ताकि ‘नो टीडीएस’, ‘नो जीएसटी’ और यहां तक कि ‘लॉसबैक बोनस’ के जरिए प्रचार कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ’24×7 जीतने वाली निकासी पर कोई जीएसटी नहीं, और रेफरल कोड बोनस’ जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए ये प्रमोशन कर रहे हैं। इन वीडियो के जरिए प्रचार करने के लिए ये इन्फ्लूएसर 1000 रुपये से 1 लाख रुपये के बीच शुल्क ले रहे हैं।

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर अविक सरकार ने कहा, “सरकार द्वारा ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर 28 फीसदी जीएसटी लगाने के फैसले के बाद प्लेयर्स ऑफशोर प्लेटफार्मों की ओर रुख कर रहे हैं और जहां ये दावा किया जा रहा है कि जीएसटी या टीडीएस नहीं लिया जाएगा।

फिल्म स्टार कर रहे हैं प्रचार

भारत के बाहर स्थित ऑनलाइन जुआ कंपनियां के लिए रणबीर कपूर, बादशाह, सुनील शेट्टी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे फिल्म स्टार प्रचार कर रही हैं। ये कंपनियां क्यूआर कोड को स्कैन करने से उपयोगकर्ताओं को व्हाट्सएप बिजनेस अकाउंट पर रीडायरेक्ट कर रही हैं और जिसमें खेलने वाले का नाम और पासवर्ड मिलता है और उसके बाद इन अवैध साइटों पर पहुंचा जा सकता है।

एलपीएल ने चौथे सीज़न के लिए कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइट बनी स्पांसर, मीडिया में दे रहे हैं जमकर विज्ञापन

श्रीलंका में ऑनलाइन जुआ अवैध होने के बावजूद लंका प्रीमियर लीग के चौथे सीजन के लिए कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों को कुछ प्रमुख प्रायोजकों के रूप में दिखाया गया है। हालांकि भारत में भी इस तरह की वेबसाइट बैन हैं। उसके बावजूद ये सभी धडल्ले से काम कर रही हैं और सरकार को नुकसान पहुंचा रही हैं।

टी20 फ्रेंचाइजी-आधारित लीग का शीर्षक प्रायोजक स्काईफेयर न्यूज है, जो ऑफशोर अवैध सट्टेबाजी वेबसाइट स्काईफेयर के लिए एक सरोगेट है, जो अपने संदिग्ध व्यवसाय के लिए खेल पर समाचार, व्यावहारिक विश्लेषण और विशेषज्ञ राय प्रदान करने का दावा करता है। आईपीजी ग्रुप के संस्थापक और सीईओ, अनिल मोहन शंखधर ने प्रायोजक के रूप में सट्टेबाजी वेबसाइट के लिए सरोगेट मिलने पर खुश जताई है।

दरअसल ये कंपनियां कई प्रस्तावों के माध्यम से लोगों को लुभाने के लिए सरोगेट वेबसाइटों का उपयोग करती हैं और देश में व्यवसायों के साथ पंजीकृत नहीं हैं। यही नहीं ये कंपनियां सरकार को टैक्स नहीं देती हैं। अवैध सट्टेबाजी प्रायोजकों में 1xbat, 1xbet के लिए सरोगेट, खेलोयार, सैट्सपोर्ट, वुल्फ777 और टाइगर एक्सचेंज शामिल हैं। इनमें से कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों को प्रचार के लिए टीम जर्सी में दिखाया गया है।

जानकारी के मुताबिक लगभग दो सप्ताह पहले पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच एक टेस्ट मैच में फेयरप्ले, 1xbet, स्केच आदि के लिए कई अवैध सट्टेबाजी के विज्ञापन दिखाए गए थे, जिससे लोगों को आश्चर्य होता है कि क्या सरकार वास्तव में उन्हें रोकने के लिए कुछ कर रही है। लाइसेंस प्राप्त कैसीनो को छोड़कर भारत की तरह ही श्रीलंका में भी सट्टेबाजी पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद, इन अवैध वेबसाइटों के विज्ञापन दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

मीडिया में किया जा रहा है प्रचार

भारत सरकार ने मीडिया घरानों और खेल लीगों को इन सरोगेट वेबसाइटों से प्रायोजन न लेने की चेतावनी और सलाह जारी की है, जबकि श्रीलंकाई सरकार इस पर आंखें मूंद रही है।

GST on deposits for online gaming, though not the ideal solution, will not be the death knell

Courtesy-www.financialexpress.com

The 50th GST Council meeting announced a 28% GST levied on full value for online gaming companies. While the announcement faced backlash from gaming companies and players alike, the meeting on August 2 would likely clarify how the tax will be levied on online gaming. The meeting that is being held via video conferencing might also decide on the legal amendments. In this interview with BrandWagon Online, John Joseph, strategic adviser, DeepStrat and former chairman and member (Policy), CBIC, talks about the taxation of the online gaming space and shares his opinion on how it is going to affect the space. (Edited Excerpts)

The GST council’s decision in its 50th meeting to levy 28% GST on “full value” for online gaming companies has been met with a lot of uproar from the industry. Even investors have shared their concerns with the Prime Minister’s office. How do you view this development?

The online gaming industry for more than two years has been engaging with the government to consider the Goods and Service Tax (GST) levy on gross gaming revenue (GGR) as the international best practice. The 50th GST council however decided to hike the GST rate from 18% to 28% and change the valuation from GGR to “full value”.

As far as the hike in the rate is concerned, I do not see it as a huge issue. Many industries in India, including entertainment, pay GST at this rate. The change in value however is concerning. The GST, if levied on every game will be a huge blow to the industry – especially given the issue of repeat taxation that has been flagged by the industry. Taxing the prize pool every time a user redeploys the money will make playing games prohibitive for the players, hiking the effective rate of taxation to more than 50%. This will mean that online gaming will be given less favourable treatment compared to casinos, where online gaming operators will be liable to pay GST at least two times more in comparison to casino operators.

The revenue secretary has clearly said that GST on GGR is not something that they are even considering. With that, what do you think could be a solution?

I think the GST Council should at least consider bringing online gaming at par with casinos. Like in the case of casinos, they should consider levying a one-time tax on the deposits, which is to be appropriated for all subsequent bets without any further tax on winnings that are utilised to play new games within the platform before any withdrawal. It will soften the blow for the industry significantly. The value erosion and loss of livelihood will still be significant but the industry will still have an opportunity to adapt and survive. I think the government has taken cognizance of the industry’s concerns and it is hoped that they will work to allay those concerns.

A lot of gaming companies have raised the concern that even if they are taxed on deposits their businesses will cease to exist. What is your opinion on this?

In my opinion, GST on deposits, though not the ideal solution, will not be the death knell that the industry is worrying that it will be. All the gaming companies have large and small-scale contests. With GST on deposits, the large-scale format will take over, making the smaller contests unviable. I am sure that the government understands this and is cognizant that with a little restructuring, it is expected that the industry may still be able to survive and in the long term maybe even thrive but the actual impact remains to be seen.

The revenue secretary has said that the exchequer would get an estimated additional revenue between Rs 17,000 crore to Rs. 20,000 crore, annually following the GST Council’s decision to levy a 28% tax on the “full value of the bet” on online gaming. In your opinion do you think this will hold in the long run?

There is no way to say for sure that this will hold going ahead if the proposed tax is levied. An increase in the tax rate in an ideal scenario does mean that more volume would be collected ostensibly. But this only holds if the total number of consumers remains the same and the revenue of the industry remains the same with the growth rate staying constant, which is not likely at all. The council needs to consider the concept of the ‘laffer curve’. The basic principle is that there is a point at which an increase in tax rates results in a decrease in tax revenue, due to the negative economic effects of high tax rates such as decreased incentives to work and invest.

In this particular case, the 28% GST, if levied on every game, will make playing games so prohibitive that a lot of users will move to offshore platforms. In fact, according to a recent Deloitte report, GST if levied on every game will reduce the government’s revenue from the industry by as much as 70% over the next five years. At the same time, a more rational and sustainable regime may result in a long-term sustained increment in the exchequer’s revenue.

Money laundering & terror financing: विदेशी अवैध गैंबलिंग साइट्स कर रही है टेरर फंडिंग, FIU का खुलासा

Money laundering & terror financing: इंकम टैक्स की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने विदेशी अवैध गेंबलिंग साइट्स (Offshore gambling sites) के जरिए मनी लाउंड्रिंग और टेरर फंडिंग की आशंका जताई है। वित्त की संसदीय कमेटी की रिपोर्ट में इंकम टैक्स की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट कहा है कि विदेशी गेंबलिंग साइट्स मल्टीपल यूपीआई और फर्जी बैंक अकाउंट्स के जरिए मनी लाउंड्रिंग कर रही है।

गेमिंगइंडिया.इन लंबे समय से अवैध विदेशी गैंबलिंग साइट्स के मनी लाउंड्रिंग से जुड़ी ख़बरें दे रही है। देश में अवैध जुए का सालाना कारोबार 2 लाख करोड़ रुपये से भी ज्य़ादा का है। इसमें फर्जी बैंक खातों और विभिन्न नामों पर अलग अलग यूपीआई आईडी के जरिए जुए के लिए दांव लगाए जाते हैं और फिर इस पैसे को नकली बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेशों में भेज दिया जाता है।

इंकम टैक्स की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) ने संसदीय कमेटी को इस बारे में दी जानकारी में आशंका जताई है कि ये पैसा टेरर फंडिंग में भी इस्तेमाल हो रहा है। संसदीय कमेटी को बताया गया है कि विदेशी अवैध गैंबलिंग साइट्स चार तरीकों से मनी लाउंड्रिंग कर रही हैं। FIU के मुताबिक ये साफ है कि टैक्स हैवन में बैठी हुई जुआ कंपनियां भारत में ये कारोबार कर रही हैं।

असल में देशभर में सैकड़ों की संख्या में इस तरह की अवैध वेबसाइट चल रही हैं और इन वेबसाइट को सरकार ने प्रतिबंधित भी किया है। उसके बावजूद ये वेबसाइट सरोगेट डोमेन के जरिए अपना अवैध कारोबार चला रही हैं। उनका कहना है कि खासबात ये है कि इन वेबसाइट ने कई फिल्म स्टार और सोशल मीडिया इंफ्लूएंशरों को अपने प्रमोशन के लिए उतारा है। जिसके कारण भोलेभाले देशवासी इनके जाल में फंसकर अपना पैसे का नुकसान कर रहे हैं।

GST on gaming deposits: डिपॉजिट पर जीएसटी लगने से सिर्फ बड़ी कंपनियां ही बचेंगी

GST on gaming deposits: गेमिंग सेक्टर की लगातार मांग के बाद जीएसटी काउंसिल इस सेक्टर पर 28 प्रतिशत जीएसटी फुल फेस वैल्यू की बजाए डिपॉजिट पर लगा सकती है। 2 अगस्त को काउंसिल की वर्चुअल बैठक में इस बाबत फैसला लिया जा सकता है। इसी तरह कैसिनो पर भी चिप खरीदने पर 28 प्रतिशत टैक्स का प्रस्ताव पास हो सकता है। इससे गेमिंग और कैसिनो को थोड़ी राहत तो मिलेगी, हालांकि सेक्टर के लोगों का कहना है कि इससे कंपनियों के रेवेन्यू में भारी गिरावट होगी और छोटी कंपनियां बंद हो सकती हैं।

फिलहाल देश में गेमिंग सेक्टर करीब 20 हज़ार करोड़ रुपये का है, जिससे केंद्र सरकार को सालाना 2000 करोड़ रुपये से ज्य़ादा का टैक्स मिलता है। साथ ही लाखों लोगों को इस सेक्टर से रोज़गार भी मिल रहा है। इसी तरह गोवा और सिक्किम में कैसिनो कारोबार राज्यों के टैक्स में एक बड़ी भूमिका तो निभाता ही है, साथ ही साथ टूरिस्ट को भी आकर्षित करता है।

सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी काउंसिल के लिए प्रस्ताव तैयार हो चुका है और उसमें डिपॉजिट और चिप खरीदने पर 28 प्रतिशत जीएसटी है। हालांकि इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक सरकार को मज़बूरी में ये फैसला लेना पड़ रहा है, क्योंकि फुल फेस वैल्यू पर टैक्स लगाने का मतलब होगा, हर बैट पर टैक्स, जोकि मल्टीपल टैक्स हो जाता है। जिसको कोर्ट में चेलैंज किया जा सकता था। लिहाजा इस फैसले को तार्किक किया गया है।

इस मामले पर देश की सबसे बड़ी गेमिंग फेडरेशन ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन ने कहा है कि “ऑनलाइन गेमिंग के लिए सबसे पुराने, सबसे बड़े और सभी गेमिंग फॉरमेट एसोसिएशन के रूप में हमने हमेशा गेम स्किल गेम्स की वकालत की है। हमारा मानना ​​है कि डिपॉजिट पर जीएसटी केवल बहुत बड़े खिलाड़ियों को तो मदद मिलेगी, लेकिन अधिकांश एमएसएमई गेमिंग स्टार्टअप बंद हो जाएंगे।
बड़े गेमिंग टूर्नामेंट कराने वाली कंपनियां भी इनको बंद कर सकती हैं, हालाँकि इससे उनके राजस्व पर काफी असर पड़ेगा और लगातार गेम या कैज़ुअल गेम खिलाने वाले प्लेटफ़ॉर्म ख़त्म हो जाएँगे।
एआईजीएफ में हमारा ध्यान भारतीय ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के विकास को बढ़ावा देना है। इसलिए, हमें उम्मीद है कि जीएसटी काउंसिल स्किल गेमिंग के सभी फॉरमेट के लिए वैल्यूवेशन में नेट डिपॉजिट पर टैक्स लगाएगी। इसके सरकारी खजाने का राजस्व तो बढ़ेगा ही, साथ ही सभी कंपनियों, विशेष रूप से एमएसएमई को भी मदद मिलेगी।''

गोवा में बीजेपी विधायक ने ‘मटका जुए’ को वैध करने का दिया सुझाव, बोले- राजस्व बढ़ाने का बेहतरीन जरिए

देशभर में गेमिंग उद्योग द्वारा गेम्स पर 28 फीसदी जीएसटी लागू करने का विरोध किया जा रहा है। वहीं कई राज्य के प्रतिनिधि भी जीएसटी को हटाने की मांग कर रहे हैं। वहीं नई जीएसटी दर पर बहस के बीच, गोवा में भाजपा विधायक माइकल लोबो ने प्रस्ताव दिया कि सरकार को राज्य लॉटरी में “मटका जुआ” शामिल करना चाहिए। इससे राज्य के खजाने को जीएसटी के माध्यम से अधिक राजस्व एकत्र करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि “मटका जुआ लाभदायक है। यह सभी निर्वाचन क्षेत्रों में संचालित है। यदि इसे लॉटरी के तहत लाया जाता है, तो राज्य सरकार को जीएसटी के माध्यम से लाभ होगा। बड़े पैमाने पर, खजाने को पैसा मिलेगा। इसके अलावा, लोगों को आधिकारिक तौर पर पैसा मिलेगा, “लोबो ने अपने बयान में कहा। विधायक ने अनुरोध रखते हुए जुए के कुछ रूपों को वैध बनाने के एक विवादास्पद मुद्दे का जिक्र किया। लोबो ने सुझाव दिया कि कई अवैध मटका संचालन पहले से ही हो रहे हैं, उन्हें कानून के तहत क्यों नहीं लाया जाए और विनियमित किया जाए।

जानिए क्या होता है मटका जुआ

मटका एक संख्या चयन-आधारित सट्टेबाजी है जहां एक व्यक्ति 00 से 99 तक संख्या का चयन करता है। पहले अंक को ‘खुला’ कहा जाता है, और दूसरे अंक को ‘बंद’ कहा जाता है। सही संख्या का अनुमान लगाने वाला व्यक्ति जीतता है। हालांकि इस महीने की शुरुआत में, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने घोषणा की थी कि सरकार इन अवैध मटका संचालन पर नकेल कसेगी।

वर्तमान में, भारत में जुआ के एकमात्र रूप कैसीनो, लॉटरी और घोड़े की दौड़ हैं। यहां समस्या जुआ नहीं बल्कि नैतिकता है, क्योंकि भारत में अधिकांश लोग जुए के खिलाफ हैं। तीन कानूनी जुआ विकल्प होने के बावजूद, अधिकांश राज्य नैतिक कारणों से उन्हें अनुमति नहीं देते हैं।

ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग, कैसीनो और हॉर्स रेसिंग पर 28फीसदी जीएसटी लागू

सरकार ने हाल ही में ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग, कैसीनो और हॉर्स रेसिंग के लिए कर की दर को पूर्ण अंकित मूल्य पर 28% तक बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि इस बढ़ोतरी से इन उद्योगों से मिलने वाले सरकारी कर राजस्व में खासी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यह सवाल उठाता है कि क्या सरकार को वास्तव में अधिक जुआ को वैध बनाने के माध्यम से अधिक राजस्व की आवश्यकता है।

अवैध सट्टेबाजी, जुआ प्लेटफार्मों पर बैन लगाने को एक्शन में सरकार, ‘नो टीडीएस, नो जीएसटी’ दावे वाले विज्ञापनों पर लगेगी रोक

जीएसटी काउंसिल के ऑनलाइन गेम्स पर 28 फीसदी लगाने के फैसले के बाद अब भारत सरकार ने बड़ा कदम अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के खिलाफ उठाने का फैसला किया है। इन अवैध प्लेटफार्म में ‘नो टीडीएस, नो जीएसटी’ विज्ञापनों में वृद्धि के साथ, वित्त मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने उपयोगकर्ताओं को लुभाने की कोशिश करने वाली इन फर्मों पर कार्रवाई करने का फैसला किया है।

एमईआईटीवाई ने पहले इनमें से कई अवैध सट्टेबाजी और जुआ प्लेटफार्मों को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। वे आमतौर पर उन देशों से काम करते हैं जहां लगभग कोई कराधान कानून नहीं है। वे भारत में व्यवसाय करने के लिए पंजीकृत नहीं हैं। हालांकि, वे स्थानीय हस्तियों और सरोगेट ब्रांडों के माध्यम से खुद को बढ़ावा देते हैं।

सीएनबीसी-टीवी 18 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी निकायों ने पहले से ही उन ऐप्स और साइटों की एक सूची तैयार करना शुरू कर दिया है जो ‘नो जीएसटी, नो टैक्स’ विज्ञापनों को बढ़ावा देकर उपयोगकर्ताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। खास बात ये है कि ये प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर का भी सहारा ले रहे हैं। ताकि यूजर्स इन पर विश्वास कर सके।

इससे पहले कि सरकार एक नए मिरर डोमेन की पहचान करे, इन साइटों को अपने प्लेटफार्मों पर अधिक उपयोगकर्ताओं को बढ़ावा देने और ऑनबोर्ड करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। सरकार को वर्तमान में उन पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगाने के लिए एक उचित तरीका चाहिए, जिस पर वह जन कल्याण में लगातार काम कर रही है।

जीएसटी परिषद की बैठक 2 अगस्त को

वर्तमान में, ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग उद्योग सकल गेमिंग राजस्व पर 28% के नए कर नियमों के तहत प्रारंभिक सिक्योरिटी या हर बैट पर टैक्स लगाने पर जीएसटी परिषद के फैसले पर स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहा है। इस विषय पर आगे की चर्चा और स्पष्टता जीएसटी परिषद द्वारा बुधवार, 2 अगस्त को ऑनलाइन एक वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक के माध्यम से किए जाने की उम्मीद है।

सेलिब्रिटी कर रहे हैं प्रमोशन

इस बीच, इन अवैध सट्टेबाजी और जुआ प्लेटफार्मों की सफलता में एक और कारक सेलिब्रिटी विज्ञापन हैं। इनमें से लगभग सभी सट्टेबाजी प्लेटफार्मों में सेलिब्रिटी / इन्फ्लुएंसर विज्ञापन हैं जो उनके ब्रांड को पूरी तरह से कानूनी और सुरक्षित के रूप में प्रचारित करते हैं। चूंकि इन हस्तियों के बहुत सारे फॉलोवर्स हैं, इसलिए ये अवैध सट्टेबाजी फर्म इसका लाभ उठाने में सक्षम हैं और लाखों अनजान उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करते हैं।

जबकि सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि इन हस्तियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (सीपीए) 2019 के तहत विज्ञापनों में दिखाई देने से रोका जा सकता है, कुछ नोटिसों को छोड़कर ऐसी कार्रवाई की कोई खबर नहीं है।

Ban on offshore Gambling: विदेशी गेमिंग एप्स पर लगेगा बैन?

देशी गेमिंग एप्स पर 28 परसेंट जीएसटी लगाने के बाद अब वित्त मंत्रालय ने विदेशी गेमिंग एप्स पर भी सख्ती करने जा रही है। विदेशी गेमिंग एप्स खुलेआम विज्ञापन दे रहे हैं कि बिना जीएसटी और टीडीएस के उनकी साइट पर आकर गेमिंग खेले। इसको देखते हुए वित्त मंत्रालय ने इन एप्स को बैन करने का मन बना लिया है। वित्त मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक इसके लिए वित्त मंत्रालय सूचना एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय से बात करेगा, ताकि जो गेमिंग एप्स टैक्स नहीं दे रहे हैं, उनको ब्लॉक किया जा सके।

ऑनलाइन गेमिंग में पैसे हारने के बाद युवक ने मौत को लगाया गले, बड़ रही हैं सुसाइड की घटनाएं

ऑनलाइन गेमिंग में पैसे हारने के बाद एक और युवक ने मौत को गले लगाया है। जानकारी के मुताबिक ओडिशा के बालासोर जिले के गुड़ा गांव के एक 19 वर्षीय छात्र ने ऑनलाइन गेम खेलने में 1 लाख रुपये से अधिक हारने के बाद कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

पुलिस के एक बयान के अनुसार, युवक की पहचान उदय कुमार बेहरा के रूप में की गई, जो बासुदेवपुर के एबी कॉलेज में द्वितीय वर्ष का छात्र था। वह एक छात्रावास में रह रहा था लेकिन दो दिन पहले अपने माता-पिता से मिलने आया था। उदय की मां ने बताया कि उसे PUBG/BGMI और Free Fire जैसे ऑनलाइन गेम खेलना पसंद था, जिस पर उन्होंने कई बार आपत्ति जताई थी। उनके परिवार के सदस्यों ने यह भी कहा कि वह अपने नुकसान से परेशान और उदास था। जिसके बाद उसने मौत का रास्ता चुना।

बुधवार की सुबह, युवक को उनके घर में लटका हुआ पाया गया और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिवार के सदस्यों में से एक, शशिकांत बेहरा ने कहा, “वह PUBG और फ्री फायर गेम का आदी था। ऑनलाइन गेमिंग के कारण मैंने अपने भतीजे को खो दिया। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह आवश्यक कदम उठाए ताकि और किसी की जान न जाए।”

फिलहाल इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि युवक ने वास्तव में कहां पैसे गंवाए या क्या आत्महत्या ऑनलाइन गेम के कारण हुई। जबकि उदय को PUBG/BGMI जैसे गेम खेलना पसंद था। आज के डिजिटल युग में बच्चों और वयस्कों दोनों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले दिनों लोगों के पैसे खोने और डिप्रेशन में जाने की कई खबरें सामने आई हैं।

पिछले दिनों ही तमिलनाडु में पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने ऑनलाइन गेम पर पैसे खोने वाले लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श का सुझाव दिया है। इससे इन व्यक्तियों को हानिकारक निर्णय लेने से रोकने में व्यापक मदद मिल सकती है।