Thursday, March 12, 2026
Home Blog Page 79

Lord Puneet Superstar ने नई रील के जरिए किया प्रतिबंधित सट्टेबाजी वेबसाइट Lotus365 का प्रचार

भारत में प्रतिबंधित ऑनलाइगेमिंग वेबसाइट Lotus365 के प्रचार में लगातार सेलिब्रिटी और सोशल मीडिया इंफ्लूएंशरों का नाम जुड़ता जा रहा है। अब पुनीत कुमार उर्फ लॉर्ड पुनीत सुपरस्टार का भी नाम इस वेबासाइट के प्रमोशन में जुड़ गया है। हाल ही में एक रील में प्रतिबंधित और अवैध सट्टेबाजी वेबसाइट लोटस365 का प्रचार करते हुए देखा गया था। लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इस रील के जरिए अपने लाखों फॉलोवरों को इस गेम से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में, उन्होंने रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी सीजन 2 में भी अभिनय किया, जिसके बाद उनकी लोकप्रियता बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंच गई।

उनकी लोकप्रियता का लाभ उठाते हुए Lotus365 ने डिजिटल एंटरटेनर के साथ करार किया है और वह अपने फॉलोवारों के बीच में इसका प्रचार कर रहे हैं। जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। गौरतलब है कि बिग बॉस में आने से पहले तक पुनीत के इंस्टाग्राम अकाउंट पर लगभग 300 हजार फॉलोअर्स थे, और अब 23 जून तक उनके फॉलोअर्स की संख्या 1.6 मिलियन को पार कर गई है, जिससे उनके फॉलोअर्स में 5 गुना वृद्धि हुई है।

बताया जाता है कि पुनीत की छवि बहुत साफ है, क्योंकि वह अपने सोशल मीडिया के माध्यम से जो भी आय अर्जित करते हैं, उससे गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन वितरित करते हैं। हाल ही में, उन्होंने भोजन वितरित करने और दान करना जारी रखने के लिए एक कार भी खरीदी। लेकिन लोटस365 का प्रचार करना किसी के गले से नीचे नहीं उतर रहा है। क्योंकि इस प्रतिबंधित वेबसाइट के जरिए उनके फैन धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं।

लोटस365 सेलिब्रिटी सहयोग के साथ एक रोल पर

हालांकि ये पहली बार नहीं है जब प्रतिबंधित सट्टेबाजी वेबसाइट ने प्रमोशन के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या सेलिब्रिटी के साथ करार किया है। दरअसल, हाल ही में लोकप्रिय बॉलीवुड स्टार सुनील शेट्टी ने भी इस प्लेटफॉर्म का प्रमोशन किया था। संगीतकार एमसी स्टेन, मिलिंद गाबा, जस्सी गिल, अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी, उर्वशी रौतेला, उन हस्तियों की सूची में शामिल हैं।

भारत में क्या कहता है नियम

हालांकि केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) और सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से सेलिब्रेटी को नोटिस भेजे हैं और ऐसी साइटों का प्रचार करने वाली हस्तियों के लिए 50 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

Ban on Online Games: ऑनलाइन गेम पर बैन में देरी पर केरल सरकार ने चिंता जताई, केरल में लागू है गेमिंग एक्ट

Ban on Online Games: कानून और गृह विभागों द्वारा ऑनलाइन गेम को प्रतिबंधित करने के लिए एक विधेयक पेश करने की सिफारिशों के बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि डेढ़ साल बाद भी प्रतिबंध को लागू करने की दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हुई है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विधानसभा सत्र के दौरान कानून में संशोधन करने की जरूरत बतायी और कहा कि अभी तक प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई है।

2021 में, राज्य सरकार ने ऑनलाइन रम्मी पर प्रतिबंध लगा दिया और एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की। हालांकि गेमिंग कंपनियों ने गेम के तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए हाईकोर्ट में फैसले का विरोध किया था। कंपनियों ने तर्क दिया कि खेल में मौका के बजाय कौशल शामिल था। उनकी दलील को स्वीकार करते हुए अदालत ने सरकार के प्रतिबंध पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी।

केरल में लागू है गेमिंग एक्ट

केरल गेमिंग एक्ट के तीसरे सेक्शन में प्रस्तावित संशोधन में जुआ खेलों को प्रतिबंधित करने, अधिनियम की धारा 14 (ए) में संशोधन करने के लिए सिफारिशें शामिल हैं ताकि पैसे पर आधारित रम्मी गेम को जुए के रूप में वर्गीकृत किया जा सके। तमिलनाडु ने पहले ही कानूनी संशोधन के माध्यम से ऑनलाइन गेम के लिए नियम बनाए हैं। जबकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश पहले ही उन पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। इस साल की शुरुआत में, केंद्र सरकार ने देश भर में ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध लगाने और विनियमित करने के उद्देश्य से एक मसौदा विधेयक जारी किया था। हालांकि, इस मामले पर अंतिम निर्णय अभी भी लंबित है। वहीं केन्द्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पहले ऑनलाइन गेम की तीन श्रेणियों के लिए नियम बनाने की जरूरत पर जोर दिया था।

Himachal Pradesh Police ने अंतरराज्यीय ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़ किया, 11 गिरफ्तार

हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला पुलिस ने एक अंतरराज्यीय ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि पुलिस मामले में और गिरफ्तारियों की उम्मीद कर रही है।

कांगड़ा की एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार व्यक्ति विभिन्न राज्यों से हैं, जिनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। पुलिस ने क्षेत्र में सक्रिय एक संभावित अंतरराज्यीय सट्टेबाजी गिरोह के बारे में 15 जून को दर्ज एक हालिया प्राथमिकी पर कार्रवाई की। जिसके बाद पुलिस ने उक्त स्थानों पर छापे मारे और व्यक्तियों को आईपीसी की धारा 420 के तहत गिरफ्तार किया।

कई सामान जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने पपरोला से 10 लैपटॉप, 1 सीपीयू, 1 हार्ड डिस्क, 6 मोबाइल फोन, 38 पासबुक, 27 चेकबुक, 24 एटीएम कार्ड और 20 सिम कार्ड और 3 लैपटॉप, 32 मोबाइल फोन, 10 एटीएम कार्ड, 13 सिम कार्ड, 1 राउटर, 1 पासपोर्ट, 7 आधार कार्ड, 8 पैन कार्ड और मोहाली से 3 वोटर कार्ड जब्त किए।

एक महीने में 65 लाख रूपये के लेनदेन के सबूत

एफआईआर में शिकायतकर्ता के बैंक खाते में एक महीने में 65 लाख रुपये के अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन का उल्लेख किया गया है। उसी की आगे की जांच से पता चला कि इसी तरह के लेनदेन के लिए कई अन्य बैंक खातों का भी उपयोग किया गया था, जो करोड़ों रुपये की राशि थी।

गुवाहाटी में भी रैकेट का भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार

वहीं असम के गुवाहाटी पुलिस ने एक साथ तीन ठिकानों का भंडाफोड़ किया, जहां ‘तीर’ या स्थानीय तीरंदाजी मैचों पर सट्टा लगाया जा रहा था। पुलिस ने मंगलवार को छापेमारी के दौरान 36,364 रुपये नकद, छह मोबाइल फोन और एक डायरी जब्त की, जिसमें सभी दांव के रिकॉर्ड थे और 16 जून को एक अन्य के पास से 24,090 रुपये, पांच मोबाइल फोन और सट्टेबाजी के रिकॉर्ड जब्त किए। यह मेघालय के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है जिसमें 20 या उससे अधिक तीरंदाज 50 मीटर दूर एक स्ट्रॉ बंडल पर जितना संभव हो उतने तीर मारते हैं। लोग आमतौर पर तीरों की संख्या पर दांव लगाते हैं।

GST on gaming: टल सकता है Online Gaming पर टैक्स बढ़ाने का फैसला, 11 जुलाई GST काउंसिल की बैठक

GST on gaming: ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर टैक्स बढ़ने की आशंकाओं के लेकर घबराया हुआ है। असल में जीएसटी परिषद की बैठक में ऑनलाइन गेमिंग को अपने प्रमुख एजेंडे में शामिल करने का ऐलान किया गया था। केन्द्र सरकार गेमिंग सेक्टर पर लगाए गए माल और सेवा कर (Goods and Service Tax (GST) को 18 फीसदी से बढ़ाकर 28 फीसदी करने के पक्ष में हैं। जबकि उद्योग चाहता है कि टैक्स दरों में बदलाव ना हो। माना जा रहा है कि इस बार टैक्स को लेकर कोई फैसला नहीं होगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन गेमिंग को लेकर एक मामला चल रहा है। ऐसे में सरकार टैक्स को लेकर कोई फैसला नहीं करना चाहती है। गौरतलब है कि जीएसटी परिषद की बैठक 11 जुलाई को होनी है।

वर्तमान में, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां प्लेटफॉर्म फीस (सकल गेमिंग राजस्व) पर 18 फीसदी की दर से टैक्स दे रही हैं। जबकि सरकार इसे 28 फीसदी करने के पक्ष में हैं। उद्योग जगत का मानना है कि 28 फीसदी जीएसटी तक संभावित वृद्धि के बाद उद्योग पर भारी प्रभाव पड़ेगा और इसके कारण आने वाली किसी भी पूंजी पर पूर्ण विराम लग जाएगा। उद्योग जगत का मानना है कि अगर 28 फीसदी की दर से शुल्क लगाया जाता है तो ऑनलाइन गेमिंग स्टार्टअप और नए उद्यमों की लागत में इजाफा होगा और इसके कारण कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां अपना कारोबार स्थापित नहीं कर सकेंगी।

28 फीसदी टैक्स की सिफारिश

जीएसटी परिषद ने गेमिंग उद्योग में टैक्स के मुद्दे के लिए मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के नेतृत्व में राज्य मंत्रियों की एक समिति नियुक्त की है। समिति ने ऑनलाइन गेम में जीत सहित कुल मूल्य पर 28 फीसदी की दर से टैक्स लगाने की सिफारिश की है। हालांकि, समिति के भीतर इस बात को लेकर अभी तक आम सहमति नहीं बन सकी है।

2025 तक 25 हजार करोड़ का होगा बाजार

डेलॉयट-एफआईएफएस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय फैंटेसी स्पोर्ट्स उद्योग 33 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है और 2027 तक 50 करोड़ लोग ऑनलाइन गेम से जुड़ेंगे। दावा किया गया है कि वित्त वर्ष 2022 में इंडस्ट्री 31 पर्सेंट बढ़कर 6,800 करोड़ रुपये हो गई और वित्त वर्ष 2027 तक इसके 25,240 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।दावा किया जा रहा है कि अगर टैक्स को बढ़ाया गया तो उद्योग जगत के आंकड़ों मे बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय डिजिटल गेमिंग उद्योग वैश्विक मनोरंजन और गेमिंग बाजार का नेतृत्व कर सकता है। कम से कम पांच प्रमुख भारतीय गेमिंग कंपनियां आईपीओ के लिए प्रयास कर रही हैं।

एफडीआई में असर का दावा

सुपर4 के संस्थापक रोहित बंसल ने एक मीडिया हाउस से बात करते हुए कहा कि जीएसटी परिषद से हमारी उम्मीदें टैक्स को लेकर हैं। क्योंकि ये बड़ा फैसला है और इसके कारण ही ऑनलाइन गेमिंग उद्योग की दिशा तय हो सकेगी। हमारा मानना है कि उद्योग की दीर्घकालिक सफलता के लिए टैक्स को लेकर संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है। वहीं उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, गेमिंग क्षेत्र की वृद्धि उच्च कर दरों से बाधित होगी और इस क्षेत्र में मिलने वाले रोजगार की संख्या कम होगी। इसका सीधा असर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में देखने को मिलेगा।

भारत के Online skill gaming industry के लिए उचित टैक्स का सुझाव, 2027 में 8.6 बिलियन डॉलर होने का अनुमान

भारत की डिजिटल क्रांति ने ऑनलाइन कौशल गेमिंग उद्योग (online skill gaming industry) में तेजी से विकास हो रहा है। हाल ही में लक्ष्मी कुमारन एंड श्रीधरन अटॉर्नी द्वारा हाल ही में जारी ऑनलाइन गेमिंग के लिए जीएसटी पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) की सिफारिशों का विश्लेषण करते हुए एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के गेमिंग बाजार का आकार वित्त वर्ष 22 में $ 2.6 बिलियन होने का अनुमान है और वित्त वर्ष 2027 तक $ 8.6 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

रिपोर्ट में नए कानूनों को लागू करने के लिए प्रारंभिक मंत्री समूह (जीओएम) की रिपोर्ट का पुनर्मूल्यांकन करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट का कहना है कि यह नियम 1950 के दशक में लॉटरी, सट्टेबाजी और जुए पर लगाने जाने वाले नियम हैं और ऑनलाइन गेम पर इस तरह के नियम नहीं लगाए जाने चाहिए। रिपोर्ट का कहना है कि आईटी अधिनियम और नियमों के नियम बनाए जाने की जरूरत है। रिपोर्ट में दक्षिण कोरिया में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की टिप्पणी को संबोधित किया गया है, जहां उन्होंने उल्लेख किया कि जीएसटी परिषद ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स लगाने पर विचार कर रही है, जो कर ढांचा स्थापित होने के बाद अधिक निवेश को आकर्षित कर सकती है।

भारत की डिजिटल क्रांति ने ऑनलाइन कौशल गेमिंग उद्योग (online skill gaming industry) में तेजी से विकास हो रहा है। हाल ही में लक्ष्मी कुमारन एंड श्रीधरन अटॉर्नी द्वारा हाल ही में जारी ऑनलाइन गेमिंग के लिए जीएसटी पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) की सिफारिशों का विश्लेषण करते हुए एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के गेमिंग बाजार का आकार वित्त वर्ष 22 में $ 2.6 बिलियन होने का अनुमान है और वित्त वर्ष 2027 तक $ 8.6 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

रिपोर्ट में नए कानूनों को लागू करने के लिए प्रारंभिक मंत्री समूह (जीओएम) की रिपोर्ट का पुनर्मूल्यांकन करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट का कहना है कि यह नियम 1950 के दशक में लॉटरी, सट्टेबाजी और जुए पर लगाने जाने वाले नियम हैं और ऑनलाइन गेम पर इस तरह के नियम नहीं लगाए जाने चाहिए। रिपोर्ट का कहना है कि आईटी अधिनियम और नियमों के नियम बनाए जाने की जरूरत है। रिपोर्ट में दक्षिण कोरिया में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की टिप्पणी को संबोधित किया गया है, जहां उन्होंने उल्लेख किया कि जीएसटी परिषद ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स लगाने पर विचार कर रही है, जो कर ढांचा स्थापित होने के बाद अधिक निवेश को आकर्षित कर सकती है।

15-20 फीसदी हो टैक्स का दायरा

रिपोर्ट में सकल गेमिंग राजस्व (जीजीआर) के आधार पर अनुमेय ऑनलाइन रियल मनी गेम पर कर लगाकर वैश्विक स्तर पर लगाने का सुझाव दिया गया है। उच्च कर राजस्व उत्पन्न करने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करने के लिए जीजीआर पर 15-20% के बीच कर दरों की सिफारिश की गयी थी। इसमें जीजीआर पर आधारित ऑनलाइन गेम पर कर लगाने का भी प्रस्ताव है, जो वैश्विक प्रथाओं के साथ संरेखित है, जीजीआर पर 15-20% के बीच कर दरों को निर्धारित करने का सुझाव देता है, जिससे उच्च कर राजस्व उत्पन्न होता है।

रिपोर्ट में सकल गेमिंग राजस्व (जीजीआर) के आधार पर अनुमेय ऑनलाइन रियल मनी गेम पर कर लगाकर वैश्विक स्तर पर लगाने का सुझाव दिया गया है। उच्च कर राजस्व उत्पन्न करने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करने के लिए जीजीआर पर 15-20% के बीच कर दरों की सिफारिश की गयी थी। इसमें जीजीआर पर आधारित ऑनलाइन गेम पर कर लगाने का भी प्रस्ताव है, जो वैश्विक प्रथाओं के साथ संरेखित है, जीजीआर पर 15-20% के बीच कर दरों को निर्धारित करने का सुझाव देता है, जिससे उच्च कर राजस्व उत्पन्न होता है।

Musician Jassie Gill कर रहे हैं प्रतिबंधित सट्टेबाजी साइट लोटस 365 का प्रमोशन

गायक, संगीतकार और फिल्म अभिनेता जस्सी गिल (Musician Jassie Gill) ने अब प्रतिबंधित सट्टेबाजी वेबसाइट लोटस 365 का प्रचार करने में जुटे हैं। इससे पहले भी कई फिल्म स्टार और सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर का नाम इस बैन वेबसाइट के प्रमोशन में आ चुका है। जस्सी गिल ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर एक प्रचार वीडियो पोस्ट किया है, जिसके 8 मिलियन से अधिक फॉलोवर हैं।

वीडियो में, लोकप्रिय पंजाबी स्टार ने अवैध सट्टेबाजी वेबसाइट की तुलना लास वेगास और गोवा के कैसिनो से करते हुए देखा जा सकता है। उनका दावा है कि इस प्रतिबंधित वेबसाइट पर खिलाड़ियों को लोटस 365 पर समान अनुभव मिल सकता है। गिल आगे लोटस 365 को बिना किसी सबूत के भारत की 100% विश्वसनीय वेबसाइट बताते हैं और कहते हैं कि लोग कई कैसीनो गेम खेल सकते हैं और मैचों के दौरान अपनी पसंदीदा टीमों पर दांव लगा सकते हैं और लाखों रुपये जीत सकते हैं।

Lotus365 दे रही है भारत में सट्टेबाजी को बढ़ावा

अन्य सभी प्रतिबंधित/अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों के बीच लोटस 365 भारतीय बाजार में अपनी सट्टेबाजी सेवाओं को सबसे अधिक बढ़ावा दे रही है। कंपनी ने अपने अवैध और प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने के लिए कई मशहूर हस्तियों और प्रभावशाली लोगों को प्रमोशन में उतारा है।

Lotus365 सेलिब्रिटी का कर रहा इस्तेमाल

भारत में जुआ अवैध है और पिछले दिनों ही अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी और उर्वशी रौतेला को सट्टेबाजी को बढ़ावा देने के लिए नोटिस दिया जा चुका है। उन्हें केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) से नोटिस मिला था, जिसमें लोटस 365 को कानूनी करार देने के लिए स्पष्टीकरण मांगा गया था। अभिनेता सुनील शेट्टी ने भी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म को “सभी गेमिंग ऐप्स का मसीहा” कहा है और अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कई बार प्लेटफॉर्म का प्रचार किया है। कई अन्य स्थानीय हस्तियों ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मोटी रकम के लिए इस नाजायज प्लेटफॉर्म का प्रचार किया है।

क्या कहते हैं नियम

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अनुसार, इन हस्तियों पर झूठे और भ्रामक विज्ञापन के लिए 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और एक साल के लिए विज्ञापनों में दिखाई देने से रोक दिया जा सकता है।

अरबों का है ऑनलाइन गेमिंग मार्केट, नियम नहीं, गेम खेलने में यूपी सबसे आगे, न्यू जनरेशन पर पड़ रहा है अ

Special Report

देश में ऑनलाइन जुआ और ऑनलाइन गेमिंग के बीच कोई स्पष्ट कानूनी अंतर नहीं है। अधिकांश ऑनलाइन गेमिंग पोर्टल, जिसमें सट्टेबाजी या जुआ शामिल है ये बच्चों को लुभाने के लिए अपने ऐप्स को ‘कौशल के खेल’ के रूप में बाजार में लेकर आ रहे हैं। अभी तक केन्द्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग को लेकर सख्त नियम तक नहीं बना सकी है। जबकि पिछले दिनों ऑनलाइन गेमिंग के जरिए धर्मांतरण का मामला महाराष्ट्र और यूपी में आ चुका है।

देश में ऑनलाइन गेमिंग बाजार वित्त वर्ष 2023-24 में $ 3 बिलियन तक पहुंचने के लिए तैयार है। 2016 में, यह $ 543 मिलियन के करीब था। रिपोर्ट के मुताबिक 2027 तक यह चार गुना बढ़कर 8.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। अरबों रुपये का बाजार होने के बावजूद ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने के लिए न तो कोई ठोस नियम हैं और न ही कोई नियामक। जिसके कारण ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां अपने हिसाब से काम कर रही है और युवा पीढ़ी को अपना निशाना बना रही हैं।

भारत में 500 मिलियन गेम प्लेयर

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ऑनलाइन गेम खिलाड़ियों की संख्या साल 2022 में 507 मिलियन के करीब पहुंच गई है। इसके साथ ही भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मोबाइल गेम प्लेयर्स वाला देश बन गया। 2021 में यह संख्या 45 करोड़ थी। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 तक यह संख्या 70 करोड़ तक पहुंच जाएगी। यानि हर दूसरा आदमी ऑनलाइन गेमिंग में हिस्सा लेगा।

नहीं मिलता है इनाम

रिपोर्ट के मुताबिक जांच में पाया गया है कि कई गेमिंग पोर्टल्स ने जानबूझकर भुगतान तंत्र को गड़बड़ किया है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि पहली बार प्राइज मनी दी और उसके बाद खिलाड़ियों को या तो ब्लॉक कर दिया जाता है। या ऐप पर भुगतान समस्याएं दिखाकर भुगतान नहीं किया गया।

गेम खेलने में यूपी के युवा सबसे आगे

इंडिया मोबाइल गेमिंग रिपोर्ट 2022 के मुताबिक, यूपी के लोग सबसे ज्यादा ऑनलाइन गेम खेलने के मामले में सबसे आगे हैं। इसके बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल का स्थान है।

बच्चों पर पड़ रहा है असर

रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन गेम्स का बच्चों के व्यवहार पर काफी असर पड़ रहा है। खासकर हिंसक प्रवृत्ति वाले खेल मस्तिष्क को अधिक प्रभावित कर रहे हैं। पिछले दिनों ही महाराष्ट्र में ऑनलाइन गेमिंग के जरिए हिंदू बच्चों को मुस्लिम बनाने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर पुलिस जांच कर रही है। वहीं अभी तक कई तरह के फ्राड सामने आए हैं। लेकिन नियम ना होने के कारण ये कंपनियां आसानी से कानून के शिंकजे से बाहर आ जाती हैं।

केन्द्र सरकार पर लटका है मामला

ऑनलाइन गेमिंग की श्रेणी में किन खेलों को शामिल किया जाना चाहिए, इसे परिभाषित करने का मामला अभी भी लंबित है। अभी उन्हें ‘कौशल के खेल’ और ‘अपनी किस्मत आजमाने वाले खेल’ की श्रेणी में रखा जा रहा है। इसी के आधार पर जीएसटी लगाने की बात कही गई थी। वर्तमान में ‘गेम ऑफ चांस’ पर 28 प्रतिशत और ‘कौशल के खेल’ पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है।

कई राज्य बैन लगाने के पक्ष में

देश में ऑनलाइन जुआ और ऑनलाइन गेमिंग के बीच कोई स्पष्ट कानूनी अंतर नहीं है। अधिकांश ऑनलाइन गेमिंग पोर्टल, जिसमें सट्टेबाजी या जुआ शामिल है, अपने ऐप्स या उत्पादों को ‘कौशल के खेल’ के रूप में वर्णित करते हैं। ज्यादातर राज्य सरकारें ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं। तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि इन ऑनलाइन सट्टेबाजी पर बैन लगाया जाना चाहिए। लेकिन कई राज्य ऑनलाइन गेम में बैन के खिलाफ हैं। क्योंकि सरकारों को इसमें मोटा राजस्व मिल सकता है।

इन ऑनलाइन गेमों पर है विवाद

रम्मी, तीन पत्ती,फ्री फायर

ऑनलाइन गेमिंग में महिलाओं को झेलनी पड़ती है हिंसा, यौन शोषण का शिकार बनती हैं Female Gamers

Special Report..

पिछले दिनों ही उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन गेमिंग एप्प के जरिए धर्मांतरण का मामला सामने आया था। जिसमें कुछ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हालांकि ये पहला मामला नहीं हैं बल्कि इस तरह के मामले आम हैं। जिसको लेकर लोग पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते हैं। भारत में ऑनलाइन गेमिंग में फ्राड होना कोई नया नहीं है। लेकिन अगर गेमिंग की बात करें तो ये महिलाओं के लिए सेफ नहीं हैं और इसमें महिलाओं को कई तरह के शोषण का शिकार होना पड़ता है।

मौजूदा दौर में हम इस सोच को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहे हैं कि वीडियो गेम सिर्फ लड़के ही खेलते हैं। आज ऑनलाइन गेम खेलने में लड़कियां भी पीछे नहीं हैं, लेकिन ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया एक ऐसी जगह है जहां पुरुषों का दबदबा है। गेमिंग की दुनिया में, पुरुषों को महिलाओं की तुलना में अधिक स्थान मिलता है और उनका प्रतिनिधित्व किया जाता है। इसके बावजूद लड़कियां गेमिंग की दुनिया में अपना क्लब बना रही हैं। महिला गेमर्स की संख्या बड़ी संख्या में बढ़ रही है। ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया भी एक ऐसी जगह बनी हुई है जहां महिलाओं को अपनी लिंग पहचान के कारण पुरुषों से उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उनके साथ अश्लील व्यवहार किया जाता है और उनका यौन उत्पीड़न किया जाता है।

भारत में लगातार बढ़ रहा है बाजार

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 507 मिलियन गेमर्स हैं। वर्ष 2021-22 में हर महीने 20 लाख नए खिलाड़ी जुड़े हैं। वैश्विक स्तर पर, पिछले साल भारत में 17 प्रतिशत गेम डाउनलोड दर्ज किए गए थे। इस रिपोर्ट में पुरुष और महिला गेमर्स का अनुपात 60:40 दर्ज किया गया है। ऑनलाइन गेमिंग के दौरान, महिला गेमर्स को उत्पीड़न से बचने के लिए अपनी पहचान छिपाने के लिए मजबूर किया जाता है। वे चुपचाप चुप रहकर गेम खेलते हैं। यह सब दिखाता है कि वीडियो गेम के उद्योग और संस्कृति के लिए महिला गेमर्स के लिए अभी तक एक खुला वातावरण नहीं है।

महिला गेमर्स की बढ़ती संख्या

भारत में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही है। भारत में गेमिंग की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2022 में भारत में गेमिंग बाजार 2.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जो 2027 तक 8.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस रिपोर्ट में पुरुष और महिला गेमर्स का अनुपात 60:40 दर्ज किया गया है। औसतन भारतीय गेमर्स हर हफ्ते 8.5 से 11 घंटे गेमिंग में बिताते हैं। भारत में 507 मिलियन गेमर्स में से 43% महिलाएं हैं।

कम उम्र के बच्चे कर रहे हैं गेमिंग एप्प का इस्तेमाल

भारत की 1.4 अरब आबादी में से 27.3 फीसदी की उम्र 15 से 29 साल के बीच है। वहीं कोरोना लॉकडाउन के दौरान ई-स्पोर्ट्स तेजी से पापुलर हुआ और एक रिपोर्ट के मुताबिक महिला खिलाड़ियों की संख्या 2020 में 12 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 22 प्रतिशत हो गई है। लेकिन भारत में महिला खिलाड़ी को अपने लैंगिक पहचान को छिपाना पड़ता है। क्योंकि वर्चुअल गेम्स में उसे हिंसा, अपमान और शोषण का शिकार होना पड़ता है।

ऑनलाइन गेम्स में रूचि रखने वाली रूचिका का कहना है कि ऑनलाइन गेम उनके साथ गलत तरीके से व्यवहार किया जाता है। आपस में गंदी गालियों का इस्तेमाल किया जाता है और लड़की खिलाड़ी को बहुत ज्यादा डिमोटिवेट किया जाता है। ऑनलाइन गेम्स की वजह से काफी लोग मेरे सोशल मीडिया में जुड़ने लगे।

लड़कियों के ऑनलाइन गेमिंग सुरक्षित नहीं

जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन गेम लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं है। हालांकि वह अपनी पहचान अगर छिपाकर रखती हैं तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती है। कभी-कभी ऑनलाइन स्टॉकिंग होती है, इसलिए ये सभी चीजें बहुत आम हैं। एक ऑनलाइन गेम प्लेयर रूबिना कहती हैं कि खेलते समय मुझे अक्सर बहुत बुरे व्यवहार का सामना करना पड़ा है। ऑनलाइन गेम खेलते हुए मेरी कई लोगों से दोस्ती भी हो गई, लेकिन जल्द ही वे बहुत ही असहज माहौल बना देते थे। कुछ लोग तो अश्लील तस्वीरें भेजते थे और उन्हें अनदेखा करने पर कई बार धमकी देते थे।

Casino Advertisement Case: गोवा हाईकोर्ट ने सरकार को casino operators की अपील पर ध्यान देने का दिया आदेश

Casino Advertisement Case: गोवा में कैसिनो ऑपरेटरों ने हाल ही में पणजी शहर निगम (सीसीपी) के विज्ञापन होर्डिंग हटाने के आदेश को चुनौती दी थी। और उसी के नवीनतम घटनाक्रम में गोवा में बॉम्बे के उच्च न्यायालय ने केंद्र शासित प्रदेश की सरकार को इन याचिकाओं पर प्रभावी ढंग से निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

बताते दें कि शुक्रवार 16 जून को, जब 2007 से एक स्वत: संज्ञान रिट मामले की सुनवाई की जा रही थी, तो अदालत ने बेतिम में मंडोवी नदी के किनारे लगाए गए होर्डिंग की स्थिति के बारे में जवाब देने के लिए गोवा तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण को एक पक्ष को जानना चाहा। सीसीपी ने अपने बयान में दावा किया कि कैसिनो संचालकों ने 61 नोटिस मिलने के बाद होर्डिंग हटाने के सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने सरकार से जल्द से जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया था।

बतातें कि द गोवायन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार चूंकि होर्डिंग नियमों का उल्लंघन करते हैं, इसलिए महाधिवक्ता देवीदास पंगम ने जोर देकर कहा कि इसके बारे में निर्णय तेजी से लिया जाए। उच्च न्यायालय ने पिछली सुनवाई के दौरान नगरपालिकाओं से अवैध होर्डिंग और उन्हें हटाने के लिए किए गए उपायों के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए कहा था। मापुसा नगर पालिका ने कुछ अन्य लोगों के साथ जानकारी प्रदान करने के लिए और समय का अनुरोध किया था और इस पर अदालत सहमत हो गई।

15 सदस्यीय समिति का कार्यकाल बढ़ाया

इस मामले में अदालत ने 15 सदस्यीय समिति को केंद्र शासित प्रदेश के आसपास होर्डिंग पर नजर रखने के साथ-साथ लाइसेंस प्रदान करने के तरीके को नियंत्रित करने और तय करने के लिए नीतियां विकसित करने के लिए तीन महीने का विस्तार भी दिया था। समूह सरकार द्वारा स्थापित किया गया था। बताते दें कि गोवा में जी20 शिखर सम्मेलन बैठक के दौरान कैसीनो विज्ञापन होर्डिंग्स को कवर किया गया था और कैसीनो विज्ञापन होर्डिंग को कपड़ों से ढक दिए गये थे। इस मामले में कई राजनेताओं के बीच विवाद भी हुआ और गोवा प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष जोएल एंड्राडे ने पूछा कि सरकार ने विज्ञापनों को कवर क्यों किया है।

Banned betting site again advertising: क्या मंत्रालयों में मतभेद काफायदा उठा रही हैं जुआ कंपनियां

Banned betting site again advertising: मोदी सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय और इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की आपसी तकरार के कारण भारत में अवैध ऑनलाइन जुआ खिलाने वाली कंपनियों के विज्ञापन अभी भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। हालत ये है कि किसी भी बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट से पहले विदेशों से ऑपरेट कर रही कंपनियां लगभग सभी प्रमुख वेबसाइट्स पर नज़र आने लगती हैं।
सूचना प्रसारण मंत्रालय कई बार चेतावनी जारी कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद भी बहुत सारे संस्थान अभी भी जुआ खेलने वाली वेबसाइट्स को प्रमोट कर पैसा कमा रहे हैं। हालांकि अब जुआ खिलाने वाली विदेशी वेबसाइट्स गुगल के जरिए इन विज्ञापनों को प्रमोट कर रही हैं। दरअसल जुआ खिला रही वेबसाइट्स की पहुंच इतनी ज्य़ादा है कि उनके लिंक अगर बंद भी होते हैं तो तुरंत खुल भी जाते हैं या वो फिर किसी दूसरे नाम से तुरंत चालू भी हो जाते हैं।
गेमिंग के मामलों में मोदी सरकार ने इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाया है। इसी मंत्रालय के पास ये अधिकार भी है कि वो इन साइट्स के यूआरएल को बैन भी कर सकता है। लेकिन 1XBet, Fairplay, Dafa, Mahadevbooks और Anna books जैसी साइट्स के खिलाफ कोई ठोस एक्शन नहीं ले पा रही है। दूसरी ओर अनुराग ठाकुर का मंत्रालय इन विज्ञापनों को लेकर लगातार चेतावनी जारी कर रहा है।
विदेशी से अवैध जुए का कारोबार चलाने वाले ये भी जानते हैं कि सूचना प्रसारण मंत्रालय की बात खुद इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी नहीं सुन रहा है। हाल ही में इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने अपने मंत्रालय में बैटिंग साइट्स से जुड़े एक बड़े लाइजनर निकोलस के साथ भी मुलाकात की थी। परीमैच कंपनी के पूर्व डायरेक्टर  निकोलस थॉम्सुक (Nicholas Tymoshchuk) ने मंत्रालय में ही निकोलस से मुलाकात की थी, हालांकि अब निकोलस साइप्रस की एक गेमिंग फंड एनरगेम (Cyprus based gaming focused investment fund Energame) में कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर हैं। लेकिन यूक्रेन से संबंध रखने वाले निकोलस लंबे समय से दुनिया की प्रमुख जुआ कंपनियों से जुड़े रहे हैं। हालांकि हाल में खुद राजीव चंद्रशेखर ने कहा था कि वो जुआ खिलाने वाली कंपनियों को बैन करेंगे, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है।
देश में वैध तरीके से रियल मनी गेमिंग साइट्स चलाने वाली बहुत सारी कंपनियां पहले भी इन अवैध जुआ खिलाने वाली साइट्स को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को पत्र लिख चुकी है।