Friday, March 13, 2026
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Betting on U-19 world cup Cricket: सट्टा बाज़ार में भारतीय टीम के जीतने पर लग रहे हैं दांव

Betting on U-19 world cup Cricket: भारत में क्रिकेट पर बैटिंग और सट्टा लगाना बेशक गैर कानूनी हो, लेकिन ऑनलाइन आप जितना मर्जी सट्टा यहां खेल सकते हैं। भारत और आस्ट्रेलिया के बीच हो रहे अंडर-19 विश्व कप पर जोरदार सट्टा लगाया जा रहा है। देश में चल रही सैकड़ों ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट और एप पर सट्टा लगाया जा रहा है। इसमें बहुत सारे एप तो टेलीग्राम के माध्यम से चल रहे हैं।

अपनी स्पोर्ट्स बैटिंग के लिए कुख्यात Parimatch ने भी भारत और आस्ट्रेलिया के बीच अंडर-19 विश्व कप फाइनल के लिए बैटिंग लगाने के लिए लाइनें खोली हुई हैं। जहां भारतीय टीम को इसमें बेहतर भाव दिया गया है। जहां भारत की टीम पर 1.49 का भाव दिया जा रहा है। वहीं Parimatch ने आस्ट्रेलियाई टीम के लिए 2.42 का भाव तय किया है। भारत में इस साइट और एप को अवैध तरीके से चलाने और इसका पैसा जमा करने वालों की लंबी फेहरिस्त है और यह सब तब हो रहा है, जबकि भारत में क्रिकेट पर सट्टा लगाना बैन है।

इसी तरह Betfair की SATsprots पर भी टेलीग्राम और व्हाट्सअप के जरिए लोगों को जुआ खिलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस साइट पर भी भारतीय टीम के जीतने की संभावना ज्य़ादा जताई जा रही है। इस वेबसाइट पर भारतीय टीम को जीतने पर 1.5 का भाव दिया जा रहा है। जबकि आस्ट्रेलियाई टीम पर 2.49 का भाव दिया जा रहा है, हालांकि इसमें लगातार बदलाव भी हो रहा है। भारत के गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडू और आंध्रप्रदेश में भारी मात्रा में क्रिकेट पर सट्टा लगता है। पहले जहां फिजिकल तौर पर सट्टा लगाया जाता था, वहीं अब ऑनलाइन सट्टा लगाया जा रहा है। इसे रोकने में एजेंसिया नाकायाब रही है।

The Kerala story की अभिनेत्री के घर में चल रहा था जुआ, किराएदार खिला रहा था जुआ

The Kerala story की अभिनेत्री सोनिया बलानी (Sonia Balani) के पिता रमेश बलानी के घर में किराएदार अवैध जुआ चला रहा था। जिसपर छापे के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। सोनिया बलानी के पिता ने खुद बताया कि आलोक नगर में उनके परिवार के परिवार के घर को संजीव उर्फ ​​सुशील रावत नामक किरायेदार को दिया हुआ था। लेकिन सुशील रावत इस घर का इस्तेमाल जुआ गतिविधियों (Betting activites) के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर 11 जुआरियों को हिरासत में लिया और उनके पास से वाहन, मोबाइल फोन और जुए का सामान समेत एक लाख से अधिक नकदी जब्त की, हालांकि, संजीव उर्फ ​​सुशील रावत फरार है, पुलिस उसके बारे में पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

हिंदी अखबार दैनिक जागरण ने बताया कि पुलिस को आलोक नगर के एक घर में जुआ चलने की सूचना मिली और उसने गहन तलाशी ली। यह मकान रमेश बलानी के नाम पर है। जोकि कपड़ा व्यवसाय में हैं और अपने परिवार के साथ वहां रहते हैं। अभिनेत्री सोनिया मुंबई में रहती हैं। जांच करने पर पता चला कि मकान संजीव उर्फ सुशील रावत को किराए पर दिया गया था। पुलिस को इस मकान में लगातार जुआ खेले जाने के सबूत मिले थे। सोमवार को जब पुलिस ने इस मकान पर छापा मारा तो तो उन्हें काफी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस मकान के अंदर घुसी और उन्होंने जुआरियों को गिरफ्तार कर लिया।

असिस्टेंट कमिश्नर मयंक तिवारी ने बताया कि जुआरियों में से एक ने खुद को घर का नौकर बताने की कोशिश की। आगे की पूछताछ से पता चला कि पकड़े गए कई व्यक्तियों की जुआ खेलते हुए पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों में अमित अग्रवाल, मेहरान, मनीष, अल्पित, अमित सिंह, बाबू उर्फ श्रीभगवान, पंकज, हरिओम वर्मा, ललितेश, दीपू और शाहरुख शामिल हैं। पूर्व जिम ट्रेनर और बॉडीबिल्डर शाहरुख पहले भी सिकंदरा इलाके में जुआ खेलते पकड़ा गया था. गिरफ्तार किए गए जुआरियों में से कई पुराने शहर में सराफा कारोबार में कार्यरत थे और सोमवार को जब दुकान बंद रहती थी तो वे अक्सर जुआ खेलने आते थे। रविवार को शहर के कई थानों ने जुआरियों और सटोरियों को बुलाकर जुआ और सट्टा न लगाने की शपथ दिलाई। पुलिस का लक्ष्य उन्हें सुधरने का अवसर प्रदान करना है। शपथ लेने के 24 घंटे के अंदर एक ही घर में 11 लोग जुआ खेलते पकड़े गए, जबकि इनमें से किसी ने भी शपथ नहीं ली थी।

महादेव एप के पैनल वाले Paytm के फर्जी खातों का करते थे इस्तेमाल?

ऑनलाइन पेमेंट बैंक पेटीएम (Online payment Bank Paytm) 8 लाख फर्जी अकाउंट्स पाए जाने पर इसका महादेव एप (Mahadev App) से जुड़े होने का अंदेशा जताया जा रहा है। अवैध सट्टेबाजी लेनदेन (illegal betting transactions) में शामिल होने के संदेह के बीच वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) पेटीएम के भारतीय भुगतान गेटवे की जांच कर सकती है। आरोप हैं कि महादेव सट्टेबाजी ऐप से जुड़े लगभग आठ लाख फर्जी यूपीआई खाते पेटीएम और अन्य भुगतान गेटवे से जुड़े थे, जिससे सट्टेबाजी लेनदेन के माध्यम से कई सौ करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की सुविधा मिली। पेटीएम पर केवाईसी प्रक्रियाओं में संभावित खामियों और उसके बाद संदिग्ध खातों को फ्रीज करने के लिए जांच की जा रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 31 जनवरी को पेटीएम पेमेंट्स बैंक को आदेश दिया था कि अगर वो निर्देशों का पालन नहीं करता है तो 29 फरवरी से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) सहित विभिन्न प्लेटफार्मों और डिजिटल माध्यमों के माध्यम से सभी बेसिक भुगतान सेवाओं को बंद कर दिया जाएगा। आशंका जताई जा रही है कि आरबीआई के औपचारिक अनुरोध के बाद, एफआईयू इस महत्वपूर्ण सट्टेबाजी लेनदेन मामले की जांच शुरू करेगा।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 5,500 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में सट्टेबाजी ऐप महादेव ऑनलाइन बुक की जांच कर रहा है, ईडी ने पाया है कि पेटीएम उन भुगतान गेटवे में से एक था, जिसका इस्तेमाल आरोपी ग्राहकों के साथ लेनदेन करने के लिए करते थे, यूपीआई के माध्यम से जुआ खेलने के लिए पैसे का लेन देन करता था।

ईडी ने पाया कि जुआ खिलाने वाले पैनल ऑपरेटरों ने एक फर्जी यूपीआई भुगतान गेटवे के जरिए किया और उसी पेटीएम और अन्य यूपीआई भुगतान गेटवे के जरिए से जीत को ट्रांसफर भी किया। सट्टेबाजी संचालन में उपयोग किए जाने वाले पेटीएम यूपीआई और अन्य लिंक किए गए लेनदेन गेटवे से जुड़े बैंक खाते बेनामी और फर्जी खाते थे।
इन बैंक खातों को खोलने के लिए केवाईसी वाले गरीब व्यक्तियों का उपयोग किया गया था, ताकि दांव स्वीकार करने और हवाला संचालन दोनों को सुविधाजनक बनाया जा सके, जो कई बैंक खातों से जुड़े हुए थे। यूपीआई पैनल ऑपरेटरों ने धन की हेराफेरी की। जांच में पाया गया कि फर्जी केवाईसी वाले आठ लाख से अधिक ऐसे फर्जी खातों का इस्तेमाल पैनल ऑपरेटरों द्वारा किया गया था। ईडी की जांच में पता चला कि चंद्राकर की हर महीने 450 करोड़ रुपये की मासिक कमाई थी, हर महीने प्रति पैनल की औसत कमाई 30 लाख रुपये थी। आज की तारीख में महादेव बुक, रेड्डी अन्ना और फेयरप्ले के कम से कम 2,000 पैनल कार्यरत हैं।

आरोप पत्र में कहा गया है कि पैनल संचालक आरोपी हनी सिंह ने सट्टेबाजी से संबंधित धनराशि जमा/निकासी के लिए चंद्राकर को अपना पेटीएम खाता प्रदान किया था। जब भी कोई खिलाड़ी जीतता था, तो चंद्राकर एक अन्य आरोपी सुभम सोनी के माध्यम से इस बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर कर देता था। इसके विपरीत, जब कोई खिलाड़ी हार जाता था, तो हनी सिंह के पेटीएम खाते में जमा राशि सुभम सोनी द्वारा प्रदान किए गए बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाती थी। इस अकाउंट का इस्तेमाल चंद्राकर ने अगस्त 2021 तक किया था.

Gaming industry को सरकार के साथ की जरुरत- EGF

Gaming industry में किसी regulator के लिए अब आवाज़ उठने लगी है, ई-गेमिंग फेडरेशन (E-Gaming Federation)ने कहा है कि गेमर्स के प्रोटेक्शन (Protection of gamers) के लिए सरकार को किसी तरह की कोई एजेंसी बनानी चाहिए, जोकि प्लेयर्स या इस सेक्टर पर लोगों के अधिकारों की रक्षा करे। ख़ास बात यह है कि देश में सिर्फ रियल मनी गेमिंग सेक्टर ही लगभग 20 हज़ार करोड़ रुपये का है, लेकिन यहां प्लेयर्स के प्रोटेकेशन के लिए कोई एजेंसी नहीं है।

इस सवाल को उठाते हुए ई गेमिंग फेडरेशन की डायरेक्टर देहुती बक्शी (Dehuti Bakshi, Director of E Gaming Federation) ने कहा कि अगर आप कोई चिप्स का पैकेट भी खरीदते हो तो आपको पता है कि यह सेफ है, इसपर FSSAI का सर्टिफिकेशन है, जोकि इसके अंदर के प्रोडक्ट की क्वालिटी (Product quality) को लेकर आप आश्वस्त होते हैं। लेकिन क्या गेमिंग पर FSSAI जैसा कुछ सर्टिफिकेशन है। इसका जवाब नहीं है, सरकार के पास कोई ऐसा अधिकारी गेमिंग सेक्टर के लिए नहीं जो लोगों की समस्याओं का समाधान निकाले। हमारे पास तो कोई कंट्रोलिंग एजेंसी भी नहीं है। जोकि प्लेयर्स के लेकर अन्य गेमिंग सेक्टर को प्रोटेक्ट करे।

बक्शी ने कहा कि सरकार को कोई एजेंसी बनानी चाहिए, ताकि प्लेयर को पता हो कि अगर किसी तरह का फ्राड हुआ है या फिर चिटिंग हुई है तो उस प्लेयर को किसी एजेंसी के पास जाना है। सरकार का इस सेक्टर को लेकर सर्मथन नहीं है। सेक्टर को सरकार की जरुरत है, किसी सरकारी एजेंसी की जरुरत है। दरअसल गेमिंग सेक्टर को लेकर सरकार लंबे समय से चुप्पी साधे हुई है। दुनियाभर की कंपनियां भारतीय गेमिंग इंडस्ट्री में निवेश कर रही हैं, लेकिन किसी पॉलिसी के अभाव में इस सेक्टर के बारे में कुछ साफ नहीं हो पाया है।

Mahadev books के आरोपियों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की मांग

Mahadev books को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा हंगामा चल रहा है, बजट सत्र में लगातार महादेव सट्टेबाजी ऐप मामला गूंज रहा है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक रिकेश सेन और राजेश मूणत ने महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की कमी पर चिंता जताई है।

वैशाली नगर के विधायक रिकेश सेन ने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि जो भिलाई कभी खेल और शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाता था, वह अब महादेव सट्टेबाजी ऐप के रूप में कुख्यात है। उन्होंने इस घोटाले में अपने निर्वाचन क्षेत्र के 20,000 से अधिक युवाओं की संलिप्तता पर सवाल उठाया और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को कथित संरक्षण दिए जाने पर प्रकाश डाला, जो खुद महादेव सट्टेबाजी ऐप के संचालक थे।

महादेव एप की देखादेखी पिछले पांच वर्षों में दुर्ग जिले में इस तरह की जुए वाली गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों का प्रवेश लगातार हो रहा है। भले ही राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों सहित इन व्यक्तियों के पास महादेव आईडी हैं, लगभग 90 छोटे खिलाड़ियों के खिलाफ केवल नाममात्र की कार्रवाई की गई है। रिकेश सेन ने आगे बताया कि इस घोटाले के राष्ट्रीय सुर्खियां बनने के बावजूद, सट्टेबाजी ऐप के आरोपी प्रतिभागियों के खिलाफ कोई महत्वपूर्ण कार्रवाई नहीं की गई है, यहां तक कि इसके संचालक की शादी में शामिल होने वालों के खिलाफ भी कोई महत्वपूर्ण कार्रवाई नहीं की गई है।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदस्यों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है और जांच पूरी होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी.

एक अन्य विधायक धर्मजीत सिंह ने कड़ी कार्रवाई का आह्वान किया और आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उन्होंने जांच में धीमी प्रगति की आलोचना की और मुख्यमंत्री से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ से मार्गदर्शन लेने का आग्रह किया।

विधायक राजेश मूणत ने महादेव सट्टेबाजी ऐप से संबंधित शिकायतों की संख्या और प्रकृति पर विवरण मांगा और जांच की प्रगति पर सवाल उठाया। उन्होंने संपूर्ण, निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संभवतः केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक समिति की भागीदारी का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय लोग शामिल हैं, जिससे यह बेहद संवेदनशील मामला बन गया है। इससे जुड़े ऑपरेशन दुबई से संचालित किए जा रहे हैं।

जवाब में गृह मंत्री विजय शर्मा ने खुलासा किया कि सट्टेबाजी ऐप को लेकर 28 शिकायतें मिली हैं, जिनमें 90 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच जारी है, जिसमें 400 से अधिक लोग शामिल हैं और एक बार पूरी होने पर सभी गलत काम करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाले पर छत्तीसगढ़ की विधानसभा में चर्चा जारी है और विधायक दोषियों को न्याय के दायरे में लाने के लिए पारदर्शी और व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं।

Mahadev betting app पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य अधिकारियों पर उठे सवाल?

Mahadev betting app को लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा के विधायक और पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने सवाल उठाया है कि राज्य के अधिकारी किसको बचाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल पिछले भूपेश बघेल सरकार में महादेव एप पर राज्य सरकार की विशेष कृपा थी, इसकी वजह से अभी भी राज्य अधिकारियों की मशीनरी इसपर सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है। इसको लेकर मूणत ने सवाल खड़े किए हैंं, इसके जवाब में राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज राज्य विधानसभा में महादेव ऐप को लेकर सदन में कहा कि इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा, इसमें शामिल पाए गए किसी भी व्यक्ति को परिणाम भुगतना होगा। शर्मा ने खुलासा किया कि मामले में शामिल लोगों की संपत्ति के बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है, जिसमें चार्टर विमानों के माध्यम से दुबई की यात्रा करने वाले व्यक्तियों की सूची भी शामिल है।

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने महादेव ऐप का मुद्दा उठाया। डिप्टी सीएम शर्मा ने खुलासा किया कि महादेव ऐप मामले में 2022 से अब तक कुल 90 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इनमें रायपुर में 36, दुर्ग में 23, सरगुजा में 4 और बिलासपुर और जांजगीर में 2-2 शामिल हैं, शर्मा ने आगे बताया कि 507 बैंक खातों से 221 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की पहचान भी हो चुकी है और 116 लाख रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं।

डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि जो लोग भारत से भाग गए हैं उनकी संपत्ति की पहचान कर उनका पता लगाने की कोशिश चल रही है। नागपुर से चार्टर विमानों के जरिए दुबई की यात्रा करने वाले व्यक्तियों की पहचान करने की कोशिश भी जारी है और एक लिस्ट तैयार की जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

शर्मा ने यह भी बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले की जांच कर रही है, जो अपने अंतिम चरण में है।
अब तक, ईडी द्वारा राज्य सरकार के साथ कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, जिसकी पुष्टि गृह मंत्री शर्मा ने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को 5 फरवरी तक ईडी से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। मूणत ने अधिकारियों पर सरकार को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईडी ने 3 जनवरी को राज्य सरकार को एक पत्र भेजा था, जिसके बाद 30 जनवरी को एक रिमांडर भेजा गया था। उन्होंने सवाल किया कि किसके हितों की रक्षा अधिकारी कर रहे है और क्यों। मूणत ने गिरफ्तार एएसआई चंद्र भूषण वर्मा के बयानों का भी हवाला दिया।

जवाब में, गृह मंत्री शर्मा ने दोहराया कि ईडी द्वारा राज्य सरकार के साथ कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी को बचाने का प्रयास नहीं कर रही है और इसमें शामिल पाए गए किसी भी व्यक्ति से निर्णायक रूप से निपटा जाएगा। पिछले पांच वर्षों में दुर्ग में तैनात पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग करते हुए, दुर्ग के वैशाली नगर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रितेश सेन ने महादेव ऐप ऑपरेटरों से हर महीने बड़ी रकम प्राप्त करने में पुलिस अधिकारियों की कथित संलिप्तता की जांच करने का आह्वान किया।

Parimatch जुआ खिलाने के लिए कर रहा है क्रिकेटर्स का इस्तेमाल

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Illegal Gambling कराने वाले Parimatch App आम लोगों को जुआ खेलने के लिए लुभाने के लिए क्रिकेट की हस्तियों का इस्तेमाल (Use of cricket celebrities to entice people to gamble) कर रहा है। भारतीय क्रिकेटरों के साथ साथ अब यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों (Along with Indian cricketers, now also international cricketers) के जरिए भारत में अपना खेल चला रहा है। भारत में अब यह एप वेस्टइंडीज के क्रिकेटर निकोलस पूरन (West Indies cricketer Nicholas Pooran) को चेहरा बना रहा है।

क्रिकेट में बैटिंग और सट्टा लगाने वाली Parimatch के साथ निकोलस पूरन के जुड़ने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल इन दिनों अवैध बैटिंग एप के साथ जुड़ने वाले लोगों से प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ की वजह से बहुत सारे भारतीय क्रिकेटर इन एप्स के साथ जुड़ना नहीं चाह रहे हैं, इसी वजह से यह एप विदेशी क्रिकेट खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ रहे हैं, इनका निशाना ऐसे क्रिकेटर हैं, जोकि भारत में आईपीएल में भी खेलते हों। लिहाजा निकोलस पूरन को अब इस अवैध जुआ एप ने अपने साथ जोड़ा है और पूरन के चेहरे को दिखाकर लोगों को जुआ खेलने के प्रेरित कर रहा है।

सरकार लगातार परिमैच के डोमेन ब्लॉक कर रही है, लेकिन वेबसाइट इन नियमों से बचने के तरीके ढूंढकर अपने अवैध कारोबार चला रहा है। कभी-कभी अपना वेब पता बार-बार बदलती रहती है, ताकि लोग इस वेबसाइट और एप पर जुआ खेल सकें। पूरन के जरिए यह अवैध एप लोगों को ज्य़ादा खेलने के लिए लुभा रहा है।

दरअसल अपने को अवैध जुआ कंपनी के नाम से बचाने के लिए परिमैच इंडिया ने अपना खुद का स्पोर्ट्सवियर ब्रांड, परिमैच स्पोर्ट्स लॉन्च करके सरोगेट मार्केटिंग शुरु की है, जिसको लेकर बहुत बार देश में चर्चा हो चुकी है, बहुत सारी शराब कंपनियां भी इस तरह की सरोगेट मार्केटिंग करती रही हैं। इस मार्केटिंग के नाम पर जुए के पैसे को भारत में वैध काम कर रही कंपनियों के लिए पेमेंट कराने का काम किया जाता है। ताकि एजेंसियों की कार्रवाई से बचा जा सके।

इस अवैध जुआ कंपनी ने पहले अपने प्रचार के लिए भारतीय क्रिकेटर शिवम दुबे और दिनेश कार्तिक को भी अपने साथ जोड़ा है। सरकार द्वारा जारी चेतावनियों और सलाह के बावजूद भी मीडिया आउटलेट्स और प्लेटफार्मों से अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों को बढ़ावा दे रहे हैं।

निकोलस पूरन के पैरिमैच इंडिया के समर्थन का मामला अवैध ऑफशोर सट्टेबाजी प्लेटफार्मों के प्रभाव को प्रतिबंधित करने में नियामक अधिकारियों के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने के प्रयास तेज हो रहे हैं, यह देखना बाकी है कि क्या भविष्य में ऐसे हाई-प्रोफाइल विज्ञापनों को अधिक जांच और जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा।

GST notice पर सरकार का रुख हो सकता है नरम

केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों (online gaming companies) को जारी किए गए जीएसटी की मांग के नोटिस (GST tax demand notice) पर अपना रुख नरम करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए सराकर ने कानूनी राय मांगी है। हालांकि महत्वपूर्ण यह है कि कुछ दिन पहले तक सरकार गेमिंग कंपनियों पर सख्ती का रुख अपना रही थी और अब नरम रुख दिखा रही है। इसके पीछे असली वजह विभिन्न हाई कोर्ट में इन डिमांड नोटिस पर स्टे जारी कर दिया है। लिहाजा सरकार के पास ज्य़ादा रास्ते नहीं बचे हैं।

टीवी चैनल सीएनबीसी के मुताबिक, सरकार अब यह स्वीकार कर रही है कि इन कंपनियों के लिए अवास्तविक कर मांगों को पूरा करना अव्यावहारिक है। खबर है कि सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग फर्मों के साथ चल रहे विवाद के संभावित समाधान पर कानूनी राय मांगी है।

गेम्सक्राफ्ट मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले पर जीएसटी विभाग को सुप्रीम कोर्ट में स्टे मिलने के बाद 2022-23 और 2023-24 के पहले सात महीनों में, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जीएसटी चोरी से संबंधित कुल 71 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और कंपनियों से 1.12 लाख करोड़ रुपये की टैक्स की मांग की गई। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दिसंबर 2023 में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में साफ किया था कि चूंकि ये नोटिस निर्णय के लिए लंबित हैं, इसलिए सीजीएसटी अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के तहत अंतिम जीएसटी मांग अभी तक निर्धारित नहीं की गई है।
अगस्त 2023 में ऑनलाइन गेम खेलने के लिए जमा की गई कुल राशि के आधार पर ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% टैक्स लगाने के सरकार के फैसले ने इंडस्ट्री दबाव में है। इससे बचने के लिए मोबाइल प्रीमियर लीग जैसी कुछ कंपनियों ने इस वजह से छंटनी का सहारा लिया है, तो कुछ छोटी कंपनियों ने अपना कारोबार बंद कर दिया। कंपनियों का कहना है कि 28% कर केवल 1 अक्टूबर, 2023 से लागू होना चाहिए। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि 1 अक्टूबर के संशोधन ने केवल मौजूदा कानून को स्पष्ट किया है और लेकिन यह पहले से ही था। इस बीच ऑनलाइन कंपनियों पर जीएसटी की मांग का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. इसके अतिरिक्त, सरकार ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है जिसने रुपये को रद्द कर दिया था। गेम्सक्राफ्ट पर 21,000 करोड़ जीएसटी की मांग, विवाद को समाधान के लिए शीर्ष अदालत में ले जाना।

जीएसटी में बढ़ोतरी के बावजूद Nazara Tech के मुनाफे में इज़ाफा

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Gaming पर 28 प्रतिशत जीएसटी के बावजूद लिस्टिड गेमिंग और स्पोर्ट्स मीडिया कंपनी नज़ारा टेक्नोलॉजीज (Listed gaming and sports media company Nazara Technologies) को चालू साल की तीसरी तिमाही में 29.52 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा (Net profit) हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले यह 46.7 प्रतिशत अधिक है। कंपनी को यह लाभ ईस्पोर्ट्स वर्टिकल (esports vertical) के शानदार प्रदर्शन की वजह से हुआ है, हालांकि गेमिंग और एडटेक सेगमेंट के मुनाफे में मामूली गिरावट देखी गई।

तिमाही के दौरान, नाज़ारा टेक्नोलॉजीज का ऑपरेशन से कुल राजस्व 320.4 करोड़ रुपये दर्ज किया, जो साल-दर-साल मामूली दो प्रतिशत की बढ़ोतरी है। कंपनी के EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई) में भी साल-दर-साल 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई, जो तिमाही के लिए 37.7 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

नाज़ारा के संस्थापक, नितीश मित्तरसैन ने कंपनी की विकास रणनीति में भरोसा जताया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय गेमिंग आईपी प्राप्त करने और डेटा-संचालित इनोवेशन का लाभ उठाने के महत्व पर जोर दिया। नाज़ारा टेक्नोलॉजीज ने हाल ही में नए और मौजूदा निवेशकों से 250 करोड़ रुपये की फंडिंग हासिल की है, जिसमें ज़ेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ और प्लूटस वेल्थ जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
सीएनबीसी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि नाज़ारा टेक्नोलॉजीज ने 19 फरवरी 2024 से धवल शेठ को रणनीतिक प्रमुख (head of strategic initiatives) के रूप में नियुक्त किया, और उन्हें कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन कर्मियों के रूप में भी नामित किया। उन्होंने 17 मार्च, 2020 से कंपनी की सहायक कंपनी पेपर बोट ऐप्स प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी के रूप में कार्य किया है।

Q3-FY24 में Nazara Technologies का सेगमेंट-वार प्रदर्शन इस बात पर प्रकाश डालता है कि Esports शीर्ष राजस्व जनरेटर है, जिसका राजस्व साल-दर-साल 27 प्रतिशत बढ़कर 193.7 करोड़ रुपये हो गया है। नोडविन गेमिंग के राजस्व में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि स्पोर्ट्सकीड़ा के राजस्व में 68 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो उपभोक्ताओं के बीच ईस्पोर्ट्स और खेल सामग्री की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

हालाँकि, गेमिंग वर्टिकल के राजस्व में थोड़ी गिरावट देखी गई, जिसका कारण उपयोगकर्ता अधिग्रहण लागत में वृद्धि और कम मार्केटिंग खर्च जैसे विभिन्न कारक थे। सरकार की जीएसटी व्यवस्था के प्रभाव के कारण रियल-मनी गेमिंग व्यवसाय का राजस्व आधा हो गया, जिससे तिमाही में घाटा हुआ। इसके अतिरिक्त, नाज़ारा के एडटेक व्यवसाय में राजस्व में गिरावट देखी गई, हालांकि कंपनी कुछ ग्राहकों पर निर्भरता को कम करने के लिए अपने ग्राहक आधार में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

Skill gaming को बढ़ावा देने के लिए EGF और महाराष्ट्र सरकार साथ आए

Skill gaming को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाली E-Gaming Fedration (EGF) महाराष्ट्र में गेमिंग को बढ़ावा देने के लिए काम करेगी। EGF ने हाल ही में महाराष्ट्र सरकार (स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, इस समझौते के मुताबिक, राज्य में जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा (promote responsible gaming) देने के लिए दोनों साथ मिलकर काम करेंगे। इसके मुताबिक राज्य सरकार खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षित गेमिंग वातावरण (safe gaming environment) सुनिश्चित करने के लिए बड़ा अभियान चलाएगी, साथ ही खिलाड़ियों की सुरक्षा और जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा देने के लिए काम करेगी।

ईजीएफ और महाराष्ट्र सरकार के बीच सहयोग युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग खेलते के लिए जरुरी जानकारी देने और उन्हें सुरक्षित करने के लिए काम करेगी। दरअसल महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में ऑनलाइन गेमिंग खेली जाती है साथ ही गेमिंग के दो यूनिकॉर्न स्टार्टअप भी यहीं पर स्थित हैं।
ईजीएफ जिम्मेदार गेमप्ले की वकालत करने, इंडस्ट्री के भीतर मानक स्थापित करने में सबसे आगे रहा है। महाराष्ट्र सरकार के साथ यह ऐतिहासिक साझेदारी जिम्मेदार गेमिंग मानकों को बढ़ावा देने के लिए ईजीएफ की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।

EGF ने जनवरी 2023 में ‘असली गेमर’ अभियान शुरू किया था, जिसमें 200,000 से अधिक गेमर्स ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने जिम्मेदार गेमिंग का वादा किया। भारतीय क्रिकेटर शुभमन गिल और रैपर नेज़ी जैसी प्रमुख हस्तियों ने इस अभियान में हिस्सा लिया था। अभियान के जरिए ईजीएफ खिलाड़ियों को स्वस्थ गेमिंग आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

भारत में ऑनलाइन कौशल गेमिंग क्षेत्र की एकीकृत आवाज के रूप में, ईजीएफ देश के शीर्ष पांच गेमिंग डेवलपर्स और ऑपरेटरों सहित हितधारकों के विशाल बहुमत के हितों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें एक यूनिकॉर्न सदस्य भी शामिल है। यह साझेदारी एक जिम्मेदार गेमिंग संस्कृति को बढ़ावा देने और ऑनलाइन गेमिंग समुदाय में खिलाड़ियों की भलाई सुनिश्चित करने के सामूहिक प्रयासों को रेखांकित करती है।