Friday, March 13, 2026
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Mahadev App update Exclusive: दुबई प्रशासन ने रवि उप्पल को किया रिहा, पैसा हड़पने की शिकायत हुई वापस

Mahadev App update: महादेव एप स्कैम के प्रमोटर्स में से एक रवि उप्पल को दुबई प्रशासन ने रिहा कर दिया है। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ जो शिकायत थी, उसके वापस लेने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, महादेव एप के प्रमुख संचालक सौरभ चंद्राकर को भी नज़रबंदी से छूट मिल सकती है। दोनों ने किसी व्यक्ति की एक बड़ी रकम नहीं लौटाई थी और इसकी शिकायत दुबई प्रशासन को किए जाने के बाद दोनों पर एक्शन लिया गया था। हालांकि इससे पहले कहा जा रहा था कि भारतीय एजेंसियां दुबई प्रशासन के साथ संपर्क में है और रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर को प्रत्यर्पण कर वापस लाया जा सकता है।

दुबई से एक गेमिंग इंडस्ट्री के जानकार ने बताया कि रवि उप्पल को कल या आज रिहा कर दिया गया है, उसके और सौरभ चंद्राकर पर जो रकम हड़पने की शिकायत की गई थी, वो अब वापस ले ली गई है। इसी वजह से रवि उप्पल को रिहा किया गया है। इससे पहले भी इस अवैध एप के संचालकों ने अवैध लेन देन में बहुत सारे लोगों के पैसे वापस नहीं किए हैं। दोनों भारत में अवैध जुए और सट्टेबाज़ी का कारोबार करते हैं।

महादेव एप के प्रमुख सरगना सौरभ चंद्राकर भारत के छत्तीसगढ़ के एक छोटे शहर भिलाई में जूस की दुकान चलाया करता था, बाद में उसने कुछ लोगों के साथ मिलकर यह जुआ एप विकसित कराया और करोड़ो रुपये कमाने लगा, भारत में जुए का नेटवर्क स्थापित करने के बाद यह पुलिस से बचने के लिए दुबई जाकर रहने लगा। अब भारत में ज्य़ादातर जुए का पैसा हवाला के जरिए दुबई पहुंचाया जाता है। यहां इस एप के नेटवर्क ने बड़े नेताओं और स्थानीय पुलिस में अपनी सांठ गांठ की हुई है। जिससे यह जुआ बिना रोक टोक के चल रहा है।

Virat Kohli की फर्जी फोटो से जुआ खेलने को प्रेरित कर रहा है Mahadev App Books

Mahadev App scam: अपने अवैध जुए को लेकर कुख्यात महादेव बुक्स एप अब अपनी मिरर साइट महादेवा बुक्स के विज्ञापनों में क्रिकेटर विराट कोहली की फोटो का इस्तेमाल कर रहा है। एक ओर जहां सरकारी एजेंसियां महादेव बुक्स एप के प्रमोटरों से लेकर इनके अन्य नेटवर्क को तोड़ने में लगी हुई है, तो दूसरी ओर महादेव बुक्स को देश में ऑपरेट करने वाले लोगों ने इसकी मिरर साइट्स के जरिए विज्ञापन कर अपना अवैध कारोबार दोबारा तेज़ी से फैलना शुरु कर दिया है।

अपनी मिरर साइट्स महादेवा बुक्स के लिए एक विज्ञापन में विराट कोहली की फोटो का इस्तेमाल किया गया है, ताकि लोग इस साइट पर जुआ खेंले। इससे पहले भी महादेव बुक्स लगातार सेलीब्रिटिज के फोटो और विडियो का इस्तेमाल अपने प्रमोशन के लिए करता रहा है। कई बड़ी फिल्मी और क्रिकेट जगत की हस्तियों को महादेव बुक्स ने साइन भी किया था। लेकिन पिछले कुछ समय में एजेंसियों के दबाव और महादेव बुक्स की साइट्स को ब्लॉक किए जाने के बाद यह कई अन्य मिरर साइट्स का इस्तेमाल लोगों के पैसे जमा करवाने के लिए कर रहा है।

प्रवर्तन निदेशायल ने लगातार इस एप को चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया हुआ है। इस दबाव की वजह से महादेव बुक्स के ऑपरेटर अब नाम बदलकर मिलती झुलती साइट्स के जरिए अपना कारोबार चलाने में लगे हुए हैं। महादेवा बुक्स भी इन्ही मिरर साइट्स में से एक है। इससे पहले भी महादेव बुक्स ने करीब 40 से ज्य़ादा मिलती झुलती साइट्स बनाकर रखी हुई हैं, ताकि अगर एक साइट ब्लॉक होती है तो दूसरी साइट के जरिए लोग जुआ खेलना जारी रखे।

Mahadev app scam: छत्तीसगढ़ पुलिस के कांस्टेबल की पत्नी को ईडी ने किया समन, घर से मिले थे 7 करोड़ कैश

महादेव एप स्कैम केस (Mahadev app scam case) में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जिस पुलिस कांस्टेबल भीम यादव (Chhattisgarh Durg Police Constable) के घर से 7 करोड़ रुपये बरामद हुए थे, उसकी पत्नी सीमा यादव को प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने समन किया है। हालांकि सीमा यादव ईडी को घर पर नहीं मिली थी, जिसके बाद ईडी ने इस नोटिस को सीमा यादव के घर पर चिपका दिया है। महादेव एप स्कैम मामले में बड़ी मात्रा में कैश छत्तीसगढ़ के कई लोगों के पास से ईडी को बरामद हुआ था।

ख़ास बात यह है कि छत्तीतगढ़ पुलिस में कांस्टेबल भीम यादव को ईडी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। उसके घर से ईडी को 7 करोड़ रुपये कैश और उसके बैंक खातों में 15 करोड़ रुपये से ज्य़ादा बरामद हुए थे। पुलिस के एक कांस्टेबल के पास मिले इतने कैश के बाद पूरे प्रदेश में तहलका मच गया था। ईडी ने भीम यादव को रायपुर कोर्ट में पेश किया था, उसकी 7 दिन की रिमांड ईडी को मिल गई है। जबकि असीम दास उर्फ बप्पा की 10 दिन की रिमांड ईडी को मिल गई है।

पूरे देश में महादेव एप स्कैम को लेकर बड़ा तहलका मचा हुआ है। इस अवैध एप के जरिए लोगों को जुआ खिलाने वाली इस एप का संचालन दुबई से किया जाता था। जहां इस एप के संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल करोड़ों रुपये कमा रहे थे। साथ ही पूरे देश में अवैध जुए के जरिए लोगों के गाढ़ी कमाई लूटी जा रही थी। इसके बाद ईडी ने इस मामले में काफी कार्रवाई की है। फिलहाल दुबई प्रशासन ने रवि उप्पल को गिरफ्तार कर लिया है और सौरभ चंद्राकर को नज़रबंद कर दिया गया है।

Fantasy games पर लग रहे हैं फिक्सिंग के आरोप, क्या सरकार लोगों के पैसे को बचाने के लिए बनाएगी रेगुलटर?

फैंटेसी गेम्स को लेकर बार बार फिक्सिंग (Fantasy games fixing) के आरोप सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे हैं। इन गेम्स में फिक्सिंग और बॉट्स के इस्तेमाल के आरोप बहुत सारे यूजर लगातार लगा रहे हैं, दूसरी ओर इन गेम्स को रेगुलेट करने या इनपर नज़र रखने के लिए कोई भी नियामक नहीं है। ऐसे में कंपनियां इन गेम्स को खेलने वालों के साथ क्या कर रही है, इसको लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

सोशल मीडिया पर जॉन सिल्वा नाम के यूजर ने आरोप लगाया है कि #choice11 के साथ साथ #Fantasyakhada ने भी फिक्सिंग के लिए बॉट्स (fantasy fixing bots) का इस्तेमाल शुरु कर दिया है।

इससे पहले #Dream11 पर भी इस तरह के आरोप लगते रहे थे।

स्नेहा कुमार रेड्डी नाम के अन्य यूजर ने MyTeam_11 पर आरोप लगाया है कि वो लगातार फिक्सिंग कर आम लोगों को लूट रही है। दरअसल इन गेम्स में खेलने वाले को इंट्री फीस के तौर पर 10 या 20 रुपये देने होते हैं। जबकि पूल प्राइज लाखों और करोड़ों में होता है।

ऐसे में 10 या 20 रुपये लगाकर लाखों करोड़ों रुपये जीतने का सपना लेकर लाखों लोग फैंटेसी गेम्स खेल रहे हैं।

इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, आम तौर पर फैटेंसी गेम्स पर आरोप लगते रहते हैं कि 50 से 60 परसेंट ही असली खिलाड़ी होते हैं, बाकि अंतिम समय में आने वाले ज्य़ादा खेलने वाले Bots होते हैं। इस बात को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। लेकिन इन कंपनियों पर किसी तरह की कोई रोकटोक नहीं है। फैंटेसी और दूसरी गेम्स पर कोई रेगुलेटर नहीं है। इंडस्ट्री खुद ही रेगुलेटर (एसआरबी) बनना चाहती है, जिसका निष्पक्ष होना बहुत ही मुश्किल है। ऐसे में लोगों का पैसा सुरक्षित रहे इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। जिस तरह से सेबी, आईआरडीए, टीआरएआई और आरबीआई हैं, उसी तरह का कोई रेगुलटेर फैंटेसी गेम्स को रेगुलेट करने के लिए चाहिए।

Illgal gambling apps: सरकार की चेतावनी के बावजूद भी धड़ल्ले से चल रहे हैं अवैध गैंबलिंग एप्स

Illgal gambling apps: वित्त मंत्रालय के गैंबलिंग साइट्स के रजिस्ट्रेशन को लेकर बड़े दावों के बावजूद अभी भी देश में गैंबलिंग साइट्स धडल्ले से लोगों को ऑनलाइन जुआ खिलवा रही हैं और टैक्स भी नहीं भर रही हैं, जबकि दूसरी ओर घरेलू स्किल गेमिंग कंपनियों पर सख्त टैक्स लाद दिया गया है। गेमिंग के क्षेत्र के प्रमुख वकील जय सत्या ने कहा है कि जीएसटी को लेकर नए कानून को लागू हुए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन एक भी अवैध गैंबलिंग साइट को सरकार की ओर से ब्लॉक नहीं किया गया है।

दरअसल जीएसटी परिषद की सिफारिशों के बाद केंद्र सरकार ने एक जीएसटी कानून में एक नया संशोधन 14ए किया था। इसके मुताबिक विदेशी गैंबलिंग और बैटिंग साइट्स को भारत में पंजीकरण करना होगा और उसके बाद यहां टैक्स देकर ये कंपनियां अपना काम कर सकती हैं। यह संशोधन एक अक्टूबर से लागू हो गया था और इन विदेशी साइट्स को इसके बाद से अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य था। लेकिन अभी तक एक भी विदेशी गैंबलिंग साइट ने अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। यानि सरकार के पास विदेशी गैंबलिंग साइट्स से एक भी रुपया टैक्स के तौर पर नहीं आ रहा है। जबकि देशी गेमिंग कंपनियां जीएसटी से काफी परेशान हैं।

भारतीय ऑनलाइन गेमिंग बाज़ार की बढ़ोतरी के बाद पिछले साल में बहुत सारे अवैध ऑफश्योर गैंबलिंग प्लेटफ़ॉर्म भारतीय बाज़ार में आ गए हैं। लोगों के वैध और अवैध ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म के बारे में जानकारी नहीं होने और सरकार के इसपर कार्रवाई नहीं करने की वजह से आम लोग अपना पैसा अवैध विदेशी साइट्स पर गंवा रहे हैं। अब तक, हजारों अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म सरोगेट ब्रांडों के माध्यम से खुद को भारत में मार्केट कर रहे हैं। इनमें से कई प्लेटफ़ॉर्म अलग-अलग नामों से एक ही कंपनी चलाती है। यह ज्य़ादा पैसे जीतने का वादा करके भोले-भाले लोगों को फंसा रही हैं। इन लोगों से ठगे गए पैसे का इस्तेमाल प्रचार के लिए मशहूर हस्तियों को नियुक्त करने और फर्जी बैंक खातों, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन और हवाला चैनलों के माध्यम से देश से बाहर ले जाने के लिए किया जाता है।

लेकिन केंद्र सरकार के अक्टूबर में इन डोमेन को बैन करने की चेतावनी के बावजूद अभी भी ना तो इन कंपनियों ने खुद को भारत में रजिस्टर कराया है और ना ही केंद्र सरकार ने किसी एक डोमेन के खिलाफ कार्रवाई ही की है।

Mahadev app scam: सौरभ चंद्राकर का करीबी दीपक नेपाली पुलिस की गिरफ्त में

Mahadev app scam: महादेव एप स्कैम केस में छत्तीसगढ़ पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश में सट्टेबाज़ी चलाने के लिए कुख्यात और सौरभ चंद्राकर का करीबी दीपक नेपाली पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। उसपर लूट, हत्या और अपहरण जैसे कई मामले दर्ज थे। इस गिरफ्तारी को महादेव एप स्कैम में एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। दुर्ग एसएसपी रामगोपाल गर्ग ने दीपक नेपाली की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

दीपक नेपाली पर जघन्य अपराधों से लेकर कुख्यात महादेव सट्टेबाजी ऐप से जुड़े मामले दर्ज थे और इस अपराधी इसको राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को विभिन्न स्थानों पर कई आरोपों का सामना करना पड़ता है, जिसमें लूट, हत्या, अपहरण जैसे अपराध और महादेव सट्टेबाजी ऐप के साथ उसकी कथित संलिप्तता शामिल है। महादेव सट्टेबाजी ऐप के साथ उसके संबंध के संबंध में पूछताछ चल रही है, इसमें अब महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है, जो जांच को आगे बढ़ा सकता है।
दीपक नेपाली की गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ समेत देश में अवैध ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी के नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। ख़ासकर महादेव एप के संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल किस तरह से यहां कारोबार चला रहे थे, उसका पता पुलिस लगा सकती है। यह ऐप इस साल की शुरुआत में तब सुर्खियों में आया था जब रणबीर कपूर, साहिल खान, हुमा कुरेशी और कॉमेडियन कपिल शर्मा जैसे कई बॉलीवुड स्टार्स को ईडी ने मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था।

CleverTap का दावा WinZO के 17 करोड़ से ज्य़ादा कस्टमर

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डेटा संबंधी साल्यूशन देने वाली कंपनी CleverTap ने कहा है कि WinZO भारत की मोबाइल गेमिंग में सबसे आगे है, कंपनी के 175 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जो इसे देश का सबसे बड़ा मोबाइल सोशल गेमिंग प्लेटफॉर्म बनाता है। WinZO एक दर्जन से ज्याद क्षेत्रीय भाषाओं में 100+ गेम चलाती करती है।

CleverTap के मुताबिक, WinZO में हर महीने 5 बिलियन माइक्रो इन-ऐप लेनदेन करती हैं, और यह गेमर्स को बेहतर अनुभव प्रदान करता है। WinZo के Product head अंगद सहदेव के मुताबिक, “मौजूदा अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में, जहां कस्टमर्स के पास ढेर सारे विकल्प हैं और कई ऐप्स और ब्रांड उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए मौजूद हैं, ऐसे में हमारा टारगेट ग्राहकों के हिसाब से बेहतर प्रोडक्ट उपलब्ध कराना है। इसके लिए ग्राहकों के लिहाज से रियल टाइम अपडेट आदि के लिए कई सारे टूल भी चाहिए होते हैं। उन्होंने आगे कहा, “क्लीवरटैप केवल डेटा प्रदान नहीं करता है; यह हमें तेजी से काम करने के लिए बहुत टूल भी देता है।

दरअसल गेमिंग इंडस्ट्री में भारी कंपीटिशन को देखते हुए ग्राहकों का रियल टाइम डेटा और उसके हिसाब से नए नए टूल बहुत ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में बहुत सारी कंपनियां इस तरह की सर्विस दे रही हैं, इनमें CleverTap भी शामिल है। क्लेवरटैप का दावा है कि हम कंपनियों को ग्राहकों की व्यापक ट्रैकिंग और विश्लेषण प्रदान करते है। कंपनी के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सिद्धार्थ पिशारोती ने कहा, “क्लीवरटैप में हम जो कुछ भी करते हैं उसके केंद्र में ग्राहक को बरकरार रखना हमेशा से रहा है।

K L Rahul को छोड़कर दक्षिण अफ्रीका की ज़मीन पर सभी बल्लेबाज़ फेल

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भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला जा रहे पहले टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाज़ बुरी तरह से फेल रहे, हालत ये हुई कि पहले तीन बल्लेबाज़ों ने टीम के स्कोर में सिर्फ 22 रन ही जोड़े। कप्तान रोहित शर्मा 5 रन बनाकर आउट हुए, शुभमन गिल ने 2 रन बनाए और यशसवी जयसवाल ने 17 रन। ऐसे में विराट कोहली और श्रेयस अय्यर ने टीम के स्कोर को आगे बढ़ाया।

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भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल (K L Rahul) ने अफ्रीकी पेस अटैक का मुकाबला करते हुए 105 गेंद में 70 रन बनाए, फिलहाल वह क्रीज पर जमे हुए हैं। पहले दिन का खेल पूरा नहीं हो पाया, क्योंकि बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा। हालांकि विराट कोहली के 38 और श्रेयस अय्यर के 31 रन के साथ-साथ शार्दुल ठाकुर के 24 रनों की मदद से भारत 200 के पार पहुंच पाया। एक समय ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम 200 रन से पहले ही आउट हो जाएगी लेकिन के एल राहुल (K L Rahul) ने बेहतरीन बल्लेबाजी का नमूना पेश करते हुए बहुत ही शानदार खेल दिखाया। फिलहाल भारतीय टीम का स्कोर आठ विकेट पर 208 रन है।

पिछले कुछ साल के एल राहुल (K L Rahul) के लिए अच्छे नहीं रहे थे, उनके खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें टीम में लेने को लेकर कई बार सवाल खड़े होते रहे हैं। लेकिन पिछले करीब 6 महीनों से के एल राहुल के बल्ले से ना सिर्फ रन निकल रहे हैं, बल्कि विकेट के पीछे भी वो बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं। पूरे वनडे विश्व कप में जिस तरह से उनकी राय ली गई, उससे क्रिकेट को लेकर उनकी समझ का एक नया रूप ही देखने को मिला।

Mahadev app scam का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर दुबई में नज़रबंद

Mahadev app scam के संचालक सौरभ चंद्राकर को दुबई प्रशासन ने नजरबंद कर दिया है। भारतीय एजेंसियों के दुबई प्रशासन से सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के बारे में जानकारी देने के बाद दुबई प्रशासन ने यह कदम उठाया है। सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस भी जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही सौरभ को भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, दुबई प्रशासन ने सौरभ को मिलने वालों को भी सीमित कर दिया है, भारतीय एजेंसियों ने सौरभ चंद्राकर (Indian agencies on Saurabh Chandrakar) को लेकर दुबई प्रशासन को बताया था कि वह किसी दूसरे देश में भागने की फिराक में है। अगर उसपर नज़र नहीं रखी जाएगी तो वह भागने की तैयारियों में लगा हुआ है। इसके बाद ही दुबई प्रशासन सौरभ को लेकर सख्त हो गया था।

इससे पहले दुबई प्रशासन ने महादेव एप (Mahadev app) के अन्य संचालक रवि उप्पल को गिरफ्तार कर लिया था। भारतीय एजेंसियों के इंटरपोल के साथ मिलकर दुबई पुलिस प्रशासन को रवि उप्पल के बारे में जानकारी दी थी। साथ ही ईडी के द्वारा सबूत भी दिए गए थे। इसके बाद ही रवि उप्पल को गिरफ्तार किया गया था। इसके साथ ही भारत सरकार ने इन दोनों को भारत लाने की तैयारी भी शुरु कर दी है।

Online gaming court cases: रियल मनी गेमिंग की कोर्ट की परेशानियां बढ़ी

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Online gaming court cases: गेमिंग सेक्टर के लिए 2023 काफी बड़े झटके वाला साबित हुआ, जहां एक ओर इंडस्ट्री ने करोड़ों रुपये एसआरबी (Self Regulatary Body) को लेकर किया था, जहां पूरा एसआरबी का फंड लगभग बर्बाद हो गया, वहीं दूसरी ओर एसआरबी के साथ साथ कोर्ट केस (court cases) लगातार गेमिंग सेक्टर को परेशान करते रहे। 2023 में रियल मनी गेमिंग में क्या क्या महत्वपूर्ण कोर्ट केस हुए, इसको जानते हैं।

गेम्सक्राफ्ट जीएसटी मामला (Gameskraft GST issue)
सितंबर 2022 में, जीएसटी इंटेलिजेंस यूनिट (GSTIU) ने बेंगलुरु स्थित गेम्सक्राफ्ट को कारण बताओ नोटिस जारी कर अगस्त 2017 से जून 2022 के दौरान 20,989 करोड़ रुपये टैक्स डिमांड नोटिस भेज दिया। इसको देखते हुए कंपनी ने कारण बताओ नोटिस को कर्नाटक उच्च न्यायालय के सामने चुनौती दी और 2022 में इसपर स्टे लग गया, हालांकि इसका अंतिम निर्णय मई 2023 में ही सुनाया गया। इस ऐतिहासिक फैसले में, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) के कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया।

इसके बाद जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के सामने एक अपील दायर की, जिसने सितंबर 2023 में मामले की सुनवाई करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी। इस रोक के परिणामस्वरूप हाल के महीनों में ऑनलाइन गेमिंग और कैसीनो ऑपरेटरों को जीएसटी नोटिस की झड़ी लग गई।

  1. Bombay HC: गोवा बेंच में कैसीनो लाइसेंस शुल्क मामला
    बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने अप्रैल में कैसीनो चलाने वालों को 2020 और 2021 के लिए 321 करोड़ रुपये की लंबित फीस का भुगतान करने का निर्देश दिया था, इस दौरान ये कैसिनो COVID-19 महामारी के कारण बंद थे।
  2. राज्य सरकार ने कोरोना के कारण कैसीनो संचालन को फीस भुगतान को स्थगित कर दिया था, लेकिन अक्टूबर 2022 में सरकार ने भुगतान के लिए कैसिनो संचालकों पर फीस देने का दबाव बनाया, इसके बाद राज्य सरकार के खिलाफ कैसीनो ऑपरेटरों ने कोर्ट का रुख किया। बॉम्बे उच्च न्यायालय की गोवा पीठ के समक्ष इस मामले की रिट याचिकाएं, दायर हुई।

सुनवाई में न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार ने फीस को टाला था, इस फीस की एवज में कैसीनो चलाने की अनुमति दी है। लाइसेंस शुल्क ऐसे विशेषाधिकार से अलग होने की कीमत या प्रतिफल है, जिसका स्वामित्व और नियंत्रण विशेष रूप से राज्य सरकार के पास है और हाई कोर्ट ने कैसीनो संचालकों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया गया है।

  1. Andra Pradesh HC : ऑनलाइन गेमिंग प्रतिबंध कानून
    मार्च 2023 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह जांचने के लिए एक समिति बनाने को कहा, जोकि ऑनलाइन रम्मी स्किल है या चांस इसका पता लगाएगी।
  2. जनवरी 2023 में एक आदेश में, उच्च न्यायालय ने यह माना कि फिजिकली खेला जाने वाला रम्मी एक “स्किल बेस्ड गेम” है, लेकिन यह मानने के लिए कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है कि ऑनलाइन रम्मी भी “स्किल है”/या “चांस” है। न्यायालय ने कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय और तमिलनाडु उच्च न्यायालय के दो हालिया फैसलों में भी यह तय नहीं होता कि ऑनलाइन रम्मी कैसे खेली जाती है। इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसने अगस्त में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2023 को देखते हुए ऑनलाइन रम्मी से संबंधित मुद्दों पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया।
  1. SC में ऑनलाइन गेमिंग पर बैन को लेकर केस
    सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु-कर्नाटक राज्यों ने उच्च न्यायालयों द्वारा ऑनलाइन गेमिंग प्रतिबंध कानूनों को रद्द करने पर अपील पर सुनवाई जारी रखी। सुप्रीम कोर्ट में अपीलों के लंबित होने के बावजूद, तमिलनाडु सरकार एक और कानून बनाने जा रही थी। चूंकि ये मामले लंबित थे, इसलिए तेलंगाना सरकार ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित इसी तरह की याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरण याचिका दायर की। मामले फिलहाल लंबित हैं और 2024 में इन मामलों के लिए कुछ न कुछ हो सकता है।
    • Madras HC: ऑनलाइन गेमिंग प्रतिबंध कानून
    • नवंबर में मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु ऑनलाइन जुआ निषेध और ऑनलाइन गेम विनियमन अधिनियम 2022 की वैधता को बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने कहा कि यह विधेयक रम्मी और पोकर जैसे खेलों पर लागू नहीं होगा, जो स्किल के खेल थे और यह केवल संयोग के खेल के खिलाफ ही लागू होगा। इसके मुताबिक ऑनलाइन पोकर और रम्मी को बैन करने वाले कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया जाएगा। लगभग दो वर्षों में यह दूसरी बार है कि राज्य सरकार ऑनलाइन रमी और पोकर पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून का बचाव करने में फेल रही।
  2. विभिन्न उच्च न्यायालयों में जीएसटी मामले
    इस साल जैसे ही गेम्सक्राफ्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले पर स्टे लगाया, उसके बाद से ही ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों और कैसीनो ऑपरेटरों को जीएसटी नोटिस की झड़ी लगी, उनमें से कई ने इस आधार पर राहत की मांग करते हुए विभिन्न उच्च न्यायालयों का दरवाजा खटखटाया कि नोटिस मनमाने और असंवैधानिक थे। इनमें से अधिकांश मामलों में उच्च न्यायालयों ने अंतरिम राहत दी है।

नवंबर में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए एएसजी वेंकटरमन ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि सरकार जल्द ही विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित समान कर मामलों को एक साथ जोड़ने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।