Thursday, March 12, 2026
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Online Gaming पर बैन लगाने को लेकर विजय गोयल की अश्विनी वैष्णव को चिट्ठी

ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग (Online Gaming and Gambling) के खिलाफ आंदोलन चला रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने केंद्रीय सूचना प्रोद्यौकिमी मंत्री अश्विनी वैष्णव को ऑनलाइन गेमिंग पर तुरंत बैन लगाने के लिए एक चिट्ठी लिखी है। विजय गोयल ने अपनी चिट्ठी में बच्चों और युवाओं में ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत का वाला देते हुए लिखा है कि युवाओं को बड़े प्राइस के लालच देकर गेमिंग में धकेला जाता है और फिर बाद में युवा लोन लेकर इन गेम्स में पैसे लगते हैं और कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट में कहा कि कई बार इन गेम्स में ज्य़ादा पैसे जीतने के चक्कर में युवा आत्महत्या तक कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पेरेंट्स को पता ही नहीं चलता कि बच्चे गेमिंग खेल रहे हैं या गैंबलिंग। उन्होंने क्रिकेट स्टार और फिल्म अभिनेताओं के ऑनलाइन गेमिंग को प्रमोट करने को लेकर आलोचना की है। विजय गोयल ने कहा की ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म पर या तो तुरंत बैन लगाया जाए या फिर इसको रेगुलेट किया जाए।

तमिनलाडू से रियल मनी गेमिंग को लग सकता है झटका

रियल मनी गेमिंग (Real Money Gaming) को तमिलनाडु से एक बड़ा झटका मिल सकता है। राज्य में तमिलनाडु ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी (the Tamil Nadu Online Gaming Authority ) ने रियल मनी गेमिंग इंडस्ट्री के साथ आगे चर्चा नहीं का मन बना लिया है और अब वह सीधा पॉलिसी लेकर आ सकती है।

तमिलनाडु ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ने 24 जुलाई को ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन, दी फेडरेशन ऑफ इंडियन फेंटेसी स्पोर्ट्स और ई-गेमिंग फेडरेशन के साथ-साथ गेम डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ तमिलनाडु के साथ एक चर्चा की थी। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि कुछ और चरणों में गेमिंग इंडस्ट्री के साथ चर्चा करेगी। हालांकि तमिलनाडु सरकार के मुख्य सचिव एन मुरूगन ने संकेत दिया कि वह चुनिंदा गेम्स को रेगुलेट करने पर विचार कर रहे हैं। दरअसल राज्य में बच्चों और युवाओं में गेमिंग एडिक्शन बढ़ रहा है और इससे युवाओं को काफी नुकसान पहुंचा रहा है।

तमिलनाडू सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार साफ तौर पर गेमिंग सेक्टर को रेगुलेट कर रही है, लेकिन वीडियो गेम इंडस्ट्री इससे बाहर रहेगी यानी की रियल में मनी गेमिंग राज्य में रेगुलेट की जा सकती है। इससे पहले भी तमिलनाडु सरकार लगातार गेमिंग सेक्टर को रेगुलेट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी, दो बार रियल मनी गेमिंग को रेगुलेट करने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर चुकी है। लेकिन दोनों बार मद्रास हाई कोर्ट में उनकी याचिका को खारिज कर दिया था, इसको लेकर फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

Gambling-betting apps के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका पर केंद्र को नोटिस

देश में ऑनलाइन गैंबलिंग के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में कहा गया है की देश में अवैध बैटिंग और गैंबलिंग वेबसाइट धड़ल्ले से चल रही है, जोकि “गेम ऑफ चांस” है और यह पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1867 का सरासर उल्लंघन है। इसके साथ ही साथ यह अवैध बैटिंग एप्स केंद्रीय जीएसटी कानून और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी रूल्स 2021 का भी उल्लंघन कर रहे हैं।

गेमिंग कंपनी विंजो ने दिल्ली हाई कोर्ट में यह केस दायर किया है। इसके बाद जस्टिस संजीव नरूला की कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को चार हफ्तों के भीतर एफिडेविट फाइल करने के लिए कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी। अपनी पिटीशन के साथ विंजो ने अवैध गैंबलिंग वेबसाइट की एक इलेक्ट्रॉनिक फाइल भी कोर्ट में जमा कराई है। जिसमें इन अवैध वेबसाइट को लेकर काफी सबूत कोर्ट को दिए गए हैं।

बड़ी बात यह है कि केंद्र सरकार भी लगातार अवैध गैंबलिंग साइट्स के खिलाफ बात तो कर रही है, लेकिन इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में यह अवैध वेबसाइट भारत में बिना रोकटोक के चल रही है। राज्य सरकारें भी इस मामले में कुछ नहीं कर पा रही है, क्योंकि यह साइट्स विदेश से भारत में चलाई जा रही है। केंद्र सरकार ने इन साइट्स को जीएसटी के तहत रजिस्टर करने का मौका दिया था। लेकिन इनसाइट्स ने अपने आप को ना तो भारत में रजिस्टर कराया और ना ही यह कोई जीएसटी भारत में दे रहे हैं। इसीलिए जीएसटी आईटी रूल और पब्लिक गैंबलिंग एक्ट के खिलाफ कोर्ट में मामला दायर किया गया है।

Book on online gaming: “भारत में तेज़ी से बढ़ रही है गेमिंग इंडस्ट्री, लेकिन चुनौतियां भी कम नही “

Book on online gaming: ऑनलाइन गेमिंग और उससे संबंधित टेक्नोलॉजी पॉलिसी और चैलेंज पर एक किताब के लांच पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस विक्रमजीत सेन ने कहा कि देश में गेमिंग की 500 से ज्यादा कंपनियां है और यह 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा की इंडस्ट्री है देश में करीब 50 करोड़ लोग युवा गेमिंग खेल रहे हैं और यह हर साल 30% की दर से बढ़ रही है 23 और ऐसे में इस इंडस्ट्री को अनदेखा नहीं किया जा सकता। हालांकि दूसरी ओर देश के अतिरिक्त सॉलिसीटर जरनल विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि गेमिंग के सामाजिक प्रभाव को भी अनदेखा नही किया जा सकता है। 

ऑनलाइन गेमिंग को लेकर कानूनी परिभाषा और इसको रेगुलेट करना या केंद्र की ओर से कोई केंद्रीय कानून हो या नहीं हो, इसको लेकर इस किताब में करीब 25 लेखों को शामिल किया गया है। जिसमें गेमिंग सेक्टर के विभिन्न जानकारों और विशेषज्ञों ने अपने लेख इस किताब में लिखे हैं। किताब को प्रो. लवली दासगुप्ता और प्रो. शामिक सेन ने संपादित किया है। 

Gaming सेक्टर में क्वालिटी गेम डेवलपमेंट करने के लिए टैलेंट पर फोकस करेगी इंडस्ट्री

Gaming: भारत बेशक दुनिया के उन प्रमुख देशों में हो जहां पर गेमिंग बहुत ज्यादा खेली जा रही हो, लेकिन जहां तक गेमिंग से रेवेन्यू का सवाल है तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ एक परसेंट ही है, जबकि भारत दुनिया के पांच प्रमुख गेमिंग देश में से एक है। यहां पर करीब 9.5 बिलियन से ज्यादा ऐप डाउनलोड्स होते हैं।

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गेम डेवलपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक दुनिया के 15 परसेंट गेमर भारत में मौजूद है, लेकिन जहां तक गेमिंग के जरिए से रेवेन्यू कमाने का सवाल है तो यह सिर्फ एक परसेंट है, क्योंकि भारत में हाई क्वालिटी गेम्स डेवलपमेंट नहीं हो रहे, जिसको दूसरी भाषा में ट्रिपल ए गेम्स कहा जाता है। गेम डेवलपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्रीधर मुपिदी के मुताबिक भारत में रेवेन्यू कम आ रहा है, इसीलिए हमने अब अपना पूरा फोकस गेम इंडस्ट्री के टैलेंट के डेवलपमेंट पर लगा दिया है। गेम डेवलपर कांफ्रेंस फिक्की और गेम डेवलपर संगठन ने कुछ समझते भी किए हैं।

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गेम डेवलपमेंट एसोसिएशन के मुताबिक भारत में बहुत बड़ी संख्या में युवा और टैलेंटेड लोग मौजूद है। गेमिंग के जरिए से देश में जॉब्स और वेल्थ क्रिएट की जा सकती है। बशर्ते सरकार गेमिंग टैलेंट को विकसित करने में मदद दे। इस कांफ्रेंस में आए राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों को भी हमने यही बात कही है। संगठन के अध्यक्ष के मुताबिक गेम डेवलपर बॉडी ने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थान आईआईटी एनआईटी को भी इसमें शामिल किया है। उन्होंने कहा कि भारत में जितने भी गेमिंग यूनिकॉर्न बने हैं, उसमें अधिकांश आईआईटी के पास आउट स्टूडेंट ने ही यह यूनिकॉर्न खड़े हैं। संगठन ने सरकार से अपील की है कि वह अंतरराष्ट्रीय गेम डेवलपर को यहां पर बेस बनाने के लिए टैक्स में रियायत दे। साथ ही साथ उन्होंने गेमिंग इंडस्ट्री के ओवर रेगुलेशन को भी कम करने के लिए अपील की है।

Dharna against gambling: 24 करोड़ युवा गैंबलिंग की लत के हैं शिकार

Dharna against gambling: पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल और दक्षिणी दिल्ली के सांसद रामवीर बिधुड़ी समेत दिल्ली बीजेपी के कई विधायकों ने ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग के विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया। लोक अभियान नाम की संस्था के बैनर तले दिए गए इस धरने में विजय गोयल ने कहा कि देश में ऑनलाइन गैंबलिंग 30 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। आज 24 करोड़ से ज्य़ादा लोग इसके शिकार हैं, जिसमें ज्य़ादातर युवा वर्ग के लोग हैं।

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उन्होंने कहा कि, आप यह समझिए कि पूरे विश्व के अंदर 63 बिलियन अमेरिकन डॉलर का ऑनलाइन गेमिंग का बिजनेस हो रहा है और हमारे देश में ऑनलाइन गेम 30% की दर से लगातार बढ़ रही है। 2016 में जो सिर्फ 20 लाख लोग ऑनलाइन गेमिंग में शिकार थे, आज 24 करोड लोग इसके शिकार है, यह 30% की गति से लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकारें सोई हुई हैं, यह उनकी जिम्मेदारी है, किसी भी प्रकार के जुए के ऊपर प्रतिबंध लगाए, क्योंकि 1867 का जो पब्लिक गैंबलिंग एक्ट है वह साफ तौर से कहता है कि जुए को रोकना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। हमारे देश में सिर्फ सिक्किम, गोवा और दमन को छोड़कर कहीं भी जुए नहीं खेला जा सकता है। लेकिन अब यह हर जगह खेला जा रहा है। लोग पहले शौक-शौक में खेलते हैं और फिर उनको इसकी लत पड़ जाती है, फिर वह बर्बाद होते हैं, फिर नशे का शिकार होते हैं और उसके बाद आत्महत्या तक पहुंच जाते हैं। मां-बाप को तो यह नहीं पता चलता कि ऑनलाइन बच्चा पढ़ रहा है या ऑनलाइन गैंबलिंग खेल रहा है।

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विजय गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जो कहते हैं कि हमारे देश के अंदर युवाओं को कंस्ट्रक्टिव काम में डेवलपमेंट काम में लगना चाहिए। वहां युवा आज इसके जाल के अंदर फंस रहा है, इस देश के अंदर गैंबलिंग बच्चों को भटका रही है। यह तो लॉटरी से भी आसान है। लॉटरी के लिए तो आपको खेलने के लिए बाहर जाना था, लेकिन ऑनलाइन गैंबलिंग तो घर में ही मोबाइल से खेल सकते हैं। इस धरने में दक्षिणी दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधुड़ी, विधायक अजय महावर और पूर्व विधायक विजय जौली भी शामिल हुए थे।

Ban on gaming: गेमिंग को बैन या रेगुलेट करने के लिए पूर्व मंत्री विजय गोयल देंगे धरना

Ban on gaming: कभी लॉटरी के खिलाफ आंदोलन कर उसको रेगुलेट करने में काम करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल अब ऑनलाइन गेमिंग को बैन करने या रेगुलेट करने के लिए आंदोलन शुरू कर रहे हैं। विजय गोयल के इसके खिलाफ शनिवार को जंतर मंतर पर एक धरना देने जा रहे हैं। विजय गोयल का “लोक अभियान” इसके खिलाफ यह धरना प्रदर्शन करने जा रहा है। इससे पहले भी ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग को लेकर काफी बातें होती रही है। लेकिन यह पहला मौका है जब ऑनलाइन गेमिंग को लेकर किसी बड़े राजनेता ने अभियान शुरू किया है।

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देश भर में ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग की वजह से लाखों युवा जल्दी अमीर होने के चक्कर में इन गेम्स में फंस रहे हैं और उसकी वजह से कई बार आत्महत्या से लेकर विभिन्न अपराधों की खबर आती ही रहती है। ऑनलाइन गेमिंग फिलहाल रेगुलेट नहीं है। इसको लेकर किसी भी तरह के कोई नियम कायदे भी नहीं है, सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों के आधार पर ऑनलाइन गेमिंग देश भर में चल रही है। कुछ राज्यों ने ऑनलाइन गेमिंग को लेकर कई कानून बनाए हैं। लेकिन अभी तक इस पर कुछ विशेष नहीं हुआ है। तमिलनाडु ने भी ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ दो बार कानून बनाने की कोशिश की है, लेकिन कोर्ट में यह कानून टिक नहीं पाएं हैं।

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तेलंगाना में भी रम्मी को बैन किया गया था। इसी तरह कई राज्यों में भी समय-समय पर ऑनलाइन गेमिंग रोकने को लेकर सरकारें काम करती है। लेकिन इस पर कोई बड़ा फैसला अभी तक नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने भी इस पर कुछ नियम बनाने की कोशिश की थी, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट में वह कोशिश भी नाकाम हो गई थी। दरअसल ऑनलाइन गेमिंग पूरी तरीके से गैंबलिंग एक्ट 1867 पर टिकी है, जोकि बहुत ही पुराना है। जिसमें राज्य सरकारी अपने राज्य में तो जुए की गतिविधियों को बैन कर सकती है, लेकिन ऑनलाइन को लेकर इस तरह का कोई कानून नहीं है, इसलिए अक्सर ऑनलाइन गेमिंग बैन करने में या रेगुलेट करने में काफी परेशानियां होती है।

GST में बढ़ोतरी के बावजूद RMG कंपनियों के रेवेन्यू में भारी बढ़ोतरी

गेमिंग पर 28 परसेंट जीएसटी लगने के बावजूद भारतीय गेमिंग मार्केट 23% की दर से बढ़ा है। वेंचर कैपिटल फॉर्म लुमिकाई की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023- 24 के फाइनेंशियल ईयर में भारतीय गेमिंग बाजार 3.8 बिलियन डॉलर का हो गया है। इन-एप परचेज और इन एप रिवेन्यू की वजह से गेमिंग बाजार 2029 तक 9.2 बिलियन तक का हो सकता है।

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गेमिंग रिसर्च कंपनी Lumikai में की रिपोर्ट के मुताबिक अगले 5 सालों में भारतीय गेमिंग बाजार 20% की दर से बढ़ेगा। इस सेक्टर में सबसे ज्यादा गेमिंग ग्रोथ रियल मनी गेमिंग से होगी, जो की सबसे बड़ा रिवेन्यू कमाने वाला क्षेत्र है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में रियल मनी गेमिंग 41 परसेंट की दर से बढ़ा है। रिसर्च के मुताबिक 2029 तक की इन एप परचेज़ रियल मनी गेमिंग को पीछे छोड़ देंगे।

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Lumikai की फाउंडिंग जनरल पार्टनर सलोनी सहगल के मुताबिक गेमर अब धीरे-धीरे करके नॉन रियल मनी गेमिंग से रियल मनी गेमिंग की तरफ माइग्रेट हो रहे हैं। रियल मनी गेमिंग सिर्फ पैसे जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह रिक्रिएशन का भी तरीका है। इस रिपोर्ट में बताया गया है की 2024 में माइंडकोर गेम्स 53 परसेंट की दर से बढ़ें है, जबकि हाइपर कैजुअल गेम्स 10% सालाना की दर से बढ़ीं है, इन गेम्स में ऐड रिवेन्यू भी बढ़ा है।

जीएसटी बढ़ाने के बावजूद रियल मनी गेमिंग कंपनियों की टॉप लाइन ने 400 मिलियन डॉलर 2024 में जोड़ें हैं, हालांकि कंपनियां के ग्रॉस मार्जिन में 30% तक की कमी हुई है, क्योंकि कंपनियां पेबैक ज्यादा कर रहे हैं। बड़ी रियल मनी गेमिंग कंपनियों ने प्लेयर्स पर जीएसटी बर्डन को खुद उठा लिया है, जबकि छोटी कंपनियां वर्किंग कैपिटल की परेशानियों से जूझ रही है। इस दौरान आरएमजी से कैजुअल गेमिंग की तरफ गेमर जा रहे हैं। भारतीय गेमर पैसा खर्च करने को तैयार है, रिपोर्ट के मुताबिक 25% भारतीय गेमर्स ने 2024 में गेम्स के ऊपर पैसा खर्च किया है।

Betting in India: तेलंगना में सट्टा लगाते 5 लोगों को पुलिस ने रंगेहाथों पकड़ा

Betting in India: देश भर में सट्टा बाजार तेजी से गली मोहल्ला तक पहुंच रहा है। ऐसे में राज्य पुलिस लगातार सट्टेबाजों और उनके सिस्टम को तोड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन इसमें अभी तक सिर्फ छोटे-मोटे लोग ही गिरफ्तार हो पा रहे हैं। तेलंगाना पुलिस ने गढ़वाल एरिया में ऑनलाइन सट्टा खेलने वाले पांच लोगों को दबोचा है। इन लोगों के पास ₹100000 से ज्यादा की नगदी और पांच मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

पुलिस के इस छापे के बाद सट्टा खेलने वाले लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। देश भर में सट्टा गैरकानूनी है, लेकिन इसके बावजूद भी ऑनलाइन सट्टा आजकल बहुत आसानी से खेला जा सकता है। हजारों की संख्या में ऐसी वेबसाइट आ गई है, जो की सीधा सट्टा खिलवाती है। तेलंगाना मामले में पुलिस अधिकारी सीपीटी श्रीनिवास राव ने स्पेशल ब्रांच को निर्देश दिया था कि वह सटोरियों के अड्डों पर छापेमारी करें। इसके बाद पुलिस ने इन पांच लोगों को सट्टा खेलते हुए गिरफ्तार किया है।

इससे पहले भी छत्तीसगढ़ पुलिस ने बिलासपुर में सट्टा खिलाने वाले एक स्टोरिए संतोष बजाज को पकड़ा था। जिसने खुलेआम यह कहा था कि मैं सट्टा खिलाता हूं और पुलिस को रोज ₹5000 देता हूं।

हालांकि भारत के ज्यादातर सट्टा खिलाने वाले लोग अब भारत की बजाय विदेश में रहकर यहां पर अपनी वेबसाइटों के जरिए से सट्टा खिलाने में लगे हुए हैं। महादेव बुक एप इसका जीता जागता उदाहरण है, जोकि दुबई से बैठकर अपना धंधा ऑपरेट कर रहा है। इससे पहले भारत में मटका काफी चर्चित रहा था जो की मटके से पर्ची निकाल कर परिणाम घोषित करते थे।

Ban on online gaming: ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ विजय गोयल करेंंगे आंदोलन?

कभी लाटरी के खिलाफ रेगुलेशन लाने के लिए बड़ा आंदोलन चलाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने अब ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ भी आंदोलन शुरु कर दिया है। इस तरह के पोस्टर विजय गोयल के घर के सामने लोक अभियान के नाम से लगाए गए हैं। हालांकि इस पोस्टर में पूरे ऑनलाइन गेमिंग को ही जुआ बताया गया है और इसको बंद कराने के लिए आंदोलन की बात कही गई है।

विजय गोयल वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे थे और उन्होंने लॉटरी पर सख्त रेगुलेशन के लिए काफी बड़ा आंदोलन चलाया था, जिसके बाद देश में लॉटरी पर कड़े कानून बनाए गए थे। इससे ही लॉटरी सिमटकर कुछ राज्यों तक ही सीमित हो गई है।