Thursday, March 12, 2026
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Actors are motivating youth to gamble: जुआ खेलने के लिए युवाओं को उकसा रहे हैं एक्टर, क्रिकेटर्स

Actors are motivating youth to gamble: युवाओं को जुआ खिलाने के लिए उकसाने का काम इन दिनों सिंगर एक्टर और क्रिकेटर सब करने में लगे हुए हैं,  विदेशी अवैध बैटिंग कंपनियों से पैसे लेकर यह सिंगर, एक्टर और क्रिकेटर्स के साथ साथ सोशल मीडिया पर इनफ्लुएंसर युवाओं को झटके में करोड़ों रुपए कमाने का लालच देने में लगे हुए हैं।

Gambling companies in sports: स्पोर्ट्स के जरिए भारतीयों को लुभा रही हैं अवैध विदेशी जुआ कंपनियां

विदेशी कंपनियां क्रिकेट में सट्टे के नाम पर इनके पैसे कई गुना करने का लालच सरेआम दे रही है और इन पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो रही है। इन कंपनियों ने रैपर बादशाह, सुनील शेट्टी, आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और कई सारे क्रिकेटरों को पैसे देकर अपने लिए विज्ञापन कराएं हैं। जिसमें यह एक्टर क्रिकेटर और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर युवाओं को अवैध सट्टेबाजी करके पैसे कमाने का लालच देते दिखते हैं।

उदारण के लिए  सट्टेबाजी के बड़े खिलाड़ी अन्ना रेडी बुक्स के लिए एक्टर विवेक ओबेरॉय लोगों को इस वेबसाइट पर जाकर सट्टेबाजी करने के लिए कह रहे हैं। वह दक्षिण भारत की प्रमुख हीरोइन काजल अग्रवाल भी लोगों को बैटिंग करने के लिए प्रोत्साहित करती हुई नजर आ रही है। इसी तरह एक्टर सुनील शेट्टी भी आपको इंस्टाग्राम पर इन बेटिंग साइट्स की क्रेडिबिलिटी बढ़ाने के लिए बयान देते हुए नजर आ जाएंगे।

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कई क्रिकेटर भी इन बेटिंग साइट्स के साथ विज्ञापन करते हुए दिखेंगे। दरअसल यह बेटिंग साइट्स अपनी क्रेडिबिलिटी बढ़ाने के लिए इस तरह के बड़े-बड़े और प्रमुख नामों का इस्तेमाल करती हैं। महादेव बुक्स, अन्ना रेड्डी बुक्स, फेयरप्ले, वनएक्सबेट और बहुत सारी बैटिंग कंपनियां भारत में युवाओं को जुए में धकेल रही है। यह कंपनियां ना सिर्फ अवैध तरीके से भारत में कारोबार कर रही हैं, बल्कि भारत के हजारों करोड रुपए अवैध तरीके से विदेशों में भी भेजे जा रहे हैं। खास बात यह है लगातार शिकायतों के बावजूद भी भारत में यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।

ED investigation on Mahadev books: महादेव बुक्स-अन्ना रेड्डी पर ED की जांच शुरु

ED investigation on Mahadev books: देश में क्रिकेट बैटिंग चलाकर लोगों को हज़ारों करोड़ रुपए का चुना लगाने वाले महादेव बुक्स और रेड्डी अन्ना की जांच अब इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने शुरू कर दी है। महादेव बुक्स के सरगना सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, कपिल चलानी और सतीश कुमार दुबई में रहकर भारत समेत करीब 11 देशों में अपना अवैध क्रिकेट बैटिंग का कारोबार चला रहे हैं।

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अवैध सट्टेबाज़ी मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस पहले ही कार्यवाही कर रही है। लेकिन अब विदेशों में धन ले जाने को देखते हुए ईडी ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली है। सूत्रों के मुताबिक ईडी के पास काफी जानकारी आ भी गई है। जिसके आधार पर वह इस अवैध कारोबार के सरगना तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने इससे पहले महादेव बुक्स के काफी गुर्गों को गिरफ्तार किया था। साथ ही उनकी कई संपत्तियों पर छापेमारी भी की थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने तो दिल्ली से सटे नोएडा में महादेव बुक्स का 5000 करोड़ से ज्यादा का कारोबार पकड़ा था, जिसमें 16 लोगो की गिरफ्तारी भी हुई थी। पुलिस ने अपनी जांच में पाया था कि रवि उप्पल का एक रिश्तेदार यूएस में सॉफ्टवेयर डेवलपर है, जिसने महादेव बुक्स एप्प डेवेलप किया है। इसी एप्प के जरिए पिछले कुछ समय में इस सट्टेबाज़ी रैकेट ने देश के लाखों लोगों को बैटिंग के नाम पर धन कमाने का लालच देकर हजारों करोड़ों रुपए का घपला किया है। इसको देखते हुए पिछले कुछ समय से कई राज्यों की पुलिस लगातार इनके काले कारोबार पर ना सिर्फ नजर रख रही है, बल्कि इनके लोगों को गिरफ्तार भी कर रही है। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में महादेव बुक्स नक्सल आतंकियों को भी बड़ी मात्रा में फंड कर रहा है, ताकि उसके ऑपरेशन को आराम से चलाया जा सके।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में क्रिकेट बैटिंग से हर साल एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का धन विदेशों में इस तरह के एप्स के जरिए भेजा जा रहा है। इससे ना सिर्फ लोगों को लूटा जा रहा है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी कमजोर किया जा रहा है।

Rajiv Chandrasekhar: छोटी टेक कंपनियों की समस्या सुलझाने में जुटे राजीव चंद्रशेखर

Rajiv Chandrasekhar: छोटी टेक्नोलॉजी कंपनियों को लेकर मिनिस्टर ऑफ स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेक्नोलॉजी राजीव चंद्रशेखर (Minister of state Electronics & Technology) काफी गंभीरता दिखा रहे हैं। इन कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ राजीव चंद्रशेखर लगभग हर महीने एक बैठक कर रहे हैं। इसी कड़ी में अपने बैंगलोर प्रवास के दौरान उन्होंने एमएसएमई टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की।

बैठक के दौरान कंपनियों के प्रमुखों के साथ चर्चा करते हुए राजीव चंद्रशेखर ने कहा की पिछले कुछ सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद भारत में बिजनेस करने का तरीका काफी बदल गया है। उन्होंने कहा कि जहां पहले इंडियन बैंकिंग सिस्टम सिर्फ 9 परिवारों को ही मदद किया करता था, वही आप छोटे से छोटा बिजनेसमैन और इंटरप्रन्योर भी बैंक लोन ले सकता है। भारत में टेक्नोलॉजी और स्किल एमएसएमई सेक्टर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत में छोटी कंपनियों के लिए बहुत मौके हैं। चाइना से बहुत सारी कंपनियां अपना कारोबार भारत में शिफ्ट कर रही हैं। खुद दुनिया भर का वैल्यू चेंज सिस्टम भारत की सप्लाई चैन पर भरोसा कर रहा है। इससे पहले राजीव चंद्रशेखर ने गेमिंग सेक्टर की कई परेशानियों को दूर करने के लिए इन कंपनियों के प्रतिनिधियों से लगातार ना सिर्फ मुलाकात की , बल्कि सेक्टर के सभी लोगों को एक साथ बिठाकर सेक्टर की प्रॉब्लम स्कोर दूर करने की कोशिश की। फिलहाल केंद्र सरकार ने गेमिंग सेक्टर के लिए नए रूल्स घोषित की है जिनके हिसाब से अब कंपनियों को खुद ही सेल्फ रेगुलेटेड ऑर्गनाइजेशन (SRO) बनाने हैं।

Tax investigation on gaming companies: ऑनलाइन गेमिंग और जुआ कंपनियों पर कसेगा टैक्स शिकंजा

Tax investigation on gaming companies: आने वाले दिनों में गेमिंग कंपनियों के जीएसटी को लेकर आयकर विभाग नोटिस और जांच और तेज करेगा।  इसमें मंत्रालय विदेशी जुआ कंपनियों ( offshore entities providing online betting, gambling)के साथ-साथ देसी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों (Indian onling gaming companies) के खातों की जांच करेगा। 

वित्त मंत्रालय के सूत्रों (Finance ministry sources) के मुताबिक गेमिंग कंपनियों के खातों की जांच के लिए कुछ और कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि बाकी कंपनियों पर भी कार्यवाही चल रही है, पिछले करीब 1 साल से गेमिंग कंपनियों  के खातों को लेकर वित्त विभाग कार्यवाही कर रहा है। अलग-अलग जोन को कंपनियों की लिस्ट बनाकर सीधे खातों की जांच करने का निर्देश दिया जा रहा है। 

वित्त मंत्रालय ने कुछ कंपनियों की जांच के दौरान बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी का मामला पकड़ा था, उसके बाद से ही ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां मंत्रालय के निशाने पर आ गई थी,  टैक्स विभाग के एक बड़े अधिकारी ने gamingindia.com को बताया कि, “विदेशों से ऐप के जरिए भारत में करोड़ों रुपए का कारोबार कर रही जुआ कंपनियां बड़ी मात्रा में भारतीय पैसा बाहर लेकर जा रही हैं, इन को लेकर  नकेल कसी जा रही है। यह कंपनियों भारत में मनी लॉन्ड्रिंग कर रही हैं, हमें जानकारी मिली है  लिहाजा इस मामले में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट को भी जांच में शामिल किया गया है।”

सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया था कि साल 2019 से 2023 के बीच गेमिंग कंपनियों  के 23000 करोड रुपए की टैक्स चोरी के मामले की जांच की जा रही है।

Finance Minister on Gaming GST: GST काउंसिल गेमिंग GST पर जल्द ही लेगी फैसला

Finance Minister on Gaming GST: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि ऑनलाइन गेम गेमिंग पर टैक्सेशन पॉलिसी को लेकर जीएसटी काउंसिल में चर्चा होनी है। उन्होंने उम्मीद जताई टैक्सेशन पॉलिसी फाइनल होने के बाद इस सेक्टर में बड़ा विदेशी निवेश आएगा। इससे पहले वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने भी जानकारी दी थी कि स्किल गेमिंग सेक्टर पर 18 परसेंट कि दर से जीएसटी लिया जाएगा। दरअसल भारत में गेमिंग सेक्टर बहुत तेजी से विकसित हो रहा है, देश में लगभग 4 से 5 करोड़ लोग किसी ना किसी तरीके की ऑनलाइन गेमिंग एक्टिविटी में शामिल है। लिहाजा इस सेक्टर को लेकर सरकार भी काफी सकारात्मक है।

एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी काउंसिल में जल्द ही गेमिंग सेक्टर पर जीएसटी पॉलिसी पर अंतिम फैसला जल्द ही लिया जाएगा। जिसके बाद यह सेक्टर निवेश के लिए और आकर्षित हो जाएगा।

केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर बहुत तेजी से बढ़ा है और अगले 2 सालों के भीतर यह लगभग 30,000 करोड़ के आसपास पहुंच जाएगा। पिछले वित्त वर्ष में यह लगभग 14,000 करोड रुपए सालाना रहा था। जीएसटी की वजह से पिछले 2 सालों में गेमिंग कंपनीज को लेकर काफी सवाल खड़े होते रहे हैं। कई कंपनियों पर भारी जीएसटी रिकवरी भी दिखाई गई थी। इसको लेकर गेमिंग सेक्टर में काफी उथल-पुथल भी हुई थी।

Gaming industry growth: तेज़ी से बढ़ रही है दुनियाभर में गेमिंग इंडस्ट्री

Gaming industry growth: दुनिया भर में इन दिनों गेमिंग की धूम मची हुई है, धीरे-धीरे लोग खासकर युवा गेमिंग के दीवाने हो चुके हैं और यह क्रेज लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से दुनिया भर में गेमिंग इंडस्ट्री इस साल 315. 9 बिलियन डॉलर का आंकड़ा छू सकती है।

ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) के डाटा के मुताबिक 2022 में दुनिया भर की गेमिंग इंडस्ट्री 274  बिलियन डॉलर रही थी। जबकि 2027 तक यह 419 बिलियन डॉलर तक भी पहुंच सकती है। दूसरी ओर भारत में भी गेमिंग का क्रेज बढ़ रहा है। अब भारतीय गेमिंग कंपनियां भी दुनिया की बड़ी गेमिंग कंपनियों से प्रतिस्पर्धा की तैयारियां कर रही हैं। देश की यूनिकार्न कंपनी एमपीएल में तो हाल ही में गेम डेवलपमेंट के लिए विदेशी फंडिंग भी आई है। 

भारत में 2022 में गेमिंग इंडस्ट्री 2.8 बिलियन डॉलर की रही थी। जोकि चालू साल में जिसको देखते हुए सरकार ने अब इस इंडस्ट्री के लिए नए रूल्स जारी किए हैं। ताकि इंडस्ट्री की परेशानियों को दूर किया जा सके। इससे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गेमिंग इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने की बात कर चुके हैं। देश में फिलहाल 800 से 900 गेमिंग कंपनियां काम कर रही हैं। जिनमें से ज्य़ादातर स्टार्टअप हैं और तकनीकी क्षेत्र में काम कर रही हैं।

New gaming rules: ऑनलाइन गेम्स के लिए नए रुल्स, बेटिंग रोकने के लिए सख्त हुआ मंत्रालय

New gaming rules: नई दिल्ली, 6 अप्रेल। केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग के लिए नए नियम बना दिए हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रानिकी एवं सूचना प्रद्योगिकी मंत्रालय (https://www.meity.gov.in/home) ने इनके नियमों को जारी किया। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं  सूचना प्रद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने नए नियमों पर कहा कि ये नियम ऑनलाइन गेमिंग के लिए सेफ्टी, और बेटिंग जैसी स्थिति से बचाने के लिए अहम हैं। इन नियमों से betting and Misinformation रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने नए नियमों पर कहा कि ऑनलाइन गेमिंग को इजाज़त है। लेकिन जहां Wagering होगी उन गेम्स को इजाजत नहीं दी जा सकती है। जिन गेम्स में Betting और Wagering यानी पैसा लगाया जा रहा है, ऐसे खेलों पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि इस तरह के गेम्स से Money Laundering की एक बड़ी चुनौती सामने आ रही है।

दरअसल देश में स्किल और चांस दो तरह के गेम्स खेले जाते हैं। स्किल गेम्स को नॉन बेटिंग में रखा जाता है, जबकि चांस वाले खेलों को जुए की श्रेणी में रखा जाता है। लिहाजा ऑनलाइन गेम्स में कई तरह के गेम्स को लेकर बार बार सवाल खड़े हो रहे थे। इसलिए इस तरह के भ्रम को दूर करने के लिए सरकार ने नए नियम घोषित किए हैं। दूसरी ओर राज्य सरकारें भी ऑनलाइन गेम्स पर अपने मुताबिक नियम बनाती है। इसको लेकर उन्होंने कहा कि अब केंद्र राज्यों के साथ मिलकर ये Legal Framework काम करेगा, ताकि इस इंडस्ट्री को बढ़ाने के साथ साथ Misinformation को रोका जा सके। इसके लिए भारत सरकार एक Organization बनाएगी।

उन्होंने गेमिंग कंपनियों को कहा कि जो केंटेंस सही नहीं है, उसको गेमिंग एप, वेबसाइट्स और बाकी जगहों से हटाना होगा। अगर कंपनियां ये नहीं हटाएंगी तो उनका Intermediary status जा सकता है और उनपर भारतीय कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

उन्होंने कहा कि Online Gaming सेक्टर में काम कर रही Intermediaries ही Self Regulatory Body बनाएंगी। ये SRO वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन, सभी permissable online real money games का डाटा अपने पास रखेंगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल अलग अलग मामलों के लिए 3 SRO होंगे और जरूरी हुआ तो SRO की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी।

Regulation for Gaming sector: गेमिंग सेक्टर के लिए सरकार जल्द लाएगी नियम

Regulation for Gaming sector: केंद्र सरकार जल्द ही ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए नियम कायदे लाने जा रही है, इसके लिए जल्द ही इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Meity), इंडस्ट्री के सभी हिस्सेदारों से बातचीत शुरु करने जा रही है। इसपर इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि गेमिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की कवायद चलाई जाएगी और अगले हफ्ते से इस बाबत कंसलटेशन प्रक्रिया शुरु की जाएगी। हाल ही में केंद्र सरकार ने Meity को गेमिंग सेक्टर के लिए नोडल एजेंसी बनाया है।

सरकार की इस घोषणा का गेमिंग इंडस्ट्री ने स्वागत किया है। देश की सबसे बड़ी गेमिंग एसोसिएशन, ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (एआईजीएफ) के सीईओ रोलैंड लैंडर्स ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने गेमर्स और इंडस्ट्री की मांग को मानते हुए गेमिंग सेक्टर के लिए भी इंटरमिडिएटरी रेगुलेशन में बदलाव करने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का ये कदम काफी महत्वपूर्ण हैं, इससे गेमिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। एआईजीएफ ने सबसे पहले सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (एसआरओ) बनाया है, ताकि गेम्स को रेगुलेट किया जा सके।

दरअसल देश में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर 15 हज़ार करोड़ रुपये से ज्य़ादा का है और इसमें बहुत सारी कंपनियां निवेश कर रही है। देश में दो स्टार्टअप एमपीएल और ड्रीम11 यूनिकार्न भी बन चुके हैं। ऐसे में सरकार अब इस सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए काम कर रही है, ताकि इस सेक्टर की परेशानियों को तो कम किया ही जा सके और गेम्स खेलने वालों के जोखिम को भी कम किया जा सके।  

Meity is nodal Ministry for Gaming: गेमिंग सेक्टर को लेकर दूर होगा कंफ्यूजन

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Meity is nodal Ministry for Gaming: भारत सरकार ने देश के तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को नोडल मंत्रालय बना दिया है, लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री को लेकर काफी भ्रम की स्थिति थी, कि कौन सा मंत्रालय इंडस्ट्री को डील करेगा। खुद गेमिंग इंडस्ट्री भी नोडल मंत्रालय की मांग कर रही थी। इसके साथ ही ई-स्पोर्टस सेक्टर को खेल मंत्रालय के तहत किया गया है।

सरकार के इस फैसले के बाद केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया पर कहा कि मंत्रालय जल्द ही ऑनलाइन गेमिंग के एसआरओ के लिए नियम जारी करेगा और इन नियमों पर सार्वजनिक चर्चा शुरू होगी।

सरकार इस साल की शुरुआत से ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र को रेगुलेट करने की योजना पर विचार कर रही है, लेकिन इस सेक्टर से कौन सा मंत्रालय डील करेगा, इसको लेकर लगातार कंफ्युजन बना रहा। दरअसल ऑनलाइन गेमिंग तकनीकी और अन्य कारणों से कई मंत्रालयों के तहत आती थी, जिसमें MeitY, सूचना और सूचना मंत्रालय (MIB) और खेल मंत्रालय शामिल थे। लिहाजा कौन सा मंत्रालय इस सेक्टर को लेकर नियम बनाएगा, इसको लेकर कंफ्यूजन बना रहा। इसलिए सेक्टर को लेकर नियम बनाने में समस्या आती रही।

सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग नियमों पर काम करने और इस क्षेत्र के लिए एक नोडल मंत्रालय की पहचान करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर की अध्यक्षता में मई 2022 में सात सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टास्क फोर्स का गठन किया था।

इसके बाद, मंत्री ने स्किल-गेमिंग प्लेटफॉर्म, उद्योग संघों, वकीलों और गेमर्स के साथ कई दौर की चर्चा की, जिन्होंने सेल्फ रेगुलेटड नीति ढांचे की मांग की थी। सरकार के इस कदम से गेमिंग स्टार्टअप्स को रेगुलेट करने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र के विकास में सहायता मिलेगी।

ई-स्पोर्टस खेल मंत्रालय के तहत आएगा

23 दिसंबर, 2022 की एक गजट अधिसूचना और 26 दिसंबर को प्रकाशित गजट अधिसूचना के अनुसार, बहु-खेल आयोजनों के हिस्से के रूप में उभरता हुआ ई-स्पोर्ट्स सेक्टर युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अंतर्गत आएगा।

गेमिंग और इंटरैक्टिव मीडिया वेंचर फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के गेमिंग क्षेत्र में रेवेन्यू FY21 में $2 बिलियन से बढ़कर FY22 में $2.6 बिलियन हो गया और वित्त अगले पांच सालों में इसके 27 प्रतिशत CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) से $8.6 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है।

Gaming Industry: विदेशी अवैध सट्टा कंपनियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को हो रहा है नुकसान

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Gaming Industry: विदेशी गेंबलिंग कंपनियों की वजह से देश का करोड़ो रुपये का टैक्स रेवेन्यू घाटे में जा रहा है। ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) के सीईओ रोलैंड लैंडर्स ने gaming.in को बताया कि एक तरफ जहां भारत में रजिस्टर्ड और कानून का पालन करने वाली गेमिंग कंपनियां हैं, तो दूसरी ओर विदेशों से ऑपरेट होने वाली गेंबलिंग कंपनियां हैं, जोकि गैरकानूनी तो हैं ही साथ ही वो करोड़ो रुपये का टैक्स चोरी भी कर रही हैं।

Gaming Jobs : Gaming Industry has Lakhs of Jobs For You

लिहाजा इन कंपनियों पर तुरंत बैन लगाने और बड़ा एक्शन लेने की जरुरत है। रोलैंड के मुताबिक इन कंपनियां में सट्टा लगा रहे लोग किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं है।

Roland Landers, CEO, AIGF

दरअसल पूरे देश में ऑनलाइन तरीके से सट्टा खिलाने वाली कंपनियां बड़ी संख्या में ऑपरेट कर रही है, जोकि सालाना करोड़ों रुपये का टैक्स चोरी करने के साथ साथ पूरी तरीके से अवैध सट्टे में लिप्त है। बड़ी बात ये है कि दुबई, माल्टा और अन्य टैक्स हैवन से ऑपरेट होने वाली ये कंपनियां टीवी, रेडियो और अखबारों में विज्ञापन तक दे रही थी, जिनपर बाद में सरकार ने रोक लगाई है।

देसी कंपनियों को हो रहा है नुकसान

देश में फिलहाल गेमिंग कारोबार सालान 2 बिलियन डॉलर है, जोकि अगले तीन सालों में 5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। लेकिन अवैध ऑनलाइन सट्टा खिलाने वाली कंपनियां गेमिंग इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचा रही है। देसी कंपनियां सरकार को ख़ासा टैक्स रेवेन्यू दे रही है और साथ साथ देश में गेमिंग डेवपलमेंट के काम में भी लगी हुई हैं। इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार मिल रहा है।