Thursday, March 12, 2026
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BGIS इंडिया सीरीज के जरिए ग्रासरूट प्लेयर्स को मिलेगी नेशनल लेवल की पहचान: Krafton India CEO

क्राफ्टन इंडिया के सीईओ सीन ह्युनिल सोहन ने कहा है कि बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया सीरीज़ (बीजीआईएस) के जरिए भारत में ग्रासरूट के प्लेयर्स भी नेशनल लेवल पर अपना टेलेंट दिखा सकते हैं और नेशनल से आगे इंटरनेशनल तक आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने ईस्पोर्ट्स के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता और एआई जैसी उभरती हुई तकनीकों के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया।

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क्राफ्टन इंडिया की प्रमुख ने कहा कि नए और उभरते हुए टेलेंट को आगे बढ़ाने के लिए उनका प्लेटफ़ॉर्म काफी कोशिश कर रहा है। बीजीआईएस “ग्रासरूट खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा ईस्पोर्ट्स इवेंट है, जिसमें स्थानीय खिलाड़ियों को आगे बढ़ाया जाता है। इस सीरीज़ ने खिलाड़ियों को “सुधारने और कंपीटिशन करने के लिए” बहुत ज़रूरी प्रोत्साहन दिया है। सोहन ने बताया कि बीजपीआईएस में बड़ी संख्या में दर्शक आकर्षित हो रहे हैं। इस इवेंट में ना सिर्फ बड़ी संख्या में दर्शक आ रहे हैं, बल्कि उनकी प्रतिक्रिया भी मिल रही है।

AI का इस्तेमाल

क्राफ्टन गेमिंग में AI और VR के महत्व को पहचानता है और क्राफ्टन ने पहले PUBG PC के VR का उपयोग किया था। हालाँकि बाद में इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया। सोहन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कंपनी नई तकनीकों की खोज के लिए प्रतिबद्ध है।

“हमारे पास छोटे पायलट प्रोजेक्ट हुआ करते थे, जैसे PUBG PC को VR संस्करण में पोर्ट करना। हमने इसे आज़माया, लेकिन बाद में हमने इसे रद्द कर दिया। यह बहुत समय पहले की बात है, जैसे कि चार या पाँच साल पहले।” अब गेम डेवलपमेंट को बेहतर करने के लिए जनरेटिव AI का उपयोग किया जा रहा है और AI को मुख्य गेमप्ले के तौर पर शामिल किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि “जनरेटिव AI तकनीक की वजह से नए गेमिंग आइडिया अब बहुत आसान हो गई है। अब आपको वास्तव में कॉन्सेप्चुअल आर्टिस्ट की ज़रूरत नहीं है। आप अपने गेमिंग आइडिया बनाने के लिए DALL-E या डिफ्यूज़न या ऐसा कुछ इस्तेमाल कर सकते हैं।”

सोहन ने माना कि ये एप्लिकेशन सिर्फ़ क्राफ्टन के लिए नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कंपनी के “गेम के भीतर AI बॉट्स को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने पर ज़ोर दिया, ताकि एक अच्छा गेमिंग अनुभव प्रदान किया जा सके।” उनका मानना ​​है कि इन AI बॉट्स में गेमप्ले को काफ़ी हद तक बेहतर बनाने की क्षमता है।
AI-संचालित गेमप्ले के बारे में क्राफ्टन की खोज में गहराई से जाने पर, सोहन ने “मैजिक माइक” नामक एक प्रायोगिक परियोजना का खुलासा किया, इसे “एक बहुत ही प्रायोगिक और छोटा गेम” बताया। उन्होंने विस्तार से बताया, “हम जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह नए गेमप्ले का आविष्कार करना है जिसे AI तकनीक द्वारा सक्षम किया जा सकता है। हमारा मानना ​​है कि अगर उस क्षमता को अनलॉक किया जाता है, तो यह नए गेमप्ले के लिए बहुत सारे अवसर पैदा करेगा, जो इस AI ज्ञान से पहले संभव नहीं था।”

“मैजिक माइक” वॉयस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करता है। खिलाड़ी अपने माइक्रोफ़ोन में विशिष्ट “जादुई मंत्र” चिल्लाते हैं, जिन्हें तब गेम के भीतर AI मॉड्यूल द्वारा पहचाना जाता है, जिससे विशिष्ट क्रियाएँ या घटनाएँ शुरू होती हैं।

सोहन ने एक अन्य प्रायोगिक परियोजना का वर्णन किया, एक रहस्य कहानी वाला गेम जिसमें खिलाड़ी जानकारी इकट्ठा करने और रहस्य को सुलझाने के लिए AI बॉट के साथ बातचीत करते हैं। उन्होंने अपने पिछले बैटल रॉयल गेम की सफलता का हवाला देते हुए ऐसे खेलों के मुख्यधारा में आने की संभावना को स्वीकार किया।

क्राफ्टन की निवेश रणनीति: अधिग्रहण और भागीदारी

सोहन ने क्राफ्टन की निवेश योजनाओं के बारे में भी जानकारी साझा की। एक या दो स्टार्टअप निवेशों की आगामी घोषणा का खुलासा करते हुए, उन्होंने स्पष्ट किया कि ये निवेश अपेक्षाकृत छोटे हैं। “हम एक बड़े अधिग्रहण के अवसर पर विचार कर रहे हैं…शायद अधिक परिपक्व अवस्था में, विकास चरण वाली कंपनी की तरह, शायद 50 मिलियन से 100 मिलियन के बीच राजस्व वाली…लेकिन कुछ भी बहुत आसन्न नहीं है…कोई सौदा बंद होने के करीब नहीं है।”

Gaming में पैसे हारने के बाद suicide करने वाले का शव पाकिस्तान कैसे पहुंचा?

जम्मू के रहने वाला हर्ष नगरोटा ने गेमिंग एप पर ₹80000 हारने के बाद सुसाइड कर लिया है। हर्ष की बॉडी चेनाब नदी में बहकर पाकिस्तान चली गई थी। वहीं से हर्ष के फोन नंबर पर लगातार व्हाट्सअप मैसेज के बाद हर्ष के पिता को उसके सुसाइड का पता चला। दरअसल हर्ष नगरोटा 11 जून से लापता था, उसपर गेमिंग एप पर 80 हज़ार रुपये हारने की वजह से मानसिक दबाव था।

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हर्ष के पिता सुभाष शर्मा ने इस मामले में प्रधानमंत्री के दखल की मांग की है, चूंकि हर्ष की बॉडी चेनाब रिवर में बहकर पाकिस्तान चली गई है और वहां पर उसकी बॉडी दफना दी गई है। ऐसे में हर्ष के पिता ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि, उनके बेटे की अस्थियां भारत में लाकर उसका अपने रीति रिवाजों से अंतिम संस्कार कर पाए।

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पुलिस के मुताबिक दरअसल हर्ष के पिता को यह बात तब पता चली जब उन्होंने हर्ष के मोबाइल सिम का डुप्लीकेट नंबर निकलवा कर उसे ऑन किया तो उसपर बहुत सारे व्हाट्सएप मैसेज आए। जिनसे पता चला कि हर्ष की बॉडी पाकिस्तान में मिली थी और वहां पर उसको दफना दिया गया था। हर्ष 11 जून से लापता था। हर्ष के पिता के मुताबिक, पाकिस्तान के नंबर से जो उनको व्हाट्सएप मैसेज आया था उनके उसके मुताबिक हर्ष की बॉडी के पास आईडी कार्ड भी मिला था और वहीं से ही हर्ष के मोबाइल नंबर का भी पता चला था।

सऊदी अरब में आयोजित होंगे पहले Olympic E-sports

सऊदी अरब में दुनिया के पहले ओलंपिक E-sports गेम होने जा रहे हैं। 2025 में ओलंपिक ई-स्पोर्ट्स गेम्स सऊदी अरब (Olympic E-Sports Games Saudi Arabia) में आयोजित किए जाएंगे। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने यह घोषणा की है, जिस ऐतिहासिक इवेंट ई-स्पोर्ट्स का महत्व देखने को मिलेगा।

ईस्पोर्ट्स ओलंपिक को साऊदी अरब में आयोजित करने का फैसला इंडियन ओलंपिक कमेटी के हाल ही में ओलंपिक की स्पोर्ट्स गेम्स स्थापित करने के बाद लिया गया है। इस बाबत ओलंपिक गेम्स पेरिस 2024 से पहले आयोजित बैठक में यह प्रस्ताव रखा जाएगा। 2025 में सऊदी अरब में होने जा रहे ओलंपिक ई-स्पोर्ट्स से इन गेम्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। अब दुनिया के बेहतरीन ही ई-स्पोर्ट्स गेमर गोल्ड के लिए सऊदी अरब में एक दूसरे का मुकाबला करेंगे। आईओसी के प्रेसिडेंट थॉमस बैक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा ओलंपिक ई-स्पोर्ट्स आयोजित करना एक बड़ी बात है। यह अपने आप में अलग है और ई-स्पोर्ट्स एक अलग तरीके की फील्ड है।

ई-स्पोर्ट्स आयोजित करने में साऊदी अरब के अनुभव के आधार पर मिले इस मौके पर सऊदी अरब के मिनिस्टर ऑफ़ स्पोर्ट्स और सऊदी अरब ओलंपिक और पैरालंपिक कमिटी के अध्यक्ष प्रिंस अब्दुल बिन तुर्की अल फैसल ने कहा कि गेम्स को आयोजित करने को लेकर सऊदी अरब काफी उत्साहित है और यह अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में एक नया चैप्टर शुरू करेगा। इससे पहले सऊदी अरब में 100 से ज्यादा इंटरनेशनल ई-स्पोर्ट्स का आयोजन करवा चुका है। 2018 के बाद से ही इंडियन ओलंपिक कमेटी लगातार ही ई-स्पोर्ट्स को आगे बढ़ावा दे रहा है। सबसे पहले ओलंपिक वर्चुअल सीरीज 2021 में आयोजित की गई थी और ओलंपिक की भारत सीरीज भी सिंगापुर में 2023 में आयोजित की गई थी।

“Real money gaming और विडियो गेम्स के लिए अलग अलग हो पॉलिसी”

वीडियो गेम बनाने वाली कंपनियों ने अपने आप को रियल मनी गेमिंग (Real money gaming) से अलग करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को एक चिट्ठी लिखी है। 70 वीडियो गेम स्टूडियो और ई-स्पोर्ट्स कंपनियां ने यह चिट्ठी प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी है, जिसमें वीडियो गेम्स और रियल मनी गेमिंग को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्टैंडर्ड के आधार पर पॉलिसी बनाने के लिए सिफारिश की है। इस चिट्ठी की एक कापी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी भेजी गई है।

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वीडियो गेम्स और रियल मनी गेम्स के लिए अलग-अलग पॉलिसी बने और उसी हिसाब से फ्रेमवर्क बनाने की वकालत इस चिट्ठी में की गई है, ताकि दोनों तरह के गेम्स का अंतर यूजर को और बाकी लोगों को साफ समझ में आ पाए। इसके लिए इन कंपनियों ने सूचना एवं प्रसारण को नोडल एजेंसी बनाने की वकालत की है। चिट्ठी में लिखा गया है कि एवीजीसी की नोडए मिनिस्ट्री सूचना और प्रसारण मंत्रालय को बनाया जाना चाहिए। इसके लिए बनाई गई कमेटी को ज्वाइंट सेक्रेट्री लेवल के किसी अधिकारी को सीधा देखना चाहिए।

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इससे पहले दिसंबर 2022 में सरकार ने मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी को सभी तरह की ऑनलाइन गेमिंग के लिए नोडल एजेंसी बनाया था, हालांकि इसमें ई-स्पोर्ट्स सेक्टर को यूथ एंड स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री के तहत किया गया था। लेटर में लिखा गया है बेशक वीडियो गेम्स सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी के हिसाब से चलाते हो, लेकिन वह एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का एक हिस्सा हैं और उनकी क्रिएटिविटी और आर्टिस्टिक काम को देखते हुए वीडियो गेम्स को मूवी और वेब सीरीज के साथ ही रखा जाना चाहिए। इसके साथ-साथ इन कंपनियों ने सिफारिश से भी प्रधानमंत्री कार्यालय और इनफॉरमेशन ब्रॉडकास्ट मिनिस्ट्री को भेजी है थे। कंपनी की चिट्ठी के मुताबिक इससे देश में एवीजीसी पॉलिसी बनाने में मदद तो मिलेगी, साथ ही साथ वीडियो गेम इंडस्ट्री के लिए भी काफी यह पॉलिसी मददगार साबित होगी। अभी तक वीडियो गेम और रियल मनी गेमिंग में पॉलिसी लेवल पर कोई अंतर नहीं माना जाता है। हम आपको बता दें रियल मनी गेमिंग में गेम खेलने पर पैसे जीते और हारे जाते हैं, जबकि अन्य विडियो गेम सिर्फ मनोरंजन के लिए खेले जाते हैं।

Online gaming के विरोध में प्रदर्शन कर रहे विधायक के समर्थक गिरफ्तार

Online gaming और जुए का विरोध कर रहे महाराष्ट्र के निर्दलीय विधायक बच्चू कडू को कई समर्थकों के साथ हिरासत में लिया गया है। दक्षिण मुंबई में मंत्रालय के पास प्रदर्शनकारी ऑनलाइन गेमिंग और जुए के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए एकत्र हुए थे। महाराष्ट्र के अमरावती जिले में अचलपुर विधानसभा सीट से विधायक बच्चू कडू ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। कडू अपने समर्थकों के साथ सुबह-सुबह राज्य सचिवालय भवन में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास एकत्र हुए थे।

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प्रदर्शनकारियों ने ऑनलाइन गेमिंग और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जुए पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए तख्तियां और बैनर पकड़े हुए थे। उनके आंदोलन ने इन गतिविधियों से आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चिंता जताई। पुलिस ने इस प्रदर्शन को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के पास आजाद मैदान में लेकर जाने के लिए कहा, लेकिन जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो उन्हें हिरासत में ले लिया।

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इसके बाद, विधायक बच्चू कडू विधान भवन चले गए क्योंकि मानसून सत्र चल रहा था, अधिकारी के अनुसार। इस बीच, उनके समर्थकों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा, जिसके कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आगे की कार्रवाई करनी पड़ी। अधिकारी ने कहा कि बाद में उन्हें हिरासत में लिया गया और मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ले जाया गया। यह विरोध प्रदर्शन भारत में ऑनलाइन गेमिंग और जुए को लेकर चल रही बहस को उजागर करता है, जिसमें कुछ गुट संभावित सामाजिक नुकसान को रोकने के लिए सख्त नियमों की वकालत कर रहे हैं।

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेमिंग बाज़ार बना भारत: EGF-Thornton report

भारत चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा गेमिंग बाज़ार बन गया है। एक रिपोर्ट से पता चला है कि देश में अब 442 मिलियन यानि 44.2 करोड़ ऑनलाइन गेमर्स हैं, थॉर्नटन भारत और ई-गेमिंग फेडरेशन ने संयुक्त रूप से, ‘गार्डियंस ऑफ़ सेफ प्ले: एथिकल गेमिंग फ़ॉर वाइब्रेंट भारत’ नाम से गेमिंग इंडस्ट्री पर एक रिपोर्ट पब्लिश की है। जिसमें गेमिंग इंडस्ट्री वित्त वर्ष 2025 तक 20% की बढ़ोतरी के साथ 253 बिलियन रुपये तक पहुँचने का अनुमान लगाया गया है।

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रिपोर्ट में रियल मनी गेमिंग (RMG) पर ख़ास फोकस किया गया है, जोकि पूरे गेमिंग इंडस्ट्री के रेवेन्यू का प्रमुख स्रोत है। 2023 में सरकार के 28% GST लगाने जैसी चुनौतियों के बावजूद, रियल मनी गेमिंग पर निवेशक अभी भी निवेश कर रहे हैं। हाल ही में SBI म्यूचुअल फंड ने डिजिटल गेमिंग में 410 करोड़ रुपये के निवेश किया है और कामथ ब्रदर्स ने नाज़ारा टेक्नोलॉजीज को 100 करोड़ रुपये का इंवेस्टमेंट किया है।

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इसके साथ साथ विदेशी निवेश भी भारतीय गेमिंग बाज़ार में काफी हुआ है। दक्षिण कोरियाई दिग्गज गेमिंग कंपनी क्राफ्टन इंक ने अगले कुछ सालों में भारतीय स्टार्टअप्स को 150 मिलियन डॉलर देने का वादा किया है। क्राफ्टन ने पहले ही नोडविन गेमिंग, प्रतिलिपि, कुकूएफएम और लोको जैसे प्रमुख भारतीय गेमिंग और कंटेंट वेंचर्स में $140 मिलियन का निवेश किया है।

रिपोर्ट में इंडस्ट्री के विकास गति को बनाए रखने के लिए सेल्फ रेगुलेशन एक मजबूत आचार संहिता की वकालत की गई है। खिलाड़ी सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, यह साइबर खतरों और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे जोखिमों को कम करने वाले नियामक ढांचे की मांग करती है। इसके अलावा, यह रिपोर्ट स्किल और चांस के खेल के बीच अंतर करता है, पब्लिक गेंबलिंग एक्ट और इंटरमिडिएटरी और डिजिटल मीडिया आचार संहिता जैसे कानून मील के पत्थर को नेविगेट करता है।

ई-गेमिंग फेडरेशन के सीईओ अनुराग सक्सेना ने गेमिंग उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करने में विश्वास और जिम्मेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। सक्सेना ने कहा, “विश्वास हमारे उद्योग की आधारशिला है।” “जैसा कि भारत का गेमिंग क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है, खिलाड़ी सुरक्षा और नैतिक प्रथाओं को प्राथमिकता देना सर्वोपरि है। आचार संहिता में समाहित हमारे स्व-नियामक मानकों का उद्देश्य नवाचार, उपभोक्ता संरक्षण और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाना है।” भारत में निवेश, रणनीतिक साझेदारी और विनियामक स्पष्टता द्वारा समर्थित गेमिंग परिदृश्य में उल्लेखनीय वृद्धि देखने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में सभी हितधारकों के लिए सकारात्मकता दिख रही है। जैसे-जैसे उद्योग नए विकास की खोज कर रहा है, हितधारकों को उम्मीद है कि ये बदलाव भारत को वैश्विक गेमिंग नवाचार और स्थिरता में अग्रणी बनने में मदद करेंगे।

हाई कोर्ट ने Gaming Disorder की वजह छात्र को दोबारा दिया मौका

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर से पीड़ित 19 वर्षीय एक लड़के के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिससे उसे अपनी कक्षा 12वीं की Improvment परीक्षा में फिर से बैठने की अनुमति मिल गई है। न्यायाधीश ए एस चंदुरकर और राजेश पाटिल की खंडपीठ ने 4 जुलाई को दिए गए न्यायालय के फैसले से चिकित्सा चुनौतियों का सामना कर रहे छात्रों को अवसर मिला है।

याचिकाकर्ता, एक स्कूल जाने वाला युवा है, जिसने कक्षा 11 तक लगातार 85 से 93 प्रतिशत तक अंक हासिल करते हुए अकादमिक रूप से बेहतरीन प्रदर्शन किया था, उसे मार्च 2023 में डिप्रेशन और इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर हो गया, जिसकी वजह से वह 12वीं में 600 में से 316 नंबर ही मिले, जोकि उसके हिसाब से काफी कम थे।

जुलाई 2023 से दिसंबर 2023 तक डिप्रेशन की वजह से जुलाई 2023 में रीपीट परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। मार्च 2024 की सुधार परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगने के के उनके अनुरोध को कॉलेज अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें उच्च न्यायालय का दरवाजा में अपील दायर करनी पड़ी। मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा करने और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद, उच्च न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए फैसला दिया कि याचिकाकर्ता वास्तव में चिकित्सा कारणों से अपनी परीक्षाओं में बैठने में असमर्थ था। अपने आदेश में, पीठ ने न्याय के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा, “न्याय के हित में, याचिकाकर्ता द्वारा कॉलेज में जुलाई 2024 की परीक्षा में बैठने की अनुमति के लिए अपेक्षित आवेदन करने और आवश्यक विलंब शुल्क का भुगतान करने के अधीन, उसे 16 जुलाई से शुरू होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी।”

अदालत का निर्णय न केवल इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर जैसी स्थितियों से उत्पन्न मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने वाले छात्रों के सामने आने वाली चुनौतियों को स्वीकार करता है, बल्कि शैक्षिक नीतियों में ऐसी परिस्थितियों को समायोजित करने के महत्व को भी उजागर करता है। याचिकाकर्ता के लिए अगला कदम अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड को सुधारने के अवसर को सुरक्षित करने के लिए अदालत द्वारा निर्धारित प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को पूरा करना है। यह मामला ऐसी ही स्थितियों के लिए एक मिसाल कायम करता है, जहाँ छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियाँ चिकित्सा स्थितियों के कारण बाधित होती हैं, जो न्यायपालिका द्वारा उनकी चुनौतियों के प्रति एक दयालु दृष्टिकोण का संकेत देता है।

इस फैसले से शैक्षणिक संस्थानों और नीति निर्माताओं के बीच प्रतिध्वनित होने की उम्मीद है, जिससे उन्हें अपने अध्ययन को प्रभावित करने वाले मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों से निपटने वाले छात्रों के लिए अधिक लचीली नीतियों और समर्थन तंत्रों पर विचार करने का आग्रह किया जाएगा।

Jab we met की “गीत” अब विडियो गेम में आएगी नज़र

शेमारू एंटरटेनमेंट जल्द ही अपनी मशहूर फिल्मों पर आधारित विडियो गेम्स बाज़ार में लेकर आने वाली है। हिंदी फिल्मों की मशहूर प्रोडक्शन कंपनी शेमारू ने इन फिल्मों को गेम में बदलने के लिए जीमेट्री के साथ करार किया है, जो एक एआई-संचालित लर्निंग और गेम डेवलपमेंट कंपनी है। इस कंपनी के साथ मिलकर शेमारू के मेटावर्स प्लेटफॉर्म, शेमारूवर्स का एआई गेमिंग स्पेस में वेब3 प्लेटफॉर्म पर आईपी-आधारित गेमिंग लाएगी।

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शेमारू एंटरटेनमेंट ने खुलासा किया कि शेमारूवर्स प्लेटफॉर्म अब “जब वी मेट”, “गोलमाल”, “डिस्को डांसर”, “अमर अकबर एंथनी” जैसी लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्मों पर आधारित गेम पेश करेगा। ये आईपी-आधारित गेम प्रशंसकों को मेटावर्स के भीतर गेमिंग का अनुभव देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करेंगे। कंपनी ने कहा है कि जैसे-जैसे मेटावर्स को अपनाना जारी रहेगा, इस इंटरैक्टिव गेमिंग दुनिया में और अधिक फिल्में शामिल की जाएंगी।

शेमारू एंटरटेनमेंट के मुख्य परिचालन अधिकारी अर्घ्य चक्रवर्ती ने इस सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “शेमारू में, हमने हमेशा नवाचार का मार्ग प्रशस्त किया है, और हमारा मेटावर्स प्लेटफॉर्म शेमारूवर्स, भविष्य के मनोरंजन को बनाने के लिए हमारे समर्पण का उदाहरण है। AI-आधारित गेमिंग को शामिल करके, हमारा लक्ष्य अपने उपभोक्ताओं को और भी अधिक आकर्षक अनुभव प्रदान करना है। GMetri के साथ हमारा सहयोग हमारी लोकप्रिय फिल्मों के साथ दर्शकों की बातचीत को बदलने में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, और हम भारत में इमर्सिव एंटरटेनमेंट और गेमिंग स्पेस में अभूतपूर्व नवाचारों को विकसित करने के लिए उत्साहित हैं।” GMetri के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्सव माथुर ने इस उत्साह को दोहराते हुए कहा, “हम अपने FruitSalad.ai तकनीक को ShemarooVerse में लाने के लिए रोमांचित हैं, जो हमारे इमर्सिव लर्निंग और गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म की शक्ति को प्रदर्शित करता है। यह सहयोग हमें यह प्रदर्शित करने की अनुमति देता है कि हमारा AI-संचालित समाधान मनोरंजन IP को आकर्षक, इंटरैक्टिव अनुभवों में कैसे बदल सकता है। गेमीफाइड, इमर्सिव 3D दुनिया बनाने में अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाकर, हम न केवल प्रशंसक जुड़ाव बढ़ा रहे हैं, बल्कि कॉर्पोरेट लर्निंग से लेकर मनोरंजन तक विभिन्न क्षेत्रों में अपनी तकनीक की बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन भी कर रहे हैं। शेमारू के साथ यह साझेदारी बड़े पैमाने पर आकर्षक, व्यक्तिगत अनुभव बनाने में हमारे प्लेटफ़ॉर्म की अनुकूलनशीलता और प्रभावशीलता का प्रमाण है।” इस साझेदारी का उद्देश्य प्रशंसकों को उनके पसंदीदा पात्रों और कहानियों की दुनिया का पता लगाने की अनुमति देकर उनकी सहभागिता को बेहतर बनाना है। जैसे-जैसे शेमारूवर्स विकसित होता है, यह सहयोग नवाचार और डिजिटल मनोरंजन परिदृश्य को बढ़ाने के लिए शेमारू की प्रतिबद्धता को उजागर करता है, साथ ही विभिन्न उद्योगों में एआई-जनरेटेड सामग्री को तेज़ी से तैनात करने की जीमेट्री की क्षमता को भी उजागर करता है।

जीमेट्री के एआई प्लेटफ़ॉर्म FruitSalad.ai के साथ, शेमारूवर्स का लक्ष्य डिजिटल मनोरंजन में अपनी स्थिति को मज़बूत करते हुए कहानी सुनाना और गेमप्ले पेश करना है। प्रशंसक अपनी पसंदीदा बॉलीवुड फ़िल्मों पर आधारित इंटरैक्टिव और इमर्सिव गेमिंग अनुभवों के एक नए युग की उम्मीद कर सकते हैं।

Windows 11 आधारित पहला गेमिंग कंसोल अब भारत में भी

Windows 11-आधारित पहला हैंडहेल्ड गेमिंग कंसोल अब भारत में भी लांच कर दिया है। नए Intel Core Ultra प्रोसेसर से संचालित अपनी तरह के पहले कंसोल है। क्लॉ अपने वैश्विक संस्करण की तुलना में अपडेट किए गए BIOS और GPU ड्राइवर के साथ आता है।

MSI क्लॉ तीन वेरिएंट में उपलब्ध है, जिसमें 512GB SSD से लैस अल्ट्रा 5 मॉडल की कीमत 78,990 रुपये से शुरू होती है। 512GB SSD वाले अल्ट्रा 7 मॉडल की कीमत 86,990 रुपये है, जबकि 1TB SSD वाले टॉप-टियर अल्ट्रा 7 मॉडल की कीमत 89,990 रुपये है। गेमर्स क्लॉ को Amazon और Flipkart सहित सभी प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म से खरीद सकते हैं।

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MSI ने अपने इस गेमिंग कंसोल की कीमतों में काफी कमी है। मूल रूप से 78,990 रुपये की कीमत वाला बेस वेरिएंट अब 68,990 रुपये में उपलब्ध है। इसी तरह, 512GB SSD वाले अल्ट्रा 7 मॉडल की कीमत 86,990 रुपये से घटकर 76,990 रुपये हो गई है और 1TB वैरिएंट की कीमत अब 89,990 रुपये से घटकर 79,990 रुपये हो गई है। प्रत्येक वैरिएंट पर 10,000 रुपये की छूट देने वाली ये छूट विशेष रूप से MSI ब्रांड स्टोर के माध्यम से उपलब्ध हैं। ASUS ROG Ally जैसे उपकरणों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बाजार में अलग दिखने वाला MSI क्लॉ अपने Intel Core Ultra प्रोसेसर के कारण अलग है, जिसके बारे में MSI का दावा है कि यह एडवांस BIOS और GPU ड्राइवरों की मदद से कंसोल के प्रदर्शन को 150 प्रतिशत तक बढ़ा देता है। कंसोल में 100 प्रतिशत sRGB कलर गैमट के साथ 7-इंच FHD 120Hz टच डिस्प्ले है, जोकि आपको गेम का बहुत अच्छा एक्सपीरियंस देता है। क्लॉ के डिज़ाइन में एनालॉग स्टिक और LT/RT ट्रिगर दोनों में हॉल इफ़ेक्ट सेंसर शामिल हैं, जोकि गेम को चलाने में बेहतरीन कंट्रोल करता है। साथ ही डिवाइस के स्थायित्व को भी बढ़ाती हैं। थर्मल प्रबंधन को कूलर बूस्ट हाइपरफ्लो तकनीक से नियंत्रित किया जाता है, जबकि 53WHr बैटरी और 65W फास्ट चार्जिंग क्षमता विस्तारित गेमिंग सत्र सुनिश्चित करती है।

अतिरिक्त सुविधाओं में MSI सेंटर M सॉफ़्टवेयर शामिल है, जो गेमर्स के लिए व्यापक अनुकूलन विकल्प प्रदान करता है, और एनालॉग स्टिक और ABXY बटन के चारों ओर RGB लाइट रिंग्स, डिवाइस में एक स्टाइलिश स्पर्श जोड़ते हैं।

क्लॉ के साथ हैंडहेल्ड गेमिंग मार्केट में MSI का प्रवेश एक महत्वपूर्ण विकास का प्रतिनिधित्व करता है, जो भारतीय गेमर्स को एक शक्तिशाली, पोर्टेबल और अनुकूलन योग्य गेमिंग अनुभव प्रदान करता है।

Mahadev app update: छत्तीसगढ़ के सांसद ने उठाया महादेव एप का मुद्दा

Mahadev app update: छत्तीसगढ़ के सांसद संतोष पांडे ने महादेव ऐप को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस शासन में पूर्व मुख्यमंत्री भगवान महादेव के नाम पर 6000 करोड रुपए से अधिक का सट्टा चला रहे थे। संतोष पांडे छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र से जीतकर संसद में पहुंचे हैं । इसके जवाब में बघेल ने कहा कि वह संसद में निराधार आरोप लगा रहे हैं और इसके खिलाफ वह लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखेंगे।

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इससे पहले भी राज्य में महादेव एप को लेकर काफी राजनैतिक बयानबाज़ी चलती रही है। इस पूरे अवैध जुआ घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम बार बार आया है। इसके जवाब में बघेल ने कहा कि राजनांदगांव के सांसद पांडे ने संसद में मेरे खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री महादेव एप के जरिए 6000 करोड रुपए का सट्टा चला रहे थे। यह आरोप निराधार है, सरकार तो बदल गई है, लेकिन महादेव आप अभी भी चालू है, तो क्या वह अब इसका नाम विष्णु देव सहाय रखने जा रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा ने सट्टेबाजी एप घोटाले में अपनी प्राथमिकी में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ-साथ इस ऐप के मालिक रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर के साथ साथ शुभम सोनी, अनिल कुमार अग्रवाल और 14 लोगों को आरोपी बनाया है।

भाजपा के यहां की सत्ता में आने के बाद राज्य की एजेंसियों ने प्रवर्तन निदेशालय की सूची के आधार पर मामला दर्ज किया है। ईडी ने अब तक रायपुर की अदालत में महादेव वेब से जुड़े पीएमएलए एक्ट के तहत तीन चार्जसीट दायर की है। ईडी ने इस मामले में पहले भी राज्य में कई छापे मारे थे। ईडी के मुताबिक, महादेव अप गेमिंग और सट्टेबाजी मामले में राज्य के कई बड़े नेता और अफसर इसमें शामिल पाए गए हैं। एजेंसी के मुताबिक इस मामले में अभी तक 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और इस ऐप के जरिए राज्य में सालाना 6000 करोड रुपए से ज्यादा की इनकम हो रही है। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक ने इस ऐप को लेकर बड़े सवाल खड़े किए थे।