Thursday, March 12, 2026
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Street Fighter6 का नया Season 2, जल्द होने जा रहा है लांच

पहले सीज़न की सफलता के बाद, Street Fighter6 सीज़न 2 फिर से रोमांचक अपडेट के साथ प्रशंसकों को रोमांचित करने के लिए तैयार है। स्ट्रीट फाइटर 6 सीज़न 2 की रिलीज़ की घोषणा हो गई है।

इस नए सीज़न में गेम को और भी मज़ेदार बनाने के लिए चार नए किरदार शामिल किए जा रहे हैं।

समर गेम फेस्ट में हुई घोषणा
स्ट्रीट फाइटर 6 सीज़न 2 में वापसी करने वाले किरदार कौन कौन से हैं।
समर गेम फेस्ट किक-ऑफ इवेंट के दौरान, स्ट्रीट फाइटर 6 सीज़न 2 के ट्रेलर का अनावरण किया गया, जिसकी शुरुआत एक आकर्षक दृश्य से हुई।

स्ट्रीट फाइटर 6 के कवर स्टार ल्यूक और जेमी को एक कैज़ुअल गेमिंग सेशन का आनंद लेते हुए देखा जा सकता है।

हालांकि, उनका शांतिपूर्ण समय उस समय बाधित होता है, जब दो दिग्गज SNK किरदार, टेरी बोगार्ड और माई शिरानुई, अप्रत्याशित रूप से स्ट्रीट फाइटर 6 सीज़न 2 लाइनअप में पहले जोड़ के रूप में दृश्य में प्रवेश करते हैं।

स्ट्रीट फाइटर 6 सीजन 2 में वापसी करने वाले किरदार

टेरी बोगार्ड (फैटल फ्यूरी/किंग ऑफ फाइटर्स)
माई शिरानुई (फैटल फ्यूरी/किंग ऑफ फाइटर्स)
एलेना (स्ट्रीट फाइटर 3)
एम. बाइसन (स्ट्रीट फाइटर 2)
स्ट्रीट फाइटर रोस्टर में कुछ रोमांचक बदलावों के लिए तैयार हो जाइए!

एम. बाइसन, जो इस सीरीज़ के लंबे समय से विरोधी रहे हैं, आगामी गर्मियों में लाइनअप में शामिल होंगे।

टेरी, फ़ैटल फ़्यूरी का प्रतिष्ठित चेहरा, 2024 की सर्दियों में उपलब्ध होगा। फ़ैटल फ़्यूरी का एक और किरदार, माई, 2025 के फरवरी में आएगा।

एलेना, एक प्रिय किरदार जिसने स्ट्रीट फ़ाइटर III: न्यू जेनरेशन में अपनी शुरुआत की, 2025 की सर्दियों में रोस्टर में शामिल होगी।

ये नए किरदार खेल में नया उत्साह लाएंगे, जिनमें से प्रत्येक की लड़ाई की शैली और क्षमताएँ अद्वितीय होंगी।

उनकी रिलीज़ की तारीखों के लिए बने रहें और स्ट्रीट फ़ाइटर की दुनिया में उनकी शक्ति को उजागर करने के लिए तैयार हो जाएँ!

Illegal gambling हुई काबू से बाहर, सालाना 100 बिलियन डॉलर का डिपॉजिट

Illegal gambling: भारत में अवैध सट्टेबाज़ी लगातार बढ़ रही है, सेंटर फॉर नॉलेज सॉवरिन्टी (CKS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अवैध सट्टेबाजी बाजार में सालाना 100 बिलियन डॉलर का डिपॉजिट होने का अनुमान है और यह 30% की दर से बढ़ रहा है।

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लेफ्टिनेंट जनरल विनोद जी. खंडारे और विनीत गोयनका की एक रिपोर्ट, “भारत में अवैध जुआ और सट्टेबाजी: जोखिम, चुनौतियाँ और प्रतिक्रियाएँ”, में ऑफश्योर गेमिंग, सट्टेबाजी और जुआ ऐप द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और फाइनेंशियल जोखिमों पर प्रकाश डाला गया है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, अवैध जुआ अब अनियंत्रित हो रहा है। इसमें खुलासा किया गया है कि कई अवैध सट्टेबाजी गतिविधियाँ विदेशी एजेंसियों से जुड़ी हुई हैं। यह इटेंलिजेंस, ​​डेटा उल्लंघनों और मनी लॉन्ड्रिंग के बारे में गंभीर सवाल पैदा करता है, जो संभावित कर राजस्व से बचते हुए संदिग्ध लेनदेन और क्रिप्टोकरेंसी सौदों के माध्यम से भारत के वित्तीय इकोसिस्टम को प्रभावित कर रहा है
इसके अलावा, रिपोर्ट में डेटा सुरक्षा चिंताओं पर प्रकाश डाला गया है। अवैध प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ता जानकारी इक्ठ्ठा करते हैं और फिर उसे बेच देते हैं। जिससे साइबर अपराधियों के पास डेटा पहुंच रहा है।

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सीकेएस के संस्थापक सचिव विनीत गोयनका ने कहा, “अवैध जुए की अनियंत्रित बढ़ोतरी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा है। यह जरूरी है कि हम इन गतिविधियों को काबू करने के लिए सक्रिय कदम उठाएं।” हम अपने नागरिकों और अर्थव्यवस्था को अवैध जुए के प्रतिकूल प्रभावों से बचा सकते हैं और वैध गेमिंग ऑपरेटरों को भारत में पनपने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।”

इन निष्कर्षों के जवाब में, श्वेत पत्र जुए के विज्ञापनों और जन जागरूकता अभियानों पर सख्त नियमन का प्रस्ताव करता है। यह अवैध सट्टेबाजी और जुआ गतिविधियों से जुड़े जोखिमों को दूर करने के लिए सरकारी एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के बीच सहयोगात्मक प्रयासों का आह्वान करता है।

रिपोर्ट में ऑनलाइन कौशल-आधारित गेमिंग को वैध बनाने और विनियमित करने के महत्व पर भी जोर दिया गया है ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था में योगदान करने के लिए एक सुरक्षित विकल्प प्रदान किया जा सके। नीतिगत ढांचे को लागू करके, भारत अपने नागरिकों और आर्थिक हितों को अवैध जुए से उत्पन्न खतरों से बचा सकता है।

चूंकि भारत अवैध जुए की बढ़ती समस्या का सामना कर रहा है, इसलिए सीकेएस रिपोर्ट से प्राप्त अंतर्दृष्टि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अखंडता की रक्षा के लिए नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण है, जिससे सभी के लिए अधिक सुरक्षित और अधिक विनियमित गेमिंग वातावरण सुनिश्चित हो सके।

चुनिंदा गेमिंग कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले पायलेट प्रोजेक्ट में बदलाव की घोषणा पर Google की गुगली

बिग टेक कंपनी Google ने भारतीय गेमिंग बाज़ार में एक बार फिर एंटी कंपेटिटिव कदम उठाया है। कंपनी ने चुनिंदा बड़ी गेमिंग कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले पायलट प्रोजेक्ट में कोई फेरबदल नहीं किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत गूगल कुछ सिलेक्टिव एप्स को Google प्लेस्टोर पर डाला गया था। गूगल ने सितंबर 2022 में यह पायलट प्रोग्राम लॉन्च किया था। जिसमें Dream11 और Games 24*7 को शामिल किया गया था। डेली फेंटेसी स्पोर्ट्स और रम्मी के नाम पर यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। गूगल ने इस प्रोजेक्ट को शुरू करते वक्त कहा था कि 30 जून 2024 के बाद इस प्रोजेक्ट में बाकी गेम्स को भी शामिल किया जा सकता है। लेकिन कंपनी ने अब इस पायलट प्रोजेक्ट को इसी स्वरुप में आगे बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से बाकी गेमिंग कंपनियों को नुकसान होता है।

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दरअसल Google playstore पर आने की वजह से Dream11 और गेम्स 24/7 के एप्स को डायरेक्ट डाउनलोड किया जा सकता है, लेकिन बाकी कंपनियों के आपको गूगल पर इन कंपनियों की साइट खोलकर फिर डाउनलोड किया जाता है। जिसकी वजह से टेक्नोलॉजी का फायदा Dream11 और Games24 * 7 को मिल रहा है।

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इस बारे में गूगल के प्रवक्ता ने कहा कि हमें इसको इस पायलट प्रोजेक्ट को और डेवलप करने के लिए कुछ और पार्टनर्स की जरूरत है। हम इस तरफ काम कर रहे हैं। अगले कुछ महीनो में इस मामले में कुछ और अपडेट्स होगी। दूसरी ओर गेमिंग इंडस्ट्री की बॉडी ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन ने कहा है कि गूगल प्ले स्टोर लगभग 90% डिस्ट्रीब्यूशन मार्केट को कंट्रोल करता है। एआईजीएफ के सीईओ रोलैंडर्स ने कहा है कि हम गूगल के इस फैसले से काफी निराशा है, यह एंटी कॉम्पिटेटिव फैसला है, जोकि भारतीय कानून को भी सम्मान नहीं देता। इसके साथ ही साथ यूजर्स के पास भी बहुत ही लिमिटेड चॉइस उपलब्ध होती है, इससे पहले कंपटीशन कमिशन आफ इंडिया ने गूगल को एप पेमेंट्स की कमिश्नर को घटाने के लिए कहा था। गूगल ने पहले गेमिंग एप्स पर 15 से 30% है पेमेंट कमीशन लगाया था जिसको बाद में घटाकर 11 से 26 परसेंट कर दिया गया था। इससे पहले कई बड़े भारतीय ऑनलाइन एप्स को भी अपने प्लेस्टोर से हटा दिया था।

अवैध जुआ कारोबार चलाने वाली Parimatch को भारत में नहीं दिख रही ग्रोथ?

भारत में अवैध तरीके से बैटिंग का कारोबार कर रही परीमैच ने कहा है कि वह भारत में कारोबार करना मुश्किल है और यहां नकली वेबसाइट्स की परेशानियों से जुझ रही हैं। न्यूज़ एजेंसी यूएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में निवेश को लेकर इस अवैध कारोबार करने वाली कंपनी ने कहा है कि वह भारत में निवेश कंपनियों की ग्रोथ के लिए उचित नहीं है। हालांकि बड़ा सवाल है की जो कंपनी ना तो भारत में रजिस्टर है और ना ही यहां पर जुआ खिलाने पर जीएसटी दे रही है, वो कंपनी कह रही है कि भारत में निवेश में बढ़ोतरी नहीं है।

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पिछले कई सालों से भारत में अवैध कारोबार चला रही परीमैच ने इस कारोबार को ढंकने के लिए स्पोर्ट्स और न्यूज जैसे दूसरे डिविजन भी शुरु किए थे। हालांकि सभी को यह मालूम है कि परीमैच का मुख्य कारोबार अवैध जुआ खिलाना है। परीमैच का जुआ कारोबार देश के बाहर से ऑपरेट होता है। भारत में जिस प्लेटफार्म पर लोग परीमैच में दांव लगाते हैं, उसका सर्वर भारत में नहीं है, यह अवैध जुआ कंपनी भारत से सिर्फ दांव पर लगे फंड को हवाला के जरिए विदेश भेजती है। जिसकी जांच फिलहाल चल रही है।

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वित्त मंत्रालय ने इन अवैध जुआ कंपनियों को जीएसटी में रजिस्टर करने का एक मौका भी दिया था। जब मंत्रालय ने एक फार्म जारी कर इन कंपनियों को उसमें अपनी जानकारी देने के लिए कहा था। लेकिन अभी तक किसी भी कंपनी ने जीएसटी विभाग के पास रजिस्ट्रेशन नहीं किया है और बिना रजिस्ट्रेशन और जीएसटी दिए, यह जुआ कंपनियां भारत में कामकाज कर रही है। इन अवैध जुआ कंपनियों को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय ने भी कई बार गाइडलाइंस जारी की है, साथ ही गृह मंत्रालय और विभिन्न एजेंसियां भी इन कंपनियों को लेकर अलग-अलग तरह की जांच कर रही है।

Real Money Gaming पर रेट्रोस्पेक्टिव जीएसटी को हटाने की तैयारी?

रियल मनी गेमिंग के लिए एक अच्छी खबर है, सरकार रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। फिलहाल मामला केंद्र सरकार की लीगल टीम के पास है, वहां से अगर रेट्रोस्पेक्टिव हटाने के लिए मंजूरी मिल जाती है तो जल्दी रियल मनी गेमिंग कंपनी पर रेट्रोस्पेक्टिव  जीएसटी का मुद्दा खत्म हो जाएगा। फिलहाल रियल मनी गेमिंग कंपनी को जीएसटी विभाग की तरफ से एक लाख करोड रुपए से ज्यादा के जीएसटी चोरी के नोटिस मिले हुए हैं। कुछ कंपनियों ने इन नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर स्टे लिया हुआ है। गेम्सक्राफ्ट और जीएसटी विभाग के बीच में एक मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है, जिसपर जुलाई में सुनवाई होगी। दूसरी ओर 22 जून को जीएसटी काउंसिल की बैठक भी होने जा रही है। जिसमें फिटमेंट कमेटी में हुए मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

वित्त मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने बताया की रेट्रोस्पेक्टिव जीएसटी को लेकर फिटमेंट कमेटी में इस पर विचार करने की बात कही गई है। हालांकि यह भी कहा है यह एक लंबी प्रक्रिया है, इस पर फिलहाल जीएसटी विभाग ने लीगल ओपिनियन मांगा हुआ है। लीगल ओपिनियन के बाद ही  रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के ऊपर कोई फैसला होगा।

दूसरी ओर 28% जीएसटी को कम करने को लेकर भी फिटमेंट कमेटी में चर्चा हुई है, हालांकि रियल मनी गेमिंग कंपनियों की तरफ से इस टैक्स को काम करने के लिए कोई आधिकारिक मांग नहीं की गई है। ऐसे में फिटमेंट कमिटी ने इस पर विचार करने से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर कसीनो इंडस्ट्री ने इस टैक्स को कम करने के लिए मांग की है। दरअसल सरकार ने गेमिंग इंडस्ट्री पर 28% जीएसटी लगा दिया था और उसके बाद कहा था कि 6 महीने के बाद इस पर समीक्षा की जाएगी 1 अक्टूबर से  गेमिंग इंडस्ट्री और कसीनो पर 28% जीएसटी लगाया गया था। 

ग्रोथ के लिए गेमिंग स्टूडियो स्थापित करें कंपनियां: अनुज टंडन

देश के प्रमुख गेमिंग लीडर और जेटसिंथेसिस के सीईओ अनुज टंडन (Anuj Tandon, gaming leader and CEO of JetSynthesys) ने कहा है कि भारत में गेमिंग इकोसिस्टम (Gaming Ecosystem) डेवलप करने के लिए जरूरी है, जिससे गेमिंग कंपनियां ज्यादा से ज्यादा गेमिंग स्टूडियो स्थापित करें, ताकि ज्यादा गेम डेवलप हो पाए। उन्होंने यह भी कहा की इन्वेस्टमेंट राइट एरिया में होना चाहिए। सीएनबीसी अरेबिया को दिए एक एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने गेमिंग के लिए राइट माइंड सेट की जरूरत पर भी जोर दिया। 

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अनुज टंडन ने कहा कि, भारत और मिडिल ईस्ट की मार्केट गेमिंग के लिहाज से इमर्जिंग मार्केट (India and Middle East are emerging markets in terms of gaming market) है। यहां के लोगों को लोकल पर गुड क्वालिटी का कंटेंट ज्यादा चाहिए। अगर ऐसा होता है तो इन देशों में गेमिंग सेक्टर तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकल का मतलब यह नहीं होगा की कंटेंट की क्वालिटी से समझौता किया जाए, बल्कि लोकल कंटेंट को अच्छी क्वालिटी के साथ तैयार किया जाएगा तो वह डोमेस्टिक के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट में भी मशहूर होगा। उन्होंने कहा कि एआई के जरिए से गेम डेवलपमेंट तेजी से होता है, लिहाजा इसका इस्तेमाल होना चाहिए। गेमिंग को लेकर अपने विचार साझा करते हुए टंडन ने कहा कि, गेमिंग के बारे में लोगों को एजुकेट करने की भी बहुत जरूरत है, गेमिंग प्रोग्रामिंग के बारे में बताने से गेमिंग इंडस्ट्री को लेकर काफी चीज बेहतर होती है। युवा लोगों को जितना इन चीजों के बारे में पता होगा उतना ही गेमिंग सेक्टर डेवलप होगा।

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फिलहाल भारत और मिडिल ईस्ट गेमिंग सेक्टर में कुछ बड़ा करने की योजनाओं पर काम कर रहे है। भारत में काफी गेमिंग कंपनियां अपने गेमिंग स्टूडियो स्थापित कर रही है वहीं मिडल ईस्ट में भी वहां की सरकारी गेमिंग को प्रोत्साहित करने की कोशिश में लगी हुई है। सऊदी अरब में तो एक बहुत बड़ा गेमिंग हब भी तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी तरह दुबई में भी काफी गेमिंग कंपनी खुल रही है। भारत में फिलहाल गेमिंग सेक्टर तेजी से डेवलप हो रहा है। यहां पर कैजुअल गेमिंग रियल मनी गेमिंग कंपनियां लगातार बड़े निवेश कर रही है और अच्छा पैसा भी कमा रहे हैं। 

Rantan Khatri पर बन रही है वेब सीरीज “मटका किंग”

भारत में कभी मटका किंग (Matka King) के नाम से पहचाने जाने वाले रतन खत्री पर एक फिल्म बनने जा रही है। मुंबई मटका में काम शुरु करके उसे पूरे देश में मशहूर करने वाले रतन खत्री (Ratan Khatri) को लेकर बहुत सारी बातें कही सुनी जाती है, लेकिन खत्री पर पहली बार फिल्म बनने जा रही है। एक्टर विजय वर्मा ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर अपनी आगामी वेब सीरीज “मटका किंग” की घोषणा की है। फिल्म का निर्देशन नागराज मंजुले कर रहे हैं, जिन्होंने “सैराट” और “फैंड्री” फिल्मों के लिए जाना जाता है, यह सीरीज फिलहाल बन रही है।

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मटका किंग रतन खत्री ने मटका के अवैध कारोबार पर 1960 से 1990 तक राज किया था। रतन खत्री को भारत में सट्टेबाजी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता है। सिंधी परिवार में जन्मे खत्री 1947 के विभाजन के दौरान कराची से भारत आ गए। बाद में उन्होंने 1962 में मुंबई में शुरू हुए अवैध जुए के एक रूप मटका को एक बहुत ही मशहूर कर दिया।

शुरू में, खत्री ने कल्याणजी भगत के लिए काम किया, जो वर्ली मटका चलाया करते थे। बाद में रतन ने अपना खुद का रतन मटका शुरू कर दिया, जिसने लोगों को काफी आकर्षित किया। आपातकाल के दौरान, खत्री को 19 महीने की जेल हुई थी। 1990 के दशक की शुरुआत में वे जुए के कारोबार से रिटायर हो गए और 2020 में उनका निधन हो गया।

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मटका जुए में न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से लेकर बॉम्बे कॉटन एक्सचेंज तक कपास के दाम पर सट्टा लगाता था। 1960 के दशक तक, सिस्टम में बदलाव करके इसमें पर्चियों या ताश के पत्तों से जोड़ा गया, जिसमें पर्ची निकालकर या फिर ताश निकालकर नंबर तय होता था, खत्री को ताश के पत्तों का उपयोग करने के लिए जाना जाता था। आगामी सीरीज़, “मटका किंग” 1960 के दशक के मुंबई में सेट है और एक कपास व्यापारी के तौर पर विजय वर्मा दिखाई देंगे।

नागराज मंजुले और अभय कोरान की इस सीरीज़ में विजय वर्मा रेट्रो लुक में हैं, उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्टर पोस्ट किया है। शो का उद्देश्य यह दर्शाना है कि शहर में इस खेल ने कैसे लोकप्रियता हासिल की। ​​सीरीज़ में कृतिका कामरा, साईं ताम्हणकर, गुलशन ग्रोवर और सिद्धार्थ जाधव भी हैं। इसे सिद्धार्थ रॉय कपूर और नागराज मंजुले ने रॉय कपूर फ़िल्म्स के बैनर तले गार्गी कुलकर्णी, आशीष आर्यन और अश्विनी सिदवानी के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है। निर्देशक करुणा कुमार 1950 और 1980 के दशक के बीच की पृष्ठभूमि पर आधारित “मटका” नामक एक तेलुगु फिल्म भी बना रहे हैं। हालाँकि फिल्म की टीम इस बात से इनकार करती है कि यह रतन खत्री के जीवन पर आधारित है, लेकिन यह मटका जुए से जुड़ी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। फिल्म में वरुण तेज मुख्य भूमिका में हैं, जिसमें चार अलग-अलग लुक हैं।

Gaming से जुड़े विभिन्न आयामों को लेकर सरकार स्थापित करेगी AVGC एक्सीलेंस सेंटर

गेमिंग और उससे जुड़े अन्य आयामों को लेकर भारत सरकार मुंबई में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) तथा एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCoE) स्थापित करने जा रही है। , इस केंद्र के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 10 एकड़ का एक लैंड पार्सल भी आवंटित किया है। जिसमें 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। यह परियोजना FICCI और CII के निर्देशन में स्थापित होगी।

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इस परियोजना में 52% हिस्सेदारी सीआईआई और फिक्की की होगी, जबकि सरकार 48% हिस्सेदारी बनाए रखेगी। परियोजना से जुड़े एक सूत्र ने बताया, “1000 करोड़ रुपये से अधिक की इस पहल का उद्देश्य IIT और IIM के समान एक प्रमुख संस्थान बनाना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भारत AVGC क्षेत्र में विकास के अवसरों का लाभ उठाए, ठीक वैसे ही जैसे उसने IT के साथ किया।”

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अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, NCoE को एक ऐसे संस्थान के रूप में देखा जा रहा है जो AVGC क्षेत्र में स्किल, शिक्षा, उद्योग विकास, रिसर्च और इनोवेशन में काम करेगा। यह केंद्र उद्योग के लिए एक मानक के रूप में काम करेगा, जिससे AVGC में भारत की वैश्विक स्थिति में वृद्धि होगी, खासकर गेमिंग में। AVGC प्रमोशन टास्क फोर्स की 2022 की रिपोर्ट में नीतियों का मार्गदर्शन करने, शैक्षिक ढांचे स्थापित करने, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग करने और वैश्विक स्तर पर भारतीय AVGC क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के उद्योग-नेतृत्व वाले निकाय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।

IPL 2024 के दौरान Sportsbaazi के रेवेन्यू में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी

फेंटेसी गेमिंग कंपनियां गेमिंग के सेक्टर में काफी बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। देश की प्रमुख गेमिंग कंपनी Sportsbaazi ने पिछले आईपीएल 2023 सीजन के मुकाबले इस साल आईपीएल 2024 सीजन में 100% की रेवेन्यू ग्रोथ की है, जबकि T20 वर्ल्ड कप के पहले चरण में उसके यूजर बेस में भी डेढ़ गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

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इसके साथ-साथ Sportsbaazi के प्लेटफार्म पर यूजर्स ने टाइम भी ज्यादा लगाया है, इस फेंटेसी गेम प्लेटफार्म पर विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह, ट्रेवल्स हेड और सुनील नारायण जैसे प्लेयर्स के ऊपर सबसे ज्यादा दांव लगाया गया है। जिस तरह से Sportsbaazi के प्लेयर्स में बढ़ोतरी हुई है, उससे पता चलता है कि इस नए तरीके के खेल में लोगों को मजा आ रहा है। आईपीएल 2024 के दौरान सबसे ज्यादा खेलने वालों की लिस्ट में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली के प्लेयर्स थे। Sportsbaazi के सीईओ और कॉ-फाउंडर सुभाष चोपड़ा के मुताबिक भारतीय ऑनलाइन गेमिंग इकोसिस्टम अगले 5 सालों में बहुत आगे बढ़ने जा रहा है। Sportsbaazi के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि हमारे साथ खेलने वालों की लिस्ट लगातार बढ़ रही है । गेमिंग चैंपियन लीडरबोर्ड भी शुरू किया है जो की कई तरह के गेम्स में खेलने का मौका देता है। चोपड़ा ने बताया कि आईपीएल सीजन के दौरान T20 वर्ल्ड कप के आगे चरणों में खिलाड़ियों का इंगेजमेंट और बढ़ेगा।

ओवर टैक्सेशन से Onling gaming Industry को होगा भारी नुकसान: SOGI

ओवर रेगुलेशन और ओवर टैक्सेशन की वजह से Online gaming industry को बड़ा नुकसान हो सकता है। ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को लेकर गेमिंग इंडस्ट्री के स्किल ऑनलाइन गेमिंग इंस्टिट्यूट (SOGI) का मानना है कि गेमिंग सेक्टर देश की आर्थिक गति को तेज़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एसओजी के सीईओ अमृत किरण सिंह ने गेमिंगइंडिया.इन को बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्रिज़ में से एक ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री है, यह इंडस्ट्री अगर आगे बढ़ेगी तो इसका फायदा सभी को मिलेगा।

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दरअसल ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकतें लगातार काम कर रही है। पूरी दुनिया में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री लगभग 160 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री है। इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ एक फीसदी ही है, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी 25 परसेंट से ज्य़ादा है। जबकि चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी भी इस इंडस्ट्री में 20 फीसदी से ज्य़ादा है। ऐसे में भारत की ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए काफी संभावनाएं हैं। फिलहाल भारत में गेमिंग कंपनियां काफी नई नई गेम्स बनाने के काम में लगी हुई है।

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अमृत किरण के मुताबिक भारत को ग्रंथ के लिए मल्टीपल इंजंस की जरूरत है, जिस तरह 90 के दशक में कंप्यूटर था, उसी तरह आज के दौर में गेमिंग सेक्टर भारतीय इकोनॉमी को बहुत आगे लेकर जा सकता है। लेकिन रेगुलेशन और टैक्सेशन इस सेक्टर की ग्रोथ को डिसाइड करने वाले फैक्टर हैं। अगर इस सेक्टर पर ओवर टैक्सेशन और ओवर रेगुलेशन होगा तो इंडस्ट्री को बहुत नुकसान होगा। अगर ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री को बिना किसी परेशानी के चलने दिया जाए तो भारत की गेमिंग इंडस्ट्री में हिस्सेदारी 5 से 10% आसानी से हो सकती है, लेकिन लेकिन ओवर टैक्सेशन और ओवर रेगुलेशन इस सेक्टर को खासा नुकसान पहुंच सकते हैं क्योंकि यह इंडस्ट्री बॉर्डरलेस है और यह इनोवेशन से संबंधित इंडस्ट्री है इसलिए इसको लेकर बहुत ही ध्यान से काम करने की जरूरत है।